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गंगा रक्षा को अनशन कर रहे आत्मबोधानंद ने छोड़ा शहद
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गंगा रक्षा को आंदोलन कर रहे मातृ सदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने शहद का सेवन करना भी छोड़ दिया है। अभी तक वह पानी के साथ शहद भी ले रहे थे।
मातृ सदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद 18 अगस्त से गंगा रक्षा संबंधी छह मांगों के लिए अनशन कर रहे हैं। सोमवार को उनके अनशन को 41 दिन पूरे हो गए थे। अभी तक वह अनशन के दौरान नींबू, नमक, शहद से युक्त पानी ले रहे थे। उन्होंने अब मांगों को लेकर मंगलवार से शहद छोड़ दिया है। वह केवल नींबू, नमक के साथ पानी लेंगे। आत्मबोधानंद ने बताया कि सरकार की तरफ से उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसलिए उन्हेें अनशन के साथ शहद छोड़ने को विवश होना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ेगी तो गंगा रक्षा के लिए वह जल का भी त्याग कर देंगे। उन्होंने कहा कि जब तक मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा, तब तक अनशन चलता रहेगा। चाहे अब उनके प्राण ही क्यों न चले जाएं। उन्होंने मांगों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, उत्तराखंड के मुख्य न्यायाधीश और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मांगों को पूरा कराने की मांग की है।
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मातृ सदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद 18 अगस्त से गंगा रक्षा संबंधी छह मांगों के लिए अनशन कर रहे हैं। सोमवार को उनके अनशन को 41 दिन पूरे हो गए थे। अभी तक वह अनशन के दौरान नींबू, नमक, शहद से युक्त पानी ले रहे थे। उन्होंने अब मांगों को लेकर मंगलवार से शहद छोड़ दिया है। वह केवल नींबू, नमक के साथ पानी लेंगे। आत्मबोधानंद ने बताया कि सरकार की तरफ से उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसलिए उन्हेें अनशन के साथ शहद छोड़ने को विवश होना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ेगी तो गंगा रक्षा के लिए वह जल का भी त्याग कर देंगे। उन्होंने कहा कि जब तक मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा, तब तक अनशन चलता रहेगा। चाहे अब उनके प्राण ही क्यों न चले जाएं। उन्होंने मांगों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, उत्तराखंड के मुख्य न्यायाधीश और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मांगों को पूरा कराने की मांग की है।
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