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एक्सचेंज ट्रान्सफ्यूजन से बचाई शिशु की जान
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भूमानंद अस्पताल के डॉक्टरों ने नवजात शिशु की एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन (संपूर्ण रक्त बदलकर) जान बचाई है। डाक्टरों का दावा है कि हरिद्वार में एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन से किसी की जान बचाने का यह पहला मामला है। शिशु पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी मिल गई है।
अस्पताल के डाक्टर सौरभ के मुताबिक 21 मार्च को कैसर और यूनुस के नवजात शिशु का जन्म हुआ। जन्म के दूसरे दिन ही शिशु में पीलिया के लक्षण आने लगे। पीलिया का स्तर 32.5 था। रिपोर्ट देखकर डाक्टर चौंक गए। कैसर और युनूस को अनहोनी की आशंका सताने लगी। इससे पहले पीलिया से ही कैसर और यूनुस के तीन बच्चों की मौत हो चुकी है। डा. सौरभ के मुताबिक नवजात शिशु को आनन-फानन में भूमानंद अस्पताल में भर्ती कराया गया। डा. सौरभ ने बताया कि कैसर का ब्लड ग्रुप नेगेटिव और शिशु का पॉजिटिव था जिससे शिशु में खून की कोशिकाएं नष्ट होने से गंभीर पीलिया वखून की कमी हो रही थी। अस्पताल की टीम ने शिशु की जान बचाने के लिए एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन (संपूर्ण रक्त के बदलाव) का निर्णय लिया। शिशु का पूरा खून बदला गया और इस प्रक्रिया में पांच घंटे लगे। खून बदलते ही पीलिया का लेवल 32.5 से गिरकर 8 पर आ गया। शिशु पूरी तरह स्वस्थ होने पर अस्पताल से डिस्चार्ज हो गया।
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अस्पताल के डाक्टर सौरभ के मुताबिक 21 मार्च को कैसर और यूनुस के नवजात शिशु का जन्म हुआ। जन्म के दूसरे दिन ही शिशु में पीलिया के लक्षण आने लगे। पीलिया का स्तर 32.5 था। रिपोर्ट देखकर डाक्टर चौंक गए। कैसर और युनूस को अनहोनी की आशंका सताने लगी। इससे पहले पीलिया से ही कैसर और यूनुस के तीन बच्चों की मौत हो चुकी है। डा. सौरभ के मुताबिक नवजात शिशु को आनन-फानन में भूमानंद अस्पताल में भर्ती कराया गया। डा. सौरभ ने बताया कि कैसर का ब्लड ग्रुप नेगेटिव और शिशु का पॉजिटिव था जिससे शिशु में खून की कोशिकाएं नष्ट होने से गंभीर पीलिया वखून की कमी हो रही थी। अस्पताल की टीम ने शिशु की जान बचाने के लिए एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन (संपूर्ण रक्त के बदलाव) का निर्णय लिया। शिशु का पूरा खून बदला गया और इस प्रक्रिया में पांच घंटे लगे। खून बदलते ही पीलिया का लेवल 32.5 से गिरकर 8 पर आ गया। शिशु पूरी तरह स्वस्थ होने पर अस्पताल से डिस्चार्ज हो गया।
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