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गुरुपूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई डुबकी
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हरकी पैड़ी में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर स्नान करते श्रद्धालु ।
- फोटो : HARIDWAR
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आषाढ़ मास की गुरुपूर्णिमा पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। हरकी पैड़ी के साथ साथ ही उत्तरी हरिद्वार के घाटों पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ गंगा स्नान को जुटी। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने आश्रमों और मठों में जाकर गुरु पूजन किया। भक्तों ने पूर्णिमा कथा का भी श्रवण किया। इस दिन गंगा तटों पर भोज का भी आयोजन हुआ। आश्रमों में भी भंडारे लगे। आधी रात के बाद चंद्रग्रहण पड़ने की वजह से ग्रहण का स्नान अब बुधवार सवेरे पांच बजे से होगा।
पूर्णिमा के दिन ही भगवान सूर्य नारायण ने कर्क राशि में प्रवेश किया था। गुरुपूर्णिमा वास्तव में गुरुजनों का पर्व है। शास्त्रों में भी गुरु की महिमा वर्णन है। ऐसे में विधि विधान के साथ गुरू वंदन किया गया। अनेक श्रद्धालु परिवार समेत उपस्थित रहे। गुरुजनों को यथासंभव पात्र, वस्त्र, दक्षिणा आदि का दान दिया गया। अनेक श्रद्धालु अपने पुरोहितों के निवास पर भी दक्षिणा देने के लिए पहुंचे।
उत्तरी हरिद्वार के सप्तसरोवर, भूपतवाला, भीमगोडा, खड़खड़ी तथा कनखल के संन्यास रोड, दक्ष रोड आदि पर खास तौर पर भीड़ लगी रही। संतों के सभी 13 अखाड़ों में गुरू भक्तों ने गुरू पूजन किया। उधर, चंद्रग्रहण के कारण हरिद्वार आने वाले तीर्थ यात्रियों की भीड़ बहुत बढ़ गई। अनेक यात्री ऐसे भी हैं जो गुरुपूजा के बजाय ग्रहण का स्नान करने आए हैं। ग्रहण का स्नान बुधवार को सवेरे तब होगा, जब चंद्रमा की ग्रहण से मुक्ति हो जाएगी। अनेक भक्तों ने ग्रहण के समय अर्द्धरात्रि में भी धर्मशालाओं और आश्रमों में धर्मग्रंथों का पाठ किया और जपीं।
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पूर्णिमा के दिन ही भगवान सूर्य नारायण ने कर्क राशि में प्रवेश किया था। गुरुपूर्णिमा वास्तव में गुरुजनों का पर्व है। शास्त्रों में भी गुरु की महिमा वर्णन है। ऐसे में विधि विधान के साथ गुरू वंदन किया गया। अनेक श्रद्धालु परिवार समेत उपस्थित रहे। गुरुजनों को यथासंभव पात्र, वस्त्र, दक्षिणा आदि का दान दिया गया। अनेक श्रद्धालु अपने पुरोहितों के निवास पर भी दक्षिणा देने के लिए पहुंचे।
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उत्तरी हरिद्वार के सप्तसरोवर, भूपतवाला, भीमगोडा, खड़खड़ी तथा कनखल के संन्यास रोड, दक्ष रोड आदि पर खास तौर पर भीड़ लगी रही। संतों के सभी 13 अखाड़ों में गुरू भक्तों ने गुरू पूजन किया। उधर, चंद्रग्रहण के कारण हरिद्वार आने वाले तीर्थ यात्रियों की भीड़ बहुत बढ़ गई। अनेक यात्री ऐसे भी हैं जो गुरुपूजा के बजाय ग्रहण का स्नान करने आए हैं। ग्रहण का स्नान बुधवार को सवेरे तब होगा, जब चंद्रमा की ग्रहण से मुक्ति हो जाएगी। अनेक भक्तों ने ग्रहण के समय अर्द्धरात्रि में भी धर्मशालाओं और आश्रमों में धर्मग्रंथों का पाठ किया और जपीं।
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