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कलश स्थापना के साथ ही चैत्र नवरात्र आज से शुरू
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चैत्र नवरात्र से शुरू हो जाएंगे। शक्ति और भक्ति के इस पर्व में सभी लोग श्रद्धा और यथा शक्ति के अनुसार मां भगवती की आराधना करते हैं। नवरात्र का पहला दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप को समर्पित होता है। हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें प्रकृति स्वरूपा भी कहा जाता है। माना जाता है कि मां शैलपुत्री सुख-समृद्धि की दाता होती हैं। शुक्रवार को घरों में माता की चौकी सजाने के साथ ही मंदिरों में भी तैयारियां की गई।
कोरोना संक्रमण का खतरा कम होने के साथ ही बीते दो साल बाद एक बार फिर पूरी श्रद्धा के साथ देवी मंदिर गुलजार होंगे। बिना किसी कोविड प्रोटोकॉल अनलॉक की गाइडलाइन के श्रद्धालु मंदिर में देवी की पूजा-अर्चना कर सकेंगे। बीते साल 2021 में भी कोराना संक्रमण का खौफ बना रहा था। जिसके चलते चैत्र नवरात्र में कोविड नियमों का पालन करते हुए श्रद्धालुओं को मंदिर में जाने और शारीरिक दूरी का पालन करते हए पूजा-अर्चना करने की अनुमति थी। आज से चैत्र नवरात्र का श्रीगणेश हो जाएगा, जो 2 अप्रैल से प्रारंभ होकर नवमी की तिथि 10 अप्रैल को समापन होंगे। घट स्थापना का मुहूर्त सुबह 6 बजकर 22 मिनट से 8 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।
इन मंदिरों में हैं खास तैयारियां
नवरात्र पर मां मनसा देवी, मां चंडी देवी, श्री दक्षिण काली मंदिर, मां सुरेश्वरी देवी मंदिर मां, शीतला देवी मंदिर, मां मायादेवी मंदिर में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ होती है। ऐसे में देवी के मंदिर में विशेष रूप से तैयारियां की जा रही हैं। शुक्रवार को मंदिर में साफ-सफाई के अलावा मां-दुर्गा की नई पोशाकें तैयार कराई गई। मंदिरों को भव्य तरीके से सजाया गया है।
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खरीदारी करते नजर आए लोग
कनखल के चौक बाजार, ज्वालापुर के बड़ा बाजार में नवरात्र पूजन सामग्री से दुकानें सज गईं। मंदिरों के बाहर पूजा सामग्री बिकने लगी है। लोगों ने पूजन सामग्री जिसमें लाल चुनरी, नारियल, लाल सिंदूर, देशी घी, धूप, अगरबत्ती की खरीदारी की। इसके अलावा कूटू, सिंघाड़े का आटा व व्रत सामग्री भी महिलाओं ने खरीदी।
चैत्र नवरात्र घट स्थापना पूजा सामग्री
चौड़े मुंह वाला मिट्टी का एक बर्तन कलश, सप्तधान्य (7 प्रकार के अनाज), पवित्र स्थान की मिट्टी, गंगाजल, कलावा/मौली, आम या अशोक के पत्ते, छिलके/जटा वाला, नारियल, सुपारी, अक्षत (कच्चा साबुत चावल), पुष्प और पुष्पमाला, लाल कपड़ा, मिठाई, सिंदूर, दूर्वा
मां शैलपुत्री भोग-
मां दुर्गा के शैलपुत्री रूप को गाय के घी और दूध से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मां शैलपुत्री प्रसन्न होती हैं।
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कोरोना संक्रमण का खतरा कम होने के साथ ही बीते दो साल बाद एक बार फिर पूरी श्रद्धा के साथ देवी मंदिर गुलजार होंगे। बिना किसी कोविड प्रोटोकॉल अनलॉक की गाइडलाइन के श्रद्धालु मंदिर में देवी की पूजा-अर्चना कर सकेंगे। बीते साल 2021 में भी कोराना संक्रमण का खौफ बना रहा था। जिसके चलते चैत्र नवरात्र में कोविड नियमों का पालन करते हुए श्रद्धालुओं को मंदिर में जाने और शारीरिक दूरी का पालन करते हए पूजा-अर्चना करने की अनुमति थी। आज से चैत्र नवरात्र का श्रीगणेश हो जाएगा, जो 2 अप्रैल से प्रारंभ होकर नवमी की तिथि 10 अप्रैल को समापन होंगे। घट स्थापना का मुहूर्त सुबह 6 बजकर 22 मिनट से 8 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।
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इन मंदिरों में हैं खास तैयारियां
नवरात्र पर मां मनसा देवी, मां चंडी देवी, श्री दक्षिण काली मंदिर, मां सुरेश्वरी देवी मंदिर मां, शीतला देवी मंदिर, मां मायादेवी मंदिर में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ होती है। ऐसे में देवी के मंदिर में विशेष रूप से तैयारियां की जा रही हैं। शुक्रवार को मंदिर में साफ-सफाई के अलावा मां-दुर्गा की नई पोशाकें तैयार कराई गई। मंदिरों को भव्य तरीके से सजाया गया है।
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खरीदारी करते नजर आए लोग
कनखल के चौक बाजार, ज्वालापुर के बड़ा बाजार में नवरात्र पूजन सामग्री से दुकानें सज गईं। मंदिरों के बाहर पूजा सामग्री बिकने लगी है। लोगों ने पूजन सामग्री जिसमें लाल चुनरी, नारियल, लाल सिंदूर, देशी घी, धूप, अगरबत्ती की खरीदारी की। इसके अलावा कूटू, सिंघाड़े का आटा व व्रत सामग्री भी महिलाओं ने खरीदी।
चैत्र नवरात्र घट स्थापना पूजा सामग्री
चौड़े मुंह वाला मिट्टी का एक बर्तन कलश, सप्तधान्य (7 प्रकार के अनाज), पवित्र स्थान की मिट्टी, गंगाजल, कलावा/मौली, आम या अशोक के पत्ते, छिलके/जटा वाला, नारियल, सुपारी, अक्षत (कच्चा साबुत चावल), पुष्प और पुष्पमाला, लाल कपड़ा, मिठाई, सिंदूर, दूर्वा
मां शैलपुत्री भोग-
मां दुर्गा के शैलपुत्री रूप को गाय के घी और दूध से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मां शैलपुत्री प्रसन्न होती हैं।