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तटबंध क्षतिग्रस्त, खतरे की जद में 15 गांव
Haridwar
Updated Sat, 29 Jun 2013 05:30 AM IST
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पथरी। गांव पुरानी कुंडी में गंगा के तेज बहाव से तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया है। कटाव के चलते तटबंध का काफी बड़ा हिस्सा बह चुका है। कटाव जारी है और तटबंध भरभरा कर गिर रहा है। इससे पथरी क्षेत्र के 15 गांव खतरे की जद में आ गए हैं। बाढ़ की आशंका से इन गांवों की 50 हजार की आबादी सहमी हुई है। समय पर तटबंध की मरम्मत नहीं हुई तो खादर जैसे बाढ़ के हालात पैदा हो सकते हैं।
बिशनपुर कुंडी से सटे पुरानी कुंडी के पास गंगा नदी में गंगा का कटाव रोकने के लिए तटबंध बने हैं। अब तक गंगा के वेग को तटबंध थामे हुए था, लेकिन शुक्रवार सुबह से तटबंध पर लगे पत्थर गिरने लगे। देखते ही देखते तटबंध का काफी बड़ा हिस्सा गंगा में समा गया। यहां दो जगह पर तटबंध को बहा कर गंगा ने भूमि पर कटाव शुरू कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार गंगा का पानी तेज कटाव कर रहा है। अगर गंगा का जलस्तर बढ़ा तो तटबंध कभी भी पूरी तरह बह सकता है, साथ ही भूमि कटाव से गंगा का पानी आबादी का रुख कर सकता है। दूसरी ओर बिशनपुर कुंडी में भी खेतों का कटाव जारी है। तटबंध निर्माण के बावजूद भी कटाव भी नहीं रुक पाया है। ऐसे में क्षेत्र के 15 गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। लोग बाढ़ की आशंका से सहमे हुए हैं। उधर, सिंचाई विभाग गंगा का जलस्तर गिरने का इंतजार कर रहा है। सिंचाई विभाग के ईई पुरूपोत्तम का कहना है कि गंगा में पानी कम होने पर क्षतिग्रस्त बांध की मरम्मत कराई जाएगी।
इन गांवों को खतरा-
बिशनपुर कुंडी, रानीमजरा, टांडा भागमल, टांड मजमत्ता, चांदपुर-खेलपुर, फतवा, तिलपुरी, हरसीवाला, भुवापुर चमरावल, मैहरोली, नई कुंडी आदि।
तो खनन है कटाव का कारण
पथरी। गंगा में आनी वाली रेत और पत्थर जो पानी को वेग को थामने का काम करते हैं। उन्हें खनन के दौरान साफ कर दिया है। ऐसे में गंगा का पानी सीधा तटबंध की जड़ में वार कर रहा है। यही वजह है कि तटबंध क्षतिग्रस्त हो रहा है। दरअसल, बिशनपुर कुंडी में जमकर खनन कार्य होता है। बताया जा रहा है खनन की तटबंध क्षतिग्रस्त होने और कटाव की मुख्य वजह है।
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प्रशासन नाकाम तो रिश्तेदार आए काम
पथरी। पूरे बरसात का मौसम अभी बाकि है। गंगा का घटता-बढ़ता जलस्तर हर रोज डरा रहा है। अब तक प्रशासन की मदद के इंतजार में बैठे ग्रामीणों का धैर्य भी जवाब देने लगा है। ऐसे में उन्होंने अपने रिश्तेदारों के घर शरण लेना शुरू कर दिया है। खादर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित लोग पथरी क्षेत्र में अपने रिश्तेदारों के घर शरण लेने पहुंच रहे हैं।
गंगा खादर क्षेत्र के गंगादासपुर, सौंपरी, नंदपुरी, महाराजपुर, पंडितपुरी आदि क्षेत्रों में बाढ़ का पानी घुस आया है। पानी बढ़ता देख और खतरा भांपते हुए इन गांवों के कई करीब 20 से अधिक परिवार क्षेत्र के शिवगढ़, दुर्गागढ़, गोविन्दगढ़, फूलगढ़, टिकौला, धारीवाला, हरसीवाला, बादशाहपुर में रिश्तेदारी में आ गए हैं। गांव महाराजपुर निवासी प्रदीप कुमार, पंडितपुरी निवासी जगराम, नंदपुरी निवासी महेन्द्र का कहना है कि उनके घरों में बाढ़ का पानी घुसा हुआ है। वह कम होने का नाम नहीं ले रहा। उन्हें खाने की लाले पड़ गए हैं। पशुओं का चारा नहीं मिल पा रहा है। इन परेशानियों को देखते हुए रिश्तेदारों के घर आना पड़ा है।
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बिशनपुर कुंडी से सटे पुरानी कुंडी के पास गंगा नदी में गंगा का कटाव रोकने के लिए तटबंध बने हैं। अब तक गंगा के वेग को तटबंध थामे हुए था, लेकिन शुक्रवार सुबह से तटबंध पर लगे पत्थर गिरने लगे। देखते ही देखते तटबंध का काफी बड़ा हिस्सा गंगा में समा गया। यहां दो जगह पर तटबंध को बहा कर गंगा ने भूमि पर कटाव शुरू कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार गंगा का पानी तेज कटाव कर रहा है। अगर गंगा का जलस्तर बढ़ा तो तटबंध कभी भी पूरी तरह बह सकता है, साथ ही भूमि कटाव से गंगा का पानी आबादी का रुख कर सकता है। दूसरी ओर बिशनपुर कुंडी में भी खेतों का कटाव जारी है। तटबंध निर्माण के बावजूद भी कटाव भी नहीं रुक पाया है। ऐसे में क्षेत्र के 15 गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। लोग बाढ़ की आशंका से सहमे हुए हैं। उधर, सिंचाई विभाग गंगा का जलस्तर गिरने का इंतजार कर रहा है। सिंचाई विभाग के ईई पुरूपोत्तम का कहना है कि गंगा में पानी कम होने पर क्षतिग्रस्त बांध की मरम्मत कराई जाएगी।
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इन गांवों को खतरा-
बिशनपुर कुंडी, रानीमजरा, टांडा भागमल, टांड मजमत्ता, चांदपुर-खेलपुर, फतवा, तिलपुरी, हरसीवाला, भुवापुर चमरावल, मैहरोली, नई कुंडी आदि।
तो खनन है कटाव का कारण
पथरी। गंगा में आनी वाली रेत और पत्थर जो पानी को वेग को थामने का काम करते हैं। उन्हें खनन के दौरान साफ कर दिया है। ऐसे में गंगा का पानी सीधा तटबंध की जड़ में वार कर रहा है। यही वजह है कि तटबंध क्षतिग्रस्त हो रहा है। दरअसल, बिशनपुर कुंडी में जमकर खनन कार्य होता है। बताया जा रहा है खनन की तटबंध क्षतिग्रस्त होने और कटाव की मुख्य वजह है।
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प्रशासन नाकाम तो रिश्तेदार आए काम
पथरी। पूरे बरसात का मौसम अभी बाकि है। गंगा का घटता-बढ़ता जलस्तर हर रोज डरा रहा है। अब तक प्रशासन की मदद के इंतजार में बैठे ग्रामीणों का धैर्य भी जवाब देने लगा है। ऐसे में उन्होंने अपने रिश्तेदारों के घर शरण लेना शुरू कर दिया है। खादर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित लोग पथरी क्षेत्र में अपने रिश्तेदारों के घर शरण लेने पहुंच रहे हैं।
गंगा खादर क्षेत्र के गंगादासपुर, सौंपरी, नंदपुरी, महाराजपुर, पंडितपुरी आदि क्षेत्रों में बाढ़ का पानी घुस आया है। पानी बढ़ता देख और खतरा भांपते हुए इन गांवों के कई करीब 20 से अधिक परिवार क्षेत्र के शिवगढ़, दुर्गागढ़, गोविन्दगढ़, फूलगढ़, टिकौला, धारीवाला, हरसीवाला, बादशाहपुर में रिश्तेदारी में आ गए हैं। गांव महाराजपुर निवासी प्रदीप कुमार, पंडितपुरी निवासी जगराम, नंदपुरी निवासी महेन्द्र का कहना है कि उनके घरों में बाढ़ का पानी घुसा हुआ है। वह कम होने का नाम नहीं ले रहा। उन्हें खाने की लाले पड़ गए हैं। पशुओं का चारा नहीं मिल पा रहा है। इन परेशानियों को देखते हुए रिश्तेदारों के घर आना पड़ा है।