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व्यावसायिक भवनों पर भी स्वकर निर्धारण प्रणाली लागू
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Fri, 26 Aug 2016 10:49 PM IST
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नगर निगम क्षेत्र में आवासीय भवन स्वामियों की तरह अब व्यावसायिक भवन स्वामी भी स्वकर निर्धारण पद्घति से अपने भवन का टैक्स निर्धारित करेंगे। शासन ने नगर निगम क्षेत्रों में हाउस टैक्स निर्धारित करने के लिए नया संशोधित शासनादेश जारी किया है। इसमें आवासीय शब्द को हटाकर सभी प्रकार के भवनों पर सेल्फ एसेसमेंट (स्वकर) के तहत अपना कर स्वयं निर्धारित करने का अधिकार भवन स्वामियों को दिया है।
इससे पहले स्वकर निर्धारित करने का अधिकार केवल आवासीय भवन स्वामियों को था। व्यावसायिक भवनों पर संबंधित क्षेत्र में राजस्व विभाग की ओर से निर्धारित सर्किल रेट के आधार पर नगर निगम को हाउस टैक्स निर्धारित करने का अधिकार दिया गया था। जिसका व्यावसायिक भवन स्वामी विरोध कर रहे थे। इसके बाद ही शासन ने संशोधित शासनादेश दो अगस्त को जारी कर उन्हें भी अपना टैक्स स्वयं निर्धारित करने का अधिकार दे दिया है। इससे हजारों लोगों को लाभ मिलेगा। वहीं नगर निगम की आय में भी वृद्घि होगी।
गौरतलब है कि लंबे समय से नगर निगम की ओर से आवासीय और व्यवसायिक भवनों पर कर निर्धारण नहीं होने के चलते मामला लटका हुआ था। व्यावसायिक भवनों स्वामी उन्हें भी ऐसी ही सुविधा देने की मांग कर रहे थे। अब व्यावसायिक भवन स्वामियों को अब किस दर से अपने होटल, धर्मशाला, आश्रम, शॉपिंग कांपलेक्स, दुकान, रेस्टोरेंट आदि व्यापारिक प्रतिष्ठानों का स्वकर निर्धारित कर देना होगा इसका नया फार्मूला शासन स्तर पर तैयार किया जा रहा है। जिसे जल्दी ही राज्य कैबीनेट की हरी झंडी मिलने की उम्मीद है।
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जनप्रतिनिधियों से छीना अधिकार
भवन कर के नए संशोधित शासनादेश में नगर निगमों जनता द्वारा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अधिकारों पर कुठाराघात किया गया है। अब तक व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर हाउस टैक्स निर्धारित करने का अधिकार नगर निगम बोर्ड की कार्यकारिणी समिति को था। अपने अधिकार का बेजां इस्तेमाल कर चहेते होटलों स्वामियों को टैक्स में 80 से 90 प्रतिशत तक छूट दिए जाने की शिकायतों के बाद ही उन्हें अपने अधिकार से हाथ धोना पड़ा। संशोधित शासनादेश में कार्यकारिणी समिति को प्राप्त शक्तियां नगर आयुुक्त के हवाले कर दी गई हैं। नगर आयुक्त विप्रा त्रिवेदी का कहना है कि शासन से जो नियमावली आने वाली है। उसको समान रूप से लागू किया जाएगा और कर छूट भी किसी को कम किसी को ज्यादा नहीं दी जाएगी। शासनादेश व नियमावली के अनुसार भवन स्वामी स्वयं अपना टैक्स निर्धारित करेंगे, जिस पर उन्हें समान रूप से छूट दी जाएगी।
भवन में परिवर्तन की देनी होगी जानकारी
नए शासनादेश में यह भी प्रावधान किया गया है कि भवन स्वामी को अपने भवन में किसी भी प्रकार का परिवर्तन करने की जानकारी नगर निगम को निर्धारित फार्म पर भरकर देनी होगी। ऐसा नहीं करने पर नगर निगम 500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना वसूल करेगा।
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आवासीय भवनों से बढ़ी आय
एमएनए विप्रा त्रिवेदी के अनुसार अब तक आवासीय भवनों से प्राप्त होने वाली आय करीब 50 लाख सालाना हुआ करती थी, लेकिन इस बार अभी तक करीब डेढ़ करोड़ रुपये की धनराशि मिल चुकी है। अभी तक करीब 40 प्रतिशत फार्म आए भी नहीं हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि व्यवसायिक भवनों के परिणाम भी बेहतर होंगे।
इससे पहले स्वकर निर्धारित करने का अधिकार केवल आवासीय भवन स्वामियों को था। व्यावसायिक भवनों पर संबंधित क्षेत्र में राजस्व विभाग की ओर से निर्धारित सर्किल रेट के आधार पर नगर निगम को हाउस टैक्स निर्धारित करने का अधिकार दिया गया था। जिसका व्यावसायिक भवन स्वामी विरोध कर रहे थे। इसके बाद ही शासन ने संशोधित शासनादेश दो अगस्त को जारी कर उन्हें भी अपना टैक्स स्वयं निर्धारित करने का अधिकार दे दिया है। इससे हजारों लोगों को लाभ मिलेगा। वहीं नगर निगम की आय में भी वृद्घि होगी।
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गौरतलब है कि लंबे समय से नगर निगम की ओर से आवासीय और व्यवसायिक भवनों पर कर निर्धारण नहीं होने के चलते मामला लटका हुआ था। व्यावसायिक भवनों स्वामी उन्हें भी ऐसी ही सुविधा देने की मांग कर रहे थे। अब व्यावसायिक भवन स्वामियों को अब किस दर से अपने होटल, धर्मशाला, आश्रम, शॉपिंग कांपलेक्स, दुकान, रेस्टोरेंट आदि व्यापारिक प्रतिष्ठानों का स्वकर निर्धारित कर देना होगा इसका नया फार्मूला शासन स्तर पर तैयार किया जा रहा है। जिसे जल्दी ही राज्य कैबीनेट की हरी झंडी मिलने की उम्मीद है।
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जनप्रतिनिधियों से छीना अधिकार
भवन कर के नए संशोधित शासनादेश में नगर निगमों जनता द्वारा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अधिकारों पर कुठाराघात किया गया है। अब तक व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर हाउस टैक्स निर्धारित करने का अधिकार नगर निगम बोर्ड की कार्यकारिणी समिति को था। अपने अधिकार का बेजां इस्तेमाल कर चहेते होटलों स्वामियों को टैक्स में 80 से 90 प्रतिशत तक छूट दिए जाने की शिकायतों के बाद ही उन्हें अपने अधिकार से हाथ धोना पड़ा। संशोधित शासनादेश में कार्यकारिणी समिति को प्राप्त शक्तियां नगर आयुुक्त के हवाले कर दी गई हैं। नगर आयुक्त विप्रा त्रिवेदी का कहना है कि शासन से जो नियमावली आने वाली है। उसको समान रूप से लागू किया जाएगा और कर छूट भी किसी को कम किसी को ज्यादा नहीं दी जाएगी। शासनादेश व नियमावली के अनुसार भवन स्वामी स्वयं अपना टैक्स निर्धारित करेंगे, जिस पर उन्हें समान रूप से छूट दी जाएगी।
भवन में परिवर्तन की देनी होगी जानकारी
नए शासनादेश में यह भी प्रावधान किया गया है कि भवन स्वामी को अपने भवन में किसी भी प्रकार का परिवर्तन करने की जानकारी नगर निगम को निर्धारित फार्म पर भरकर देनी होगी। ऐसा नहीं करने पर नगर निगम 500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना वसूल करेगा।
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आवासीय भवनों से बढ़ी आय
एमएनए विप्रा त्रिवेदी के अनुसार अब तक आवासीय भवनों से प्राप्त होने वाली आय करीब 50 लाख सालाना हुआ करती थी, लेकिन इस बार अभी तक करीब डेढ़ करोड़ रुपये की धनराशि मिल चुकी है। अभी तक करीब 40 प्रतिशत फार्म आए भी नहीं हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि व्यवसायिक भवनों के परिणाम भी बेहतर होंगे।