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Haridwar News: गवाही व जिरह के अभाव में चेक बाउंस का आरोपी बरी
Sat, 25 Apr 2026 05:25 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
Updated Sat, 25 Apr 2026 05:25 PM IST
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- अदालत में गवाही व जिरह में अनुपस्थिति के चलते आरोप नहीं हुए साबित
- 1.50 लाख के लेनदेन का था मामला, न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय ने दिया फैसला
चेक बाउंस मामले में परिवादी की लापरवाही पड़ी भारी, आरोपी दोषमुक्त
अदालत से
रोशनाबाद। न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय रोहित कुमार पांडेय की अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में आरोपी धर्मपाल टेंट वाला को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि परिवादी की ओर से गवाही और जिरह न करने के कारण आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सके। मामले में ज्वालापुर निवासी शुभम निषाद, पुत्र श्याम सुंदर निषाद, प्रोप्राइटर बालाजी प्रोविजन एंड जनरल स्टोर, ने धर्मपाल टेंट वाला निवासी टिबड़ी फाटक, काली मंदिर, टीवीडी रोड रानीपुर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि धर्मपाल ने 1.50 लाख रुपये उधार लेकर नौ अगस्त 2021 को चेक दिया जो खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण बाउंस हो गया। नोटिस के बाद भी भुगतान न होने पर वर्ष 2021 में वाद दायर किया गया।
सुनवाई के दौरान परिवादी बार-बार अनुपस्थित रहा। पांच मार्च 2025 को अदालत ने परिवादी की जिरह का अवसर समाप्त कर दिया। यही नहीं, बहस के लिए भी परिवादी के अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुए जिसके बाद 24 नवंबर 2025 को बहस का अवसर भी समाप्त कर दिया।। आरोपी धर्मपाल ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए चेक के दुरुपयोग का आरोप लगाया।अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि आपराधिक मामलों में आरोपों को संदेह से परे साबित करना आवश्यक होता है लेकिन परिवादी ने साक्ष्यों की प्रतिपरीक्षा न कराने के कारण आरोप सिद्ध नहीं हो सके। इसके आधार पर अदालत ने धर्मपाल को सभी आरोपों से बरी करते हुए उनके जमानत बंधपत्र निरस्त करने के आदेश दिए।
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- 1.50 लाख के लेनदेन का था मामला, न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय ने दिया फैसला
चेक बाउंस मामले में परिवादी की लापरवाही पड़ी भारी, आरोपी दोषमुक्त
अदालत से
रोशनाबाद। न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय रोहित कुमार पांडेय की अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में आरोपी धर्मपाल टेंट वाला को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि परिवादी की ओर से गवाही और जिरह न करने के कारण आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सके। मामले में ज्वालापुर निवासी शुभम निषाद, पुत्र श्याम सुंदर निषाद, प्रोप्राइटर बालाजी प्रोविजन एंड जनरल स्टोर, ने धर्मपाल टेंट वाला निवासी टिबड़ी फाटक, काली मंदिर, टीवीडी रोड रानीपुर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि धर्मपाल ने 1.50 लाख रुपये उधार लेकर नौ अगस्त 2021 को चेक दिया जो खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण बाउंस हो गया। नोटिस के बाद भी भुगतान न होने पर वर्ष 2021 में वाद दायर किया गया।
सुनवाई के दौरान परिवादी बार-बार अनुपस्थित रहा। पांच मार्च 2025 को अदालत ने परिवादी की जिरह का अवसर समाप्त कर दिया। यही नहीं, बहस के लिए भी परिवादी के अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुए जिसके बाद 24 नवंबर 2025 को बहस का अवसर भी समाप्त कर दिया।। आरोपी धर्मपाल ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए चेक के दुरुपयोग का आरोप लगाया।अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि आपराधिक मामलों में आरोपों को संदेह से परे साबित करना आवश्यक होता है लेकिन परिवादी ने साक्ष्यों की प्रतिपरीक्षा न कराने के कारण आरोप सिद्ध नहीं हो सके। इसके आधार पर अदालत ने धर्मपाल को सभी आरोपों से बरी करते हुए उनके जमानत बंधपत्र निरस्त करने के आदेश दिए।
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