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तीन साल में लगाए आठ लाख पौधे, ढाई लाख सूखे
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पर्यावरण को बचाने के लिए वन विभाग ने पिछले तीन साल में करीब आठ लाख पौधे रिजर्व फॉरेस्ट में लगाए। इनमें से साढ़े पांच लाख पौधे बचे और ढाई लाख तैयार होने से पहले ही खत्म हो गए।
हरिद्वार वन प्रभाग लगभग 33 हजार वन क्षेत्र में फैला हुआ है। वन विभाग की ओर से बरसात में आरक्षित वन क्षेत्र में हर साल पौधरोपण किया जाता है। हरिद्वार वन प्रभाग में जंगली जानवरों का ज्यादा प्रभाव होने से फलदार कम और जंगली पौधे लगाए जाते हैं। इसके बाद बावजूद भी रिजर्व फॉरेस्ट में लगाए जाने वाले पौधों में एक साल में ही बीस फीसदी सूखकर नष्ट हो जाते हैं। इसलिए वन विभाग का शीशम, कंजू, कंजी, आंवला, हरड़, बांस, बहेड़ा, खैर आदि पौधों को लगाने पर अधिक जोर रहता है। इसके अलावा कुछ पीपल, बरगद, पिलखन, गुल्लर आदि के पौधे भी रोपे जाते हैं। तीन सालों में विभाग की ओर से लगाए गए पौधों की बात करें तो रिजर्व फॉरेस्ट में सात लाख 96 हजार 700 पौधे लगाए गए। करीब ढाई लाख पौधे नष्ट हो चुके हैैं। तीन सालों में सबसे अधिक वर्ष 2019-20 में दो लाख 76 हजार 100 पौधे लगाए गए। बीते तीन सालों में विभाग ने करीब साढ़े सात सौ हेक्टेयर के आसपास आरक्षित वन क्षेत्र में नया पौधरोपण किया।
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कोविड काल में 444 हेक्टेयर का लक्ष्य
हरिद्वार। पिछले तीन सालों की बात करें तो विभाग की ओर से वर्ष 2018-19 में 246 हेक्टेयर, वर्ष 2019-20 में 251 हेक्टेयर और बीते वर्ष 2020-21 में 240 हेक्टेयर पर पौधरोपण किया। विभाग की ओर से इस बार लगभग दोगुना लक्ष्य पौधरोपण का रखा है। अधिकारियों के अनुसार बरसात में इस बार 444 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र में पौधरोपण करने की योजना है। जिसमें करीब चार लाख 88 हजार पौधे लगाए जा सकेंगे।
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विभाग हर बरसात में बड़े पैमाने पर नर्सरी तैयार करके पौधरोपण करता है। पौधों की देखभाल के लिए वन कर्मचारी रहते हैं। वन क्षेत्र में जंगली जानवरों को बहुत अधिक प्रभाव है। इसलिए कुछ पौधे नष्ट हो जाते हैं। इस बार भी बड़े पैमाने पर पौधरोपण करने का लक्ष्य रखा गया है।
- नीरज शर्मा, डीएफओ, हरिद्वार
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हरिद्वार वन प्रभाग लगभग 33 हजार वन क्षेत्र में फैला हुआ है। वन विभाग की ओर से बरसात में आरक्षित वन क्षेत्र में हर साल पौधरोपण किया जाता है। हरिद्वार वन प्रभाग में जंगली जानवरों का ज्यादा प्रभाव होने से फलदार कम और जंगली पौधे लगाए जाते हैं। इसके बाद बावजूद भी रिजर्व फॉरेस्ट में लगाए जाने वाले पौधों में एक साल में ही बीस फीसदी सूखकर नष्ट हो जाते हैं। इसलिए वन विभाग का शीशम, कंजू, कंजी, आंवला, हरड़, बांस, बहेड़ा, खैर आदि पौधों को लगाने पर अधिक जोर रहता है। इसके अलावा कुछ पीपल, बरगद, पिलखन, गुल्लर आदि के पौधे भी रोपे जाते हैं। तीन सालों में विभाग की ओर से लगाए गए पौधों की बात करें तो रिजर्व फॉरेस्ट में सात लाख 96 हजार 700 पौधे लगाए गए। करीब ढाई लाख पौधे नष्ट हो चुके हैैं। तीन सालों में सबसे अधिक वर्ष 2019-20 में दो लाख 76 हजार 100 पौधे लगाए गए। बीते तीन सालों में विभाग ने करीब साढ़े सात सौ हेक्टेयर के आसपास आरक्षित वन क्षेत्र में नया पौधरोपण किया।
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कोविड काल में 444 हेक्टेयर का लक्ष्य
हरिद्वार। पिछले तीन सालों की बात करें तो विभाग की ओर से वर्ष 2018-19 में 246 हेक्टेयर, वर्ष 2019-20 में 251 हेक्टेयर और बीते वर्ष 2020-21 में 240 हेक्टेयर पर पौधरोपण किया। विभाग की ओर से इस बार लगभग दोगुना लक्ष्य पौधरोपण का रखा है। अधिकारियों के अनुसार बरसात में इस बार 444 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र में पौधरोपण करने की योजना है। जिसमें करीब चार लाख 88 हजार पौधे लगाए जा सकेंगे।
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विभाग हर बरसात में बड़े पैमाने पर नर्सरी तैयार करके पौधरोपण करता है। पौधों की देखभाल के लिए वन कर्मचारी रहते हैं। वन क्षेत्र में जंगली जानवरों को बहुत अधिक प्रभाव है। इसलिए कुछ पौधे नष्ट हो जाते हैं। इस बार भी बड़े पैमाने पर पौधरोपण करने का लक्ष्य रखा गया है।
- नीरज शर्मा, डीएफओ, हरिद्वार