{"_id":"62e7ea7c8adc94418b014393","slug":"breastfeeding-a-boon-for-pieces-of-liver-and-lap-of-mang-haridwar-news-drn418814851","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्तनपान से तेज होता है दिमाग, मां को नहीं होता ब्रेस्ट कैंसर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्तनपान से तेज होता है दिमाग, मां को नहीं होता ब्रेस्ट कैंसर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेडिकल साइंस का मानना है कि स्तनपान बच्चों के लिए सबसे अच्छा आहार है। यह एक तरह से अमृत है। स्तनपान कराने से बच्चों की सेहत ही नहीं सुधरती बल्कि मां भी स्वस्थ रहती है। खास बात यह है कि स्तनपान कराने वाली महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है।
बच्चों के लिए मां का दूध ही सबसे अच्छा माना जाता है। नवजात शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद स्तनपान कराए जाने से न केवल उन्हें कई गंभीर बीमारियों से बचाता है, बल्कि उनके संपूर्ण विकास की सबसे महत्वपूर्ण सीढ़ी भी है। चिकित्सकों का कहना है कि बच्चों को कम से कम छह माह तक केवल स्तनपान कराना चाहिए। 6 माह के बाद स्तनपान के साथ ऊपरी आहार देना चाहिए। खाना देने के साथ ही स्तनपान कम से कम दो साल तक जारी रखे जाना चाहिए। इससे बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करने वाले नवजात शिशुओं में मृत्यु की आशंका कम हो जाती है। छह महीने तक केवल स्तनपान करने वाले शिशुओं में डायरिया और निमोनिया जैसी संक्रमण से होने वाली मृत्यु की आशंका नहीं रहती है।
विज्ञापन
जागरूकता अभियान चलेगा
बाल विकास विभाग की ओर से जनपद की लगभग 22 हजार धात्री महिलाओं और 26 हजार गर्भवती महिलाओं को स्तनपान के लिए एक से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह पर जागरूकता के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता केंद्रों पर गोष्ठी करके गर्भवती महिलाओं को जागरूक करेंगी। जो धात्री महिलाएं हैं, उन्हें डोर-टू डोर जाकर शिशुओं को मां का दूूध पिलाने और पौष्टिक आहार के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। - सुलेखा रानी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, हरिद्वार
शिशु को सही समय और पर्याप्त मात्रा में मां का दूध न मिल पाना भी कुपोषण का एक प्रमुख कारण है। जिन बच्चों को मां का दूूध मिलता है वह मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ होते हैं।
- डॉ. संदीप निगम, वरिष्ठ बाल रोग विशेेषज्ञ, जिला महिला अस्पताल
विज्ञापन
बच्चों के लिए मां का दूध ही सबसे अच्छा माना जाता है। नवजात शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद स्तनपान कराए जाने से न केवल उन्हें कई गंभीर बीमारियों से बचाता है, बल्कि उनके संपूर्ण विकास की सबसे महत्वपूर्ण सीढ़ी भी है। चिकित्सकों का कहना है कि बच्चों को कम से कम छह माह तक केवल स्तनपान कराना चाहिए। 6 माह के बाद स्तनपान के साथ ऊपरी आहार देना चाहिए। खाना देने के साथ ही स्तनपान कम से कम दो साल तक जारी रखे जाना चाहिए। इससे बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
विज्ञापन
जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करने वाले नवजात शिशुओं में मृत्यु की आशंका कम हो जाती है। छह महीने तक केवल स्तनपान करने वाले शिशुओं में डायरिया और निमोनिया जैसी संक्रमण से होने वाली मृत्यु की आशंका नहीं रहती है।
विज्ञापन
जागरूकता अभियान चलेगा
बाल विकास विभाग की ओर से जनपद की लगभग 22 हजार धात्री महिलाओं और 26 हजार गर्भवती महिलाओं को स्तनपान के लिए एक से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह पर जागरूकता के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता केंद्रों पर गोष्ठी करके गर्भवती महिलाओं को जागरूक करेंगी। जो धात्री महिलाएं हैं, उन्हें डोर-टू डोर जाकर शिशुओं को मां का दूूध पिलाने और पौष्टिक आहार के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। - सुलेखा रानी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, हरिद्वार
शिशु को सही समय और पर्याप्त मात्रा में मां का दूध न मिल पाना भी कुपोषण का एक प्रमुख कारण है। जिन बच्चों को मां का दूूध मिलता है वह मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ होते हैं।
- डॉ. संदीप निगम, वरिष्ठ बाल रोग विशेेषज्ञ, जिला महिला अस्पताल