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कैंसर पीड़ितों की मदद को भेल ने बढ़ाए कदम
hridwar uttrakhanda india
Updated Tue, 17 Jan 2017 12:04 AM IST
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सामाजिक दायित्व योजना के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठान भेल ने अब कैंसर पीड़ितों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। दिव्य प्रेम सेवा मिशन के साथ मिलकर भेल रायवाला के पास कैंसर हास्पिटल के नाम से एक आश्रयालय बना रहा है। अमर उजाला से विशेष बातचीत में भेल के कार्यपालक निदेशक (हीप) प्रकाश चंद ने पिछले कुछ समय से चुनौतियों के दौर से गुजर रही कंपनी को संकट से उबारने समेत कई विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।
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प्रकाशचंद के अनुसार चुनौतियों के बावजूद भेल द्वारा अपने सामाजिक दायित्वों का पूरी जिम्मेदारी से निर्वहन किया जा रहा है। आसपास के कई अंगीकृत गांवों आन्नेकी, हेतमपुर, औरंगाबाद तथा गुर्जर बस्ती में भेल की ओर से लोगों की मदद के लिए कई सुविधाएं जुटाई गई हैं। इन गांवों में सोलर लाइटें लगाई जा रही हैं। हरकी पैड़ी हरिद्वार में यात्रियों की सुविधा के लिए बैंचें, लाइटें और हरिद्वार से ऋषिकेश तक इको फ्रेंडली टॉयलेट्स का निर्माण कराया गया। अब दिव्य प्रेम सेवा मिशन के साथ मिलकर रायवाला में कैंसर पीड़ितों की मदद के लिए एक आश्रयालय का निर्माण कराया जा रहा है। इस आश्रयालय में ऐसे कैंसर पीड़ितों की नि:शुल्क सेवा की जाएगी, जिनकी बीमारी लाइलाज हो गई हो और जिन्हें चिकित्सकों ने जवाब दे दिया हो।
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उन्होंने बताया कि टिबड़ी के पास भेल की खाली पड़ी भूमि पर रेलवे के साथ मिलकर एक फ्रेट टर्मिनल बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। इस टर्मिनल का इस्तेमाल विभिन्न कंपनियों के सामान को रेलवे द्वारा डिस्पैच करने के काम में लाया जाएगा। भेल इसके लिए किराया वसूलेगा। इस बड़े प्रोजेक्ट में सैकड़ों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी खुलेंगे। उन्होंने स्वीकारा कि तीन साल पहले पॉवर सेक्टर में विभिन्न कारणों से आई मंदी और सीरिया तथा यमन जैसे देशों में चल रहे संघर्ष का प्रभाव भेल के कारोबार पर पड़ा है। यहां तैयार किए जाने वाले जनरेटर और टरबाइन के लिए ऑर्डर इसलिए आने कम हो गए, क्योंकि इन देशों में नए प्रोजेक्ट अधर में ही लटक गए लेकिन अब हालात बदल रहे हैं।
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प्रकाशचंद ने बताया कि बांग्लादेश के साथ हुए समझौते के अंतर्गत भेल को ऑर्डर मिलने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है जिससे स्थिति में सुधार आएगा। वहीं दक्षिण भारत से भी कंपनी को कुछ बडे़ आर्डर प्राप्त हो रहे हैं। तोपों पर लगने वाली बड़ी गन के साथ ही अब छोटी गन बनाने के क्षेत्र में भी भेल हाथ आजमाएगा।