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वैश्य और पंजाबी वोटरों के भरोसे दो ब्राह्मणों की लड़ाई

Sat, 29 Jan 2022 09:03 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 29 Jan 2022 09:03 PM IST
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Battle of two brahmins based on Vaishya and Punjabi voters
धर्मनगरी हरिद्वार सीट पर भाजपा की प्रतिष्ठा दाव पर लगी है तो कांग्रेस के लिए चुनाव जीतना किसी चुनौती से कम नहीं है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक लगातार चार बार चुनाव जीतने के बाद पांचवीं बार मैदान में हैं। कांग्रेस से सतपाल ब्रह्मचारी हैं। ब्रह्मचारी संत समाज से जुड़े हैं। ब्रह्मचारी और कौशिक दोनों ही ब्राह्मण हैं। प्रत्याशी के हारजीत की लड़ाई में वैश्य और पंजाबी मतदाता भूमिका निभाते आए हैं। इस बार भी लड़ाई वैश्य और पंजाबी वोटों की है।
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हरिद्वार प्रदेश ही नहीं बल्कि देश की सियासत का प्रमुख गढ़ है। मठ-मंदिरों और अखाड़ों में देशभर के बड़े नेता संतों का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। प्रदेश की राजनीति में भी हरिद्वार का सबसे अधिक महत्व है। राज्य गठन के बाद सीट पर भाजपा का कब्जा रहा है। मदन कौशिक लगातार चार बार विधायक हैं। प्रदेश में कैबिनेट में सबसे ताकतवर मंत्री रहने के बाद अब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। कांग्रेस 1985 के बाद से हरिद्वार में कभी वापसी नहीं कर पाई है। 2022 का चुनाव भी पिछले चुनावों की तरह कांग्रेस बनाम भाजपा के बीच केंद्रित है।
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नगर सीट में इस बार 148,718 मतदाता हैं। धर्मनगरी होने के नाते सीट पर ब्राह्मण वोटरों का वर्चस्व है। एक अनुमान के मुताबिक सर्वाधिक करीब 35 हजार ब्राह्मण वोटर हैं। वैश्य करीब 31 हजार और पंजाबी 28 हजार मतदाता हैं। पिछले अधिकतर चुनावों में बड़े राजनीतिक दलों ने हर चुनाव में ब्राह्मण प्रत्याशियों पर ही दांव खेला है। 1957 से अब तक 16 चुनाव हो चुके हैं। इनमें आठ बार ब्राह्मण प्रत्याशी निर्वाचित हुए हैं। इनमें अकेेले चार बार के विधायक मदन कौशिक हैं। जबकि चार बार ओबीसी, दो बार ठाकुर और दो बार वैश्य समाज ने हरिद्वार का प्रतिनिधित्व किया है। ब्राह्मण बाहुल्य सीट पर वैश्य और पंजाबी वोटर हमेशा से प्रत्याशियों के हार-जीत का फैसला करते आए हैं।
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2022 का चुनाव मदन कौशिक और भाजपा दोनों की प्रतिष्ठा से जुड़ा है। संगठन के अलावा मदन कौशिक की अपनी मजबूत टीम है। इसमें हर वर्ग और संप्रदाय से जुड़े लोग हैं। टीम की घर-घर दस्तक है। उसी टीम के बूते मदन कौशिक राजनीतिक सफर तय करते आए हैं। वहीं सतपाल ब्रह्मचारी संत हैं। उनकी साफ छवि और संतों के बीच बेहतर सामंजस्य है। ब्रह्मचारी पूर्व पालिकाध्यक्ष रहे हैं, लिहाजा सामाजिक क्षेत्र में भी उनकी पकड़ है। ब्रह्मचारी के बहाने कांग्रेस हरिद्वार सीट जीतने की रणनीति के साथ डैमेज कंट्रोल में जुटी है। फिलहाल कौशिक और ब्रह्मचारी के बीच कांटे का मुकाबला है। आम आदमी पार्टी के संजय सैनी भाजपा-कांग्रेस के वोट बैंक में सेंधमारी कर हार-जीत के आंकड़ों के समीकरण जरूर बिगाड़ेंगे।
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