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बसपा ने खेला अपने ‘पुराने परिवार’ पर दांव
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जनपद हरिद्वार में पहले ही विधानसभा चुनाव में बसपा ने सर्वाधिक सीटें जीतकर प्रदेश में दमदार उपस्थिति दर्ज करवाई थी। लेकिन इसके बाद से पार्टी की सीटें लगातार कम होती चली गई है। स्थिति यह है कि आज बसपा का प्रदेश में एक भी विधायक नहीं है। बसपा को अब फिर से उन परिवारों को भी टिकट देना पड़ा है, जिनके परिवार को बसपा सुप्रीमो मायावती ने लोकसभा के एक चुनावी सभा में मंच से भविष्य में टिकट नहीं देने का एलान कर दिया था।
राज्य में पहली बार 2002 में हुए विधानसभा चुनाव में जनपद की नौ सीटों में पांच पर बसपा ने कब्जा किया था। दो सीटें कुमाऊं क्षेत्र में जीतकर प्रदेश में सात सीटों पर बसपा ने दमदार ताकत दिखाई थी। इसके बाद 2007 में भगवानपुर सीट से सुरेंद्र राकेश के जीतने पर जनपद में छह सीटें और प्रदेश में आठ सीटों पर जीत दर्ज करने पर बसपा तीसरी ताकत बनी थी। लेकिन 2012 के चुुनाव में कुमाऊं की दोनों सीटें गंवाने के साथ ही हरिद्वार में 11 सीटों में से महज तीन सीटों पर ही सिमट गई।
2014 के लोकसभा चुनाव में हरिदास और सुरेंद्र राकेश को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने पर रुड़की में चुनाव प्रचार के लिए हुई जनसभा में बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी से निष्कासित कर दिया था। साथ ही मंच से एलान किया था कि सुरेंद्र राकेश और हरिदास को तो दूर इनके परिवार में से भी अब किसी को कभी टिकट नहीं दिया जाएगा। हालांकि, सुरेंद्र राकेश का तो निधन हो गया था और उनकी पत्नी ममता राकेश कांग्रेस में चली गईं। लेकिन हरिदास को झबरेड़ा से 2017 के चुनाव में चौथी बार टिकट नहीं दिया गया। इसी तरह दो बार के विधायक रहे मोहम्मद शहजाद को भी पिरान कलियर से चौथी बार टिकट नहीं दिया था।
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पार्टी की जनपद में एक भी सीट नहीं आने से अब फिर से भगवानपुर से सुरेंद्र राकेश के भाई सुबोध राकेश को न केवल पार्टी में लिया, बल्कि चुनाव से ठीक पहले टिकट भी दे दिया। इसी तरह झबरेड़ा से हरिदास के बेटे आदित्य ब्रजवाल को प्रत्याशी बनाया है। वहीं, मोहम्मद शहजाद को भी लक्सर से टिकट दे दिया है। वहीं कुमाऊं की सितारगंज सीट से पूर्व विधायक नारायण पाल को मैदान में उतारा है। नारायण पाल बसपा के पूर्व विधायक रहे हैं और कांग्रेस में चले गए थे। कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर अब बसपा से मैदान में हैं। संवाद
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राज्य में पहली बार 2002 में हुए विधानसभा चुनाव में जनपद की नौ सीटों में पांच पर बसपा ने कब्जा किया था। दो सीटें कुमाऊं क्षेत्र में जीतकर प्रदेश में सात सीटों पर बसपा ने दमदार ताकत दिखाई थी। इसके बाद 2007 में भगवानपुर सीट से सुरेंद्र राकेश के जीतने पर जनपद में छह सीटें और प्रदेश में आठ सीटों पर जीत दर्ज करने पर बसपा तीसरी ताकत बनी थी। लेकिन 2012 के चुुनाव में कुमाऊं की दोनों सीटें गंवाने के साथ ही हरिद्वार में 11 सीटों में से महज तीन सीटों पर ही सिमट गई।
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2014 के लोकसभा चुनाव में हरिदास और सुरेंद्र राकेश को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने पर रुड़की में चुनाव प्रचार के लिए हुई जनसभा में बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी से निष्कासित कर दिया था। साथ ही मंच से एलान किया था कि सुरेंद्र राकेश और हरिदास को तो दूर इनके परिवार में से भी अब किसी को कभी टिकट नहीं दिया जाएगा। हालांकि, सुरेंद्र राकेश का तो निधन हो गया था और उनकी पत्नी ममता राकेश कांग्रेस में चली गईं। लेकिन हरिदास को झबरेड़ा से 2017 के चुनाव में चौथी बार टिकट नहीं दिया गया। इसी तरह दो बार के विधायक रहे मोहम्मद शहजाद को भी पिरान कलियर से चौथी बार टिकट नहीं दिया था।
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पार्टी की जनपद में एक भी सीट नहीं आने से अब फिर से भगवानपुर से सुरेंद्र राकेश के भाई सुबोध राकेश को न केवल पार्टी में लिया, बल्कि चुनाव से ठीक पहले टिकट भी दे दिया। इसी तरह झबरेड़ा से हरिदास के बेटे आदित्य ब्रजवाल को प्रत्याशी बनाया है। वहीं, मोहम्मद शहजाद को भी लक्सर से टिकट दे दिया है। वहीं कुमाऊं की सितारगंज सीट से पूर्व विधायक नारायण पाल को मैदान में उतारा है। नारायण पाल बसपा के पूर्व विधायक रहे हैं और कांग्रेस में चले गए थे। कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर अब बसपा से मैदान में हैं। संवाद