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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Haridwar News ›   Definition of Ganga, under the pressure of builders lobby

बिल्डर्स लॉबी के दबाव में बदली गंगा की परिभाषा

Fri, 17 Mar 2017 10:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार।
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार। Updated Fri, 17 Mar 2017 10:45 PM IST
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गंगा की नई परिभाषा गढ़ने से धर्मनगरी हरिद्वार का पूरा क्षेत्र निर्माण कार्यों के प्रतिबंधों से बाहर हो गया है। केवल सप्तरोवर का ही कुछ क्षेत्र प्रतिबंध के दायरे में आएगा। राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से गंगा नदी से 200 मीटर की परिधि में निर्माण पर प्रतिबंध लगा दिया था। अब तक हरकी पैड़ी ब्रह्मकुंड,  डामकोठी मायापुर और डामकोठी कनखल की ओर बहने वाली धारा को गंगा नदी माना जाता रहा है। इसके 200 मीटर में प्राधिकरण भवन मानचित्र स्वीकृत नहीं कर रहा था।
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एनजीटी से पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 1997-98 में गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से गंगा से 200 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के निर्माण पर प्रतिबंध लगाया था। वर्ष 2013 में एक जनहित याचिका में नैनीताल हाईकोर्ट ने गंगा किनारे के अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का आदेश पारित किया। इसके बाद पिछले वर्ष एनजीटी ने भी 200 मीटर में निर्माण कार्य पर प्रतिबंध लगाने का आदेश पारित किया था। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण ने इन प्रतिबंधों को धता बताते हुए अवैध निर्माणों की ओर से मुंह फेर रखा था। जब अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का आदेश हुआ तो प्राधिकरण के अधिकारियों की सलाह पर ही अवैध निर्माण करने वाली होटल, बिल्डर्स लॉबी ने सत्ता में अपने रसूख का इस्तेमाल कर गंगा नदी की परिभाषा ही बदलने के लिए दबाव बनाया है, जिसमें वे कामयाब रहे हैं।       
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नीलधारा चंडीघाट क्षेत्र में लागू होगा प्रतिबंध      
नए शासनादेश को अब प्राधिकरण अपने बायलॉज में शामिल करने की कार्रवाई करने जा रहा है। अब एनजीटी के गंगा से 200 मीटर में निर्माण कार्य अनुमन्य नहीं करने का आदेश मुख्य गंगा की नीलधारा चंडीघाट में ही लागू होगा। अब तक जो गंगा मानी जा रही थी उसको 14 दिसंबर के शासनादेश में शासन ने स्कैप चैनल परिभाषित किया है। 200 मीटर के प्रतिबंधित जोन में विशेष परिस्थितियों में तटबंध, बाढ़ प्रबंधन, पौधरोपण और घाट निर्माण ही अनुमन्य होंगे, जिसका निर्धारण सिंचाई विभाग करेगा। इस प्रतिबंधित जोन में पहले से विद्यमान जीर्णशीर्ण निर्माणों को अधिकतम 7.50 मीटर ऊंचाई तक पुनर्निर्माण की अनुमति सीवरेज की व्यवस्था उपलब्ध होने की शर्त के साथ दी जाएगी। इसकी एनओसी पेयजल निगम एनजीटी के प्रावधानों के अनुसार देगा। शासनादेश के बाद चंडीघाट में अवैध पक्के निर्माणों के विरुद्ध सिंचाई विभाग को कार्रवाई करनी होगी।      
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गाइड लाइन के अनुसार काम होगा      
हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण शासनादेश की गाइड लाइन के अनुसार काम करेगा। साथ ही गंगा की स्वच्छता, निर्मलता व अविरलता के संबंध में एनजीटी के आदेशों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। शासनादेश जारी होना ही प्राधिकरण के बायलॉज में सम्मिलित मान लिया जाता है।
- अरविंद कुमार पांडेय, सचिव, हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण।          
 
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