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Haridwar : भैयाजी जोशी ने कहा- मणिपुर की घटना से संघ चिंतित और स्थानीय स्तर पर सक्रिय है, जो संभव होगा करेंगे
Sun, 23 Jul 2023 06:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा
कृष्णकांत मणि त्रिपाठी, हरिद्वार
कृष्णकांत मणि त्रिपाठी, हरिद्वार
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 23 Jul 2023 06:09 AM IST
सार
उन्होंने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि संघ इन मुद्दों पर जो कर सकता है उसे करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने यूसीसी, मणिपुर, मथुरा और काशी के मुद्दे पर अपनी बात रखी।
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जगद्गुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज के आश्रम में भैयाजी जोशी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
धर्मनगरी हरिद्वार में स्थित जगद्गुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज के आश्रम में प्रवास पर पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी ने कहा कि देश में महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं है। उन्होंने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि संघ इन मुद्दों पर जो कर सकता है उसे करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने यूसीसी, मणिपुर, मथुरा और काशी के मुद्दे पर अपनी बात रखी। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश ---:
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मणिपुर में जो कुछ हुआ संघ उसे किस रूप में ले रहा है?
संघ मणिपुर जैसी प्रत्येक घटना को लेकर चिंतित है। जो घटना अभी सामने आई है, उसको लेकर स्थानीय स्तर पर वहां संघ इस पूरी व्यवस्था को ठीक करने में लगा हुआ है। संघ इस मामले में जो कर सकता है, वह करेगा।
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समान नागरिक संहिता को लेकर संघ का नजरिया क्या है?
जब संविधान सबके लिए समान है तो कानून भी सबके लिए समान होने चाहिए। अल्पसंख्यक के आधार पर कानून अलग करना, यह देश के एक संघता को चुनौती देता है। सारे देशभक्त और राष्ट्र के प्रति सद्भाव रखने वाले लोगों को इसका समर्थन करना चाहिए। यह राजनीति का विषय न बने, इसकी चिंता करनी होगी। यह देश हित के लिए सबसे आवश्यक है।
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धर्मनगरी में जगद्गुरु के साथ विमर्श चल रहा है, अयोध्या में श्रीराम मंदिर बन रहा है। अब काशी और मथुरा को लेकर संघ क्या सोच रहा है?
अयोध्या में रामलला को मंदिर में विराजमान होने दीजिए। समय आएगा तो काशी और मथुरा पर भी बात की जाएगी।
इधर, कुछ सालों में सांप्रदायिक वैमनस्यता बढ़ी है। उत्तराखंड में ही इधर कई घटनाएं हुई?
इसका समाधान तो सरकार और जनता दोनों के स्तर पर होना चाहिए। देवभूमि के लोगों को भी सोचना चाहिए कि क्या पवित्र नगरी, देवनगरी को आगे चलकर अशांति का केंद्र बनने देना है। सरकार को भी सोचना चाहिए कि हरिद्वार देवभूमि का प्रभावी रूप से केंद्र है, यहां पर कोई भी अराजकता फैलाने वाला हो या अराजक तत्व हो उनकी समीक्षा करते हुए कठोर होना चाहिए।