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क्रशरों पर पहले भी लगते रहे हैं पीसीबी के ताले
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Sat, 10 Dec 2016 10:31 PM IST
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गंगा में खनन पर लगाम लगाने के लिए स्टोन क्रशरों पर पहली बार कार्रवाई नहीं हुई है। इससे पहले फरवरी 1999 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश पर 20 से ज्यादा क्रशर बंद कराए थे। उस समय भी प्रशासन के कार्रवाई न करने पर ही बोर्ड ने पर्यावरण संरक्षण की धारा-5 के तहत आदेश दिए थे। खास बात ये है कि इस आदेश से बंद हुए सभी क्रशर कभी दोबारा नहीं खुले।
मातृसदन की शिकायत पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंगा में अवैध खनन पर सख्ती से रोक लगाने के आदेश डीएम और एसएसपी हरिद्वार को दिए हैं। साथ ही हाईकोर्ट और एनजीटी के आदेशों के अनुपालन में क्रशरों को गंगा से पांच किलोमीटर दूर हटाने के आदेश भी दिए गए हैं। इस आदेश की जद में श्यामपुर, बिशनपुर, भोगपुर आदि के 35 स्टोन क्रशर आ रहे हैं। गंगा में खनन पर रोक लगने और पांच किलोमीटर के दायरे में क्रशिंग पर पूर्ण प्रतिबंध होने से अधिकांश क्रशर बंद होने तय माने जा रहे हैं। इस बीच क्रशर एसोसिएशन की ओर से दावा किया गया था कि भ्रम की स्थिति पैदा कर आदेश जारी कराए गए हैं।
मगर क्रशरों पर कार्रवाई को लेकर पिछले आदेशों की पड़ताल में पता चलता है कि इससे पहले फरवरी 1999 में भी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने छह स्टोन क्रशर एक साथ बंद कराने के आदेश दिए थे। इसके बाद 20 स्टोन क्रशर एक साथ बंद कराने के आदेश हुए। मातृसदन की ओर से उपलब्ध कराए गए आदेश के दस्तावेजों के मुताबिक बाद में बोर्ड ने पर्यावरण संरक्षण की धारा-5 के तहत डीएम को क्रशर बंद तत्काल बंद कराने के आदेश दिए थे। जिसके बाद डीएम ने क्रशरों को बंद कराया था। कार्रवाई के बाद क्रशर कभी नहीं खुले।
मातृसदन की शिकायत पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंगा में अवैध खनन पर सख्ती से रोक लगाने के आदेश डीएम और एसएसपी हरिद्वार को दिए हैं। साथ ही हाईकोर्ट और एनजीटी के आदेशों के अनुपालन में क्रशरों को गंगा से पांच किलोमीटर दूर हटाने के आदेश भी दिए गए हैं। इस आदेश की जद में श्यामपुर, बिशनपुर, भोगपुर आदि के 35 स्टोन क्रशर आ रहे हैं। गंगा में खनन पर रोक लगने और पांच किलोमीटर के दायरे में क्रशिंग पर पूर्ण प्रतिबंध होने से अधिकांश क्रशर बंद होने तय माने जा रहे हैं। इस बीच क्रशर एसोसिएशन की ओर से दावा किया गया था कि भ्रम की स्थिति पैदा कर आदेश जारी कराए गए हैं।
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मगर क्रशरों पर कार्रवाई को लेकर पिछले आदेशों की पड़ताल में पता चलता है कि इससे पहले फरवरी 1999 में भी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने छह स्टोन क्रशर एक साथ बंद कराने के आदेश दिए थे। इसके बाद 20 स्टोन क्रशर एक साथ बंद कराने के आदेश हुए। मातृसदन की ओर से उपलब्ध कराए गए आदेश के दस्तावेजों के मुताबिक बाद में बोर्ड ने पर्यावरण संरक्षण की धारा-5 के तहत डीएम को क्रशर बंद तत्काल बंद कराने के आदेश दिए थे। जिसके बाद डीएम ने क्रशरों को बंद कराया था। कार्रवाई के बाद क्रशर कभी नहीं खुले।
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