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दुकान के लिए जमीन उपलब्ध कराएं
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Sat, 19 Dec 2015 11:56 PM IST
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हरिद्वार। पिछले पांच साल पहले रेलवे रोड चित्रा टाकीज के सामने नाले से हटाए गए खोखे वालों को दुकान बनाने के लिए जमीन मिलने की उम्मीद जग गई है। सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम को आदेश दिया है कि तीन महीने के भी प्रभावितों को जमीन उपलब्ध कराई जाए। सुप्रीमकोर्ट के विकल्प देकर उन्हें नाले से हटाने आदेश के बावजूद जिला प्रशासन ने उनके खोखों को बलपूर्वक अगस्त 2010 में हटा दिया था।
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पांच साल से ये दुकानदार सुप्रीम कोर्ट का आदेश लेकर आजीविका के लिए विकल्प उपलब्ध कराने के लिए नगर पालिका, नगर निगम और राज्य सरकार के अधिकारियों व राजनीतिक नुमाइंदों के चक्कर काट रहे थे। सिस्टम के मारे ये दुकानदार फिर देश की सर्वोच्च अदालत में पहुंचे। सर्वोच्च अदालत ने नगर निगम को तीन महीने में दुकानें बनाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने का आदेश देकर एक बार फिर उनमें उम्मीद जगा दी है। मुख्य नगर अधिकारी विप्रा त्रिवेदी ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की पुष्टि करते हुए बताया कि आदेश 27 नवंबर को हुआ, लेकिन नगर निगम को 18 दिसंबर को ही मिला है। इस आदेश के बाद संबंधित दुकानदारों की ओर से विकल्प के लिए कई स्थानों की सूची नगर निगम को दी गई है। नगर निगम ने उन्हें लक्सर रोड पर सलेज फार्म मिस्सरपुर में विकल्प का ऑफर दिया था, जिसे नगर निगम क्षेत्र से बाहर बताते हुए स्वीकार नहीं किया था। सर्वोच्च अदालत ने भी उनकी बात मान ली और निगम क्षेत्र में ही जगह उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। लघु व्यापार समिति के अध्यक्ष चोखेलाल आदि ने देवपुरा में आईटीआई की खाली भूमि को भी विकल्प में सुझाया है। मुख्य नगर अधिकारी विप्रा त्रिवेदी का कहना है कि सौ दुकानदारों को एक साथ विकल्प के लिए भूमि उपलब्ध नहीं होने पर 25-25 दुकानदारों के ग्रुप बनाकर जगह उपलब्ध कराई जा सकती है। नगर निगम को केवल जगह देनी है, दुकानें वे खुद बनाएंगे और ये विकल्प स्थायी होगा। गौरतलब है कि इन दुकानदारों को अर्द्घकुंभ 1992 से पूर्व नाले से हटाने का ऐलान किया गया था। तब दुकानदार सुप्रीमकोर्ट से स्टे ले आए थे और फाइनल आदेश में अदालत ने उन्हें विकल्प देने के बाद हटाने का आदेश दिया था।
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