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गंगा सभा के शताब्दी समारोह में शामिल होंगे राष्ट्रपति
कौशल सिखौला हरिद्वार
Updated Fri, 09 Sep 2016 10:39 PM IST
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हरकी पैड़ी की प्रबंधकारिणी धार्मिक संस्था गंगा सभा इन दिनों प्लेटिनम जयंती मना रही है। दिसंबर तक चलने वाले कार्यक्रमों में देश की कई हस्तियां भाग लेंगी। 29 सितंबर को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी हरिद्वार आएंगे। वे हरकी पैड़ी पर होने वाली आरती में भाग लेंगे। आरती के बाद हरकी पैड़ी पर गंगा सभा की ओर से उनका नागरिक अभिनंदन किया जाएगा।
गंगा सभा के महामंत्री रामकुमार मिश्रा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रपति के आगमन का कार्यक्रम उनके पास पहुंच चुका है। शताब्दी वर्ष के अंतर्गत गंगा सभा के आमंत्रण पर राष्ट्रपति अपने परिजनों सहित सायंकालीन आरती में भाग लेने आ रहे हैं। राष्ट्रपति सायंकाल 6.30 बजे हरकी पैड़ी पहुंचेंगे। 6.35 पर आरती प्रारंभ हो जाएगी। आरती के बाद सात बजे हरकी पैड़ी पर बनाए गए विशेष पंडाल में महामहिम का अभिनंदन किया जाएगा।
गंगा सभा की स्थापना हरिद्वार के तीर्थ पुरोहितों ने महामना मदन मोहन मालवीय के नेतृत्व में वर्ष 1916 में की थी। 1914 से उनके नेतृत्व में पुरोहितों ने गंगा पर बांध बनाने के खिलाफ पहला बांध विरोधी आंदोलन दो साल तक किया। इसी दौरान हरकी पैड़ी पर कथा करने से रोकने पर कथा सत्याग्रह भी किया गया। गंगा के तटों पर अंग्रेज अधिकारियों और पुलिस द्वारा चमड़े की बेल्ट लगाकर जाने के विरोध में भी पुरोहितों ने आंदोलन किया था। ये सभी आंदोलन महामना जीते, अंग्रेज हारे। अंग्रेजों ने बांध बनाने की योजना वापस ली और हरकी पैड़ी पर बहने के लिए एक अविच्छिन धारा छोड़ी। बाद में हरकी पैड़ी के पार गंगा की बड़ी नीलधारा पर बांध बनाया गया जिसे अब भीमगोडा बैराज के नाम से जाना जाता है। तब महामना ने तीर्थ की रक्षा के लिए पुरोहितों और कुछ महंतों को जोड़कर गंगा सभा की स्थापना की। गंगा सभा इन दिनों में पंचपुरी में घर-घर तुलसी के पौधे बांटने का कार्य कर रही है।
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गंगा सभा के महामंत्री रामकुमार मिश्रा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रपति के आगमन का कार्यक्रम उनके पास पहुंच चुका है। शताब्दी वर्ष के अंतर्गत गंगा सभा के आमंत्रण पर राष्ट्रपति अपने परिजनों सहित सायंकालीन आरती में भाग लेने आ रहे हैं। राष्ट्रपति सायंकाल 6.30 बजे हरकी पैड़ी पहुंचेंगे। 6.35 पर आरती प्रारंभ हो जाएगी। आरती के बाद सात बजे हरकी पैड़ी पर बनाए गए विशेष पंडाल में महामहिम का अभिनंदन किया जाएगा।
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गंगा सभा की स्थापना हरिद्वार के तीर्थ पुरोहितों ने महामना मदन मोहन मालवीय के नेतृत्व में वर्ष 1916 में की थी। 1914 से उनके नेतृत्व में पुरोहितों ने गंगा पर बांध बनाने के खिलाफ पहला बांध विरोधी आंदोलन दो साल तक किया। इसी दौरान हरकी पैड़ी पर कथा करने से रोकने पर कथा सत्याग्रह भी किया गया। गंगा के तटों पर अंग्रेज अधिकारियों और पुलिस द्वारा चमड़े की बेल्ट लगाकर जाने के विरोध में भी पुरोहितों ने आंदोलन किया था। ये सभी आंदोलन महामना जीते, अंग्रेज हारे। अंग्रेजों ने बांध बनाने की योजना वापस ली और हरकी पैड़ी पर बहने के लिए एक अविच्छिन धारा छोड़ी। बाद में हरकी पैड़ी के पार गंगा की बड़ी नीलधारा पर बांध बनाया गया जिसे अब भीमगोडा बैराज के नाम से जाना जाता है। तब महामना ने तीर्थ की रक्षा के लिए पुरोहितों और कुछ महंतों को जोड़कर गंगा सभा की स्थापना की। गंगा सभा इन दिनों में पंचपुरी में घर-घर तुलसी के पौधे बांटने का कार्य कर रही है।
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