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आज डीजे वाले बाबू पर जमकर नाचेंगे बाराती
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डीजे वाले बाबू मेरा गाना चला दो.... पर आज बराती जमकर नाचेंगे। अक्षय तृतीया के अबूझ मुहूर्त पर जिलेभर में 600 से अधिक शहनाइयां गूंजेंगी। बैंड-बाजा, टेंट हाउस और डीजे संचालकों की एडवांस बुकिंग हैं। बैंक्वेट हॉल की भी मारामारी है।
अक्षय तृतीया पर शादियों की भरमार है। तीन मई को आखातीज (अक्षय तृतीया) है। इस दिन अबूझ मुहूर्त है। साथ ही अक्षय तृतीया पर हंस राजयोग भी बन रहा है। एक ही दिन में करीब छह सौ शादियां हरिद्वार जिले में होगी। वहीं दो मई को भी बड़ी संख्या में शादियां र्हुइं। कोरोनाकाल में दो साल बाद पाबंदियां हटने के बाद अक्षय तृतीया पर शादियों का यह सबसे बड़ा दिन है। अक्षय तृतीया पर हलवाइयों, टेंट हाउस संचालकों, डीजे व बैंड बाजा संचालकों के पास कई-कई बुकिंग हैं। बैंड संचालकों ने तो दूल्हे के परिजनों से घंटों के हिसाब से समय तय किया हुआ है। टेंट, सजावट, लाइटिंग, जनरेटर, डीजे साउंड, केटरिंग-हलवाई का 1000 करोड़ रुपये का कारोबार होने का अंदाजा लगाया जा रहा है। अक्षय तृतीया से एक दिन पहले रविवार को भी इस बार शादियों की संख्या अच्छी खासी रही।
बैंड न मिलने पर बुक किए ढोल
कई शादियों में बैंड-बाजा न मिलने पर ढोल वालों को नाचने के लिए बुक किया गया है। इसके साथ ही चढ़त के लिए घोड़ियां भी नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में अधिकतर दूल्हों का घोड़ी चढ़ने का ख्वाब अधूरा ही रह जाएगा।
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अक्षय तृतीया पर शादियों की भरमार है। तीन मई को आखातीज (अक्षय तृतीया) है। इस दिन अबूझ मुहूर्त है। साथ ही अक्षय तृतीया पर हंस राजयोग भी बन रहा है। एक ही दिन में करीब छह सौ शादियां हरिद्वार जिले में होगी। वहीं दो मई को भी बड़ी संख्या में शादियां र्हुइं। कोरोनाकाल में दो साल बाद पाबंदियां हटने के बाद अक्षय तृतीया पर शादियों का यह सबसे बड़ा दिन है। अक्षय तृतीया पर हलवाइयों, टेंट हाउस संचालकों, डीजे व बैंड बाजा संचालकों के पास कई-कई बुकिंग हैं। बैंड संचालकों ने तो दूल्हे के परिजनों से घंटों के हिसाब से समय तय किया हुआ है। टेंट, सजावट, लाइटिंग, जनरेटर, डीजे साउंड, केटरिंग-हलवाई का 1000 करोड़ रुपये का कारोबार होने का अंदाजा लगाया जा रहा है। अक्षय तृतीया से एक दिन पहले रविवार को भी इस बार शादियों की संख्या अच्छी खासी रही।
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बैंड न मिलने पर बुक किए ढोल
कई शादियों में बैंड-बाजा न मिलने पर ढोल वालों को नाचने के लिए बुक किया गया है। इसके साथ ही चढ़त के लिए घोड़ियां भी नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में अधिकतर दूल्हों का घोड़ी चढ़ने का ख्वाब अधूरा ही रह जाएगा।
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