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Haridwar News: चेक बाउंस मामले में दोषी को एक साल का कारावास
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Iअपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने सुनाया फैसलाI
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जयश्री राणा ने चेक बाउंस के मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी को दोषी करार दिया। दोषी को एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 2.70 लाख का अर्थदंड लगाया गया।
जुर्माने की राशि में से 2.65 लाख प्रतिकार परिवार को देने के आदेश दिए हैं। सिद्धार्थ कौशिक निवासी विवेक विहार हरिद्वार ने यश अरोडा निवासी ओम कुटीर हिमालय डिपो लालतारो हरिद्वार के खिलाफ एनआई एक्ट 138 के तहत परिवाद दर्ज कराया था। सिद्धार्थ का कहना था कि यश ने मित्रता के चलते 1.70 लाख अप्रैल 2015 में उधार मांगे थे। 23 अप्रैल 2015 को गवाह के समक्ष नकद हाथ उधार दिए थे। विश्वास दिलाया था कि जल्द पैसे लौटा देगा। काफी समय बीतने पर पैसे न लौटाने पर मांग की तो उसने 85-85 हजार के दो चेक दो मई 2016 को दिए।
बैंक में चेक लगाने पर बिना भुगतान के वापस हो गए। इसके बाद परिवादी ने यश से चेक का भुगतान न होने की बात कही तो संतोष जनक जवाब नहीं दिया। तब उसने न्यायालय की शरण ली। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने यश अरोडा को दोषी पाते हुए सजा सुनाई है।
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अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जयश्री राणा ने चेक बाउंस के मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी को दोषी करार दिया। दोषी को एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 2.70 लाख का अर्थदंड लगाया गया।
जुर्माने की राशि में से 2.65 लाख प्रतिकार परिवार को देने के आदेश दिए हैं। सिद्धार्थ कौशिक निवासी विवेक विहार हरिद्वार ने यश अरोडा निवासी ओम कुटीर हिमालय डिपो लालतारो हरिद्वार के खिलाफ एनआई एक्ट 138 के तहत परिवाद दर्ज कराया था। सिद्धार्थ का कहना था कि यश ने मित्रता के चलते 1.70 लाख अप्रैल 2015 में उधार मांगे थे। 23 अप्रैल 2015 को गवाह के समक्ष नकद हाथ उधार दिए थे। विश्वास दिलाया था कि जल्द पैसे लौटा देगा। काफी समय बीतने पर पैसे न लौटाने पर मांग की तो उसने 85-85 हजार के दो चेक दो मई 2016 को दिए।
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बैंक में चेक लगाने पर बिना भुगतान के वापस हो गए। इसके बाद परिवादी ने यश से चेक का भुगतान न होने की बात कही तो संतोष जनक जवाब नहीं दिया। तब उसने न्यायालय की शरण ली। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने यश अरोडा को दोषी पाते हुए सजा सुनाई है।
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