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दस बौद्धों ने अपनाया हिंदू धर्म
ब्यूरो, अमर उजाला/हरिद्वार
Updated Sat, 23 May 2015 12:25 AM IST
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सम्राट अशोक के विश्वव्यापी धर्म प्रचार अभियान के समय दक्षिण एशिया के देशों ने भी बौद्ध धर्म अपना लिया था। थाइलैंड भी उन्हीं देशों में से एक है। शुक्रवार को शंकराचार्य मठ में मूल थाइलैंड के सात पुरुषों एवं तीन स्त्रियों ने हिंदू धर्म की दीक्षा ली।
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दीक्षित होने वाले बौद्धों का दावा है कि शीघ्र थाईलैंड के गणेश म्यूजियम, लक्ष्मी-नारायण और शिव मंदिर ट्रस्ट से जुड़े करीब तीन हजार थाई हिंदू बनेंगे। थाई-हिंदू फाउंडेशन के माध्यम और जगद्गुरु के आशीर्वाद से यह कार्य शीघ्र होगा। जगद्गुरु ने थाई निवासियों द्वारा की चरणवंदना के बाद सभी को माला, शॉल, फल और पुष्प भेंट किए।
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हिंदू बनने के बाद सभी ने जगद्गुरु के चरण धोए। उसके बाद उन्होंने संस्कृत भाषा में गणेश की स्तुति की। स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि हमारा काम धर्म परिवर्तन कराना नहीं है। अति प्राचीन काल से जो सनातनी थे उन्हें दीक्षित करने का प्रयास किया गया है। सभी थाईलैंड निवासियों को गोपनीय मंत्र दिया गया है। यह 10 हिंदू अब थाईलैंड जाकर धर्म प्रचार करेंगे।
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जगद्गुरु ने थाईवासियों को दिए नए नाम
शंकराचार्य ने सभी नव दीक्षितों को नए नाम दिए हैं। 56 वर्षीय रमेश ने बताया कि 20 वर्ष पूर्व उनके स्वप्न में एक हिंदू देवता आए थे। कुछ वर्ष बाद वह जब मुंबई आए तो उन्होंने उसी देवता का विसर्जन होते हुए देखा। यही गणेश प्रतिमा उनके सपने में आई थी। तब से उन्होंने गणेश आराधना शुरू की थी।
उन्होंने बताया कि उसी दिन वे गणेश की प्रतिमाएं खरीदकर थाईलैंड ले गए थे और वहां गणेश म्यूजियम की स्थापना की। रमेश का मूल नाम पंडारा था। उनकी पत्नी का नाम पोंगपाका था, जो अब बदलकर सुभद्रा हो गया है। सुभद्रा हिंदू बनकर खुश हैं। थाईलैंड की वंताना अब गंगा बन गईं। वे कहती हैं कि भारत से उन्हें प्रेम हो गया है।
थाई निवासी पिटचाया को शंकराचार्य ने प्रीति नाम दिया। प्रीति के अनुसार आज से उनके जीवन की दिशा बदल जाएगी। वे पूर्ण शाकाहारी जीवन बिताएंगी। थाई निवासी निमित्र का नया नाम नरेंद्र होगा। नरेंद्र वर्षों से गणेश उत्सव मनाते आए हैं। वे थाईलैंड में गणेश की शोभायात्रा भी निकालते हैं।
इस तरह विचाई को उमेश, कोरनिसावास को धनंजय, पिलायर को प्रकाश, पाकोन को प्रसन्न, वारावित को राकेश नाम मिला। इस दल के साथ जयपुर से आए गाइड कामेश सक्सेना बताते हैं यह दल हिंदू भजन गाते हुए हरिद्वार पहुंचा है।