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जन्मे राम रघुराई, अवध में बाजे बधाई

Mon, 04 Oct 2021 12:51 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 04 Oct 2021 12:51 AM IST
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Born Ram Raghurai, congratulations in Awadh
श्री रामलीला बहादरपुर जट में रामलीला का मंचन करते कलाकार । - फोटो : HARIDWAR
भीमगोड़ा की रामलीला में भगवान श्री राम का जन्म हुआ। जिसके बाद क्षेत्र में लोगों ने उत्सव की तरह राम जन्म पर खुशी मनाई। रंगमंच पर कैलाश लीला और राम जन्म की लीला का मंचन किया गया।
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मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा नेता कन्हैया खेवड़िया, अध्यक्ष रमेश गुप्ता, महामंत्री पवन कुमार, पूर्व पार्षद लखन लाल चौहान, प्रमोद घिल्डियाल, प्रशांत शर्मा समेत अन्य लोगों ने दीप प्रज्वलित किया। कैलाश लीला में रावण-नंदीगण संवाद हुआ। जब रावण का विमान कैलाश पर्वत से जाने वक्त रुक गया। भगवान शंकर ने रावण का अहंकार तोड़ा। रावण वेदवती संवाद के बाद राम जन्म का मंचन दिखाया गया। राजा दशरथ की तीनों रानियों ने खीर खाकर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण भरत और शत्रुघ्न को जन्म दिया। राम के जन्म होते ही रंगमंच पर खुशियां मनाई गई।
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रामलीला भवन मैदान में धर्मध्वजा की स्थापना
हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजिस्टर्ड ने रविवार को श्रीरामलीला भवन मैदान में धर्म ध्वजा की स्थापना कर धर्म एवं संस्कृति के संवर्धन के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवनचरित्र के मंचन का शुभारंभ किया। आज सोमवार को नारद मोह, इंद्र दरबार, कैलाशलीला, रावण अत्याचार तथा वेदवती संवाद का मंचन किया जाएगा।
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इस मौके पर श्रीरामलीला संपत्ति कमेटी ट्रस्ट के अध्यक्ष गंगा शरण मददगार, वीरेंद्र चड्ढा, सुनील भसीन, रविकांत अग्रवाल, महाराज कृष्ण सेठ, डॉ. संदीप कपूर, रविंद्र अग्रवाल आदि मौजूद रहे। संवाद

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राम-सीता का जन्म होते ही गूंज जयकारे
पथरी। गांव बहादरपुर जट में रामलीला मंचन के दूसरे दिन राम और सीता के जन्म के दृश्य दर्शाए गए। जन्म होते ही राम-सीता के जयकारों से पंडाल गूंज उठा।
दशरथ अपने दरबार में व्याकुल दिखाई दिए। उन्होंने मंत्री से अपनी व्याकुलता बताते हुए कहा कि उनकी अभी तक कोई औलाद नहीं हुई है। तब मंत्री ने उन्हें श्रृंगी ऋषि को बुलाकर हवन यज्ञ कराने की सलाह दी। हवन यज्ञ करा कर प्रसाद का आचमन दशरथ की रानियों कौशल्या, कैकई और सुमित्रा को कराया। जिससे उन्हें पुत्रों की प्राप्ति हुई। जिनका नाम राम, भारत, लक्ष्मण और शत्रुघन रखा गया। दूसरी ओर जनक के राज्य में पानी न बरसने से किसान भूखों मरने लगे। विश्वामित्र के कहने पर राजा जनक ने किसान बनकर हल चलाया उनका हल घड़े से टकरा गया। जिसमें से एक कन्या निकली। विश्वामित्र ने उसका नाम सीता रखा। दशरथ का अभिनय अशोक शर्मा, जनक का अभिनय पाल्ला प्रजापति और मंत्री का अभिनय राकेश कुक्कू ने किया किया। संवाद
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