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लावारिसों के लिए तीमारदार बने डाक्टर और स्टाफ

Fri, 23 Sep 2022 11:33 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 23 Sep 2022 11:33 PM IST
सार

जिला अस्पताल में लावारिस मरीजों के लिए बना निराश्रित वार्ड संजीवनी से कम नहीं है।कर्मचारी मरीजों की अच्छे से देखभाल करते हैं।निराश्रित वार्ड में भर्ती लावारिस मरीजों की देखभाल के लिए सभी डॉक्टर और स्टाफ हर माह धनराशि एकत्रित करते हैं।

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Doctors and staff became the caretakers for the unclaimed

विस्तार

जिला अस्पताल में लावारिस मरीजों के लिए बना निराश्रित वार्ड संजीवनी से कम नहीं है। लावारिस मरीजों का डॉक्टर से लेकर स्टाफ इलाज ही नहीं, तीमारदारों की तरह देखभाल भी करते हैं।
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प्रदेश में एकमात्र हरिद्वार के जिला अस्पताल में लावारिस मरीजों के लिए निराश्रित वार्ड है। स्टाफ कर्मी हर महीने पैसा एकत्रित करते हैं। लावारिस मरीजों के लिए उनकी जरूरत का सामान खरीदते हैं। डॉ. विकास दीप बताते हैं कि निराश्रित वार्ड के मरीज और स्टाफ एक परिवार की तरह है। वार्ड में मरीज महीनों तक रहते हैं। उनका जुड़ाव हो जाता है। वार्ड के डॉक्टर और स्टाफ स्वेच्छा से हर महीने धनराशि देते हैं। एकत्रित धनराशि से सिटी स्कैन, दाड़ी-बाल कटवाना, कपड़े खरीदना और कपड़ों की धुलाई करवाई जाती है। वार्ड में अभी आठ लावारिस मरीज भर्ती हैं।
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सीएमएस डॉ. धर्म सिंह ने बनवाया वार्ड
जिला अस्पताल में 1998 में तत्कालीन सीएमएस डॉ. धर्म सिंह रावत ने लावारिस मरीजों के लिए निराश्रित वार्ड बनवाया था। निराश्रित वार्ड स्टाफ की मदद से ही संचालित होता है। इलाज के लिए सरकारी दवाएं मिलती हैं।
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कर्मचारियों को मिलती है प्रोत्साहन राशि
लावारिस मरीजों की देखभाल करने वाले कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए उनको प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह राशि डॉक्टर और स्टाफ कर्मी निजी स्तर पर एकत्र कर देते हैं। कर्मचारी मरीजों की अच्छे से देखभाल करते हैं।

निराश्रित वार्ड में भर्ती लावारिस मरीजों की देखभाल के लिए सभी डॉक्टर और स्टाफ हर माह धनराशि एकत्रित करते हैं। वे धनराशि स्वेच्छा से देते हैं। इससे मरीजों की जरूरतों को पूरा किया जाता है।
-डॉ. चंदन कुमार मिश्रा, कार्यवाहक सीएमएस, जिला अस्पताल हरिद्वार।
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