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धधक रहे जंगल, आफत में बेजुबान

Sat, 30 Apr 2016 12:37 AM IST
hridwar uttrakhanda india
hridwar uttrakhanda india Updated Sat, 30 Apr 2016 12:37 AM IST
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Burned forest, helpless in disaster
धधक रहे जंगल - फोटो : अमर उजाला

हरिद्वार। पहाड़ के जंगलों के बाद अब राजाजी नेशनल पार्क और हरिद्वार वन प्रभाग के जंगल भी दवानल की चपेट में हैं। जंगलों में आग लगने से जहां लाखों की वन संपदा राख होने की आशंका है वहीं जंगली जानवरों की मुसीबतें भी बढ़ गई हैं। जंगलों में आग लगने के बाद धर्मनगरी में आसमान ने धुएं की चादर ओढ़ ली है। ऐसे में तापमान बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है।

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 बृहस्पतिवार की रात मनसा देवी पहाड़ी के जंगलों में आग लग गई। आग मोतीचूर से लेकर बेरीवाड़ा तक के जंगल तक फैल गई। आग आबादी क्षेत्र में टीबडी और उत्तरी हरिद्वार के मोतीचूर के आसपास की कालोनियों तक भी पहुंच गई। पार्क की निदेशक नीना ग्रेवाल और उपनिदेशक किशनचंद ने भी रात में करीब 11 बजे मौके पर पहुंचकर आग बुझाने में जुट रहे।
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राजाजी टाईगर रिजर्व प्रशासन की ओर से 30 मजदूरों और 12 वन कर्मियों को लेकर आग बुझाने के लिए लगाया गया।  स्थानीय रेंजर डीपी उनियाल और वन्यजीव प्रतिपालक कोमल सिंह मौके पर पहुंचे। उपनिदेशक किशनचंद ने बताया कि फायर लाइन के जरिये आग बुझाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकतर क्षेत्र में आग पर काबू पा लिया गया है। कर्मचारी, आसपास के ग्रामीण और वन सुरक्षा समितियों के सदस्यों की मदद से आग पर काबू पाने में लगे हैं।  
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बोले अफसर घासफूस जली
हरिद्वार। भले ही पार्क के अधिकारी पार्क के जंगलों में आग लगने के बाद केवल घासफूस जलने की बात कर रहे हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है।  पक्षियों के घोंसले भी जलकर नष्ट हो गए हैं। कुछ वनकर्मियों ने बताया कि जिस तेजी से आग फैल रही है उससे न केवल पार्क क्षेत्र के जंगली जानवरों का जीवन संकट में हैं बल्कि हजारों की संख्या में घोंसले जलने से पक्षिओं के बच्चे और अंडों के नष्ट होने की आशंका है।
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शहद निकालने में लग रही आग
श्यामपुर। रसियाबड, हरिद्वार, बेरीवाड़ा, धौलखंड रेंज में शहद निकालने वाले पेड़ों पर मधु मक्खियों छत्तों को जलाकर शहद निकाल रहे हैं। इस दौरान कई बार आग लग जाती है। इसके बाद भी शहद निकालने वालों के खिलाफ पार्क प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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समय से नहीं हो पाते प्रयास
वन विभाग और राजाजी टाइगर रिजर्व के अधिकांश अधिकारी देहरादून से ही अप-डाउन करते हैं। इस लिए आग लगने के बाद समय पर बुझाने के प्रयास नहीं हो पाते। अधिकारियों के नहीं रहने से कर्मचारी भी कई बार लापरवाही बरतते हैं।
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फायर लाइन काटने में भी लीपापोती
राजाजी टाईगर रिजर्व और वन विभाग को शासन की ओर से जंगलों को आग से बचाने के लिए फायर लाइन काटने के लिए निश्चित बजट दिया जाता है। हाईवे और शहर के आसपास दो चार स्थानों पर फायर लाइन काटने के बाद सब काम कागजों में ही होता है। जंगलों के अंदर फायर लाइन नहीं काटी जाती। ऐसे में जंगलों में आग लगने के बाद वह काबू नहीं हो पाती।

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पार्क की निदेशक की जुबानी
पार्क निदेशक नीना ग्रेवाल का कहना है कि पार्क कर्मियों को 24 घंटे अलर्ट रहने को कहा गया है। आसपास के गांव वालों का भी आग बुझाने में सहयोग मिल रहा है। सीनियर अधिकारियों को भी ड्यूटी पर लगाया। आग बुझाने वालों के लिए मौके पर ही खाना भिजवाया जा रहा है। मौसम साथ दें तो आग पर कुछ काबू पाया जा सकता है।

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