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गंगनहर चौड़ी करने को मिली हरी झंडी
Haridwar
Updated Fri, 10 May 2013 05:30 AM IST
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हरिद्वार। उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तरी खंड गंगनहर को पांच मीटर चौड़ा करने के लिए हरी झंडी दे दी है। 90 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के लिए 50 करोड़ रुपये स्वीकृत भी कर दिए गए हैं। पूरी प्रक्रिया कंपलीट हो गई है। मात्र वर्क आर्डर होना शेष है। इसी माह के अंत तक काम शुरू करवाने की तैयारी है।
उत्तरी खंड गंगनहर के स्थानीय अधिकारियाें का कहना है मायापुर के जीरो प्वाइंट से छह किलोमीटर ज्वालापुर तक गंगनहर की वर्तमान जलवहन क्षमता 1050 क्यूसेक है। इसे बढ़ाकर 1350 क्यूसेक किया जाना है। इसके लिए नहर चौड़ी की जानी है। टेंडर हो चुका है। वर्क आर्डर होना शेष है। मई के अंत या जून के प्रथम पखवाड़े में कार्य शुरू होने की उम्मीद है। नहर की जलवहन क्षमता बढ़ाने का काम डामकोठी से केशव आश्रम के बीच आईरिस सेतु (तिरछा पुल) के सामने के स्कैप चेनल से शुरू होगा। यहां से एक नई नहर निकाली जानी तय हुई है। जिसे शंकराचार्य चौक के पास मायापुर नहर में मिलाया जाएगा। 90 करोड़ रुपये लागत का यह प्रोजेक्ट गंगा बंदी (क्लोजर) के दो चरणों में पूरा किया जाना है। यानी नवंबर 2014 तक काम कंपलीट किया जाएगा।
इनसेट
नहर पटरी हो जाएगी खत्म
गंगनहर चौड़ीकरण से शंकराचार्य से ज्वालापुर तक नहर पटरी, एचडीए द्वार विकसित हरित पट्टी और पार्क समाप्त हो जाएगा। कनखल, ज्वालापुर और मध्य हरिद्वार के सीनियर सिटीजन सुबह-शाम इसी पटरी पर स्वास्थ्य लाभ के लिए सैर करते हैं। इसके अलावा उनके पास अन्य कोई स्थान नहीं है। जिला प्रशासन भी सावन मास के कांवड़ मेले में इसी पटरी से कांवड़ यात्रा चलता है। पांच मीटर नहर चौड़ीकरण से पटरी पूरी तरह तबाह हो जाएगी।
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इनसेट
कनखल के घाट होंगे विरान
डामकोठी मायापुर के स्कैप चेनल से नहर बनने से अभी बैरागी कैंप के गंगा घाटों से होकर जो गंगाजल कनखल के घाटों पर जा रहा है वह बंद हो जाएगा। इससे स्कैप चेनल से छोड़े जाने वाले गंगाजल पर आधारित स्नान घाट विरान हो जाएंगे। महिला मिलन घाट से संन्यास रोड के जितने भी आश्रमों के आगे स्नान घाट है वह गंगाजल को तरस जाएंगे।
इनसेट
सरकारी आवास होंगे ध्वस्त
नहर विस्तार की चपेट में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के कर्मचारियों के कई पक्के सरकारी आवास भी आ रहे हैं। डामकोठी के सामने के टापू के आवासों को ध्वस्त कर नहर का काम आगे बढ़ेगा। कई आवासों पर यूपी के रिटायर कर्मियों को कब्जा है। खाली जमीन पर कर्मियों के नाते-रिश्तेदारों ने कब्जा कर निर्माण करा रखे हैं। उन्हें भी हटाने की तैयारी है।
कोट
जीरो प्वाइंट मायापुर से ज्वालापुर तक नहर की क्षमता बढ़ाने का डिजायन तैयार है। पेपर वर्क कंपलीट हो चुका है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 50 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी प्रदान कर दी है। टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। वर्क आर्डर मिलते ही काम शुरू हो जाएगा। नहर चौड़ीकरण का काम गंगा क्लोजर के समय होगा। इससे पूर्व स्कैप चेनल से नई नहर बनाने का काम किया जाएगा।
वीवीएस यादव, सहायक अभियंता गंगा हैंडवर्क हरिद्वार, उत्तर प्रदेश।
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उत्तरी खंड गंगनहर के स्थानीय अधिकारियाें का कहना है मायापुर के जीरो प्वाइंट से छह किलोमीटर ज्वालापुर तक गंगनहर की वर्तमान जलवहन क्षमता 1050 क्यूसेक है। इसे बढ़ाकर 1350 क्यूसेक किया जाना है। इसके लिए नहर चौड़ी की जानी है। टेंडर हो चुका है। वर्क आर्डर होना शेष है। मई के अंत या जून के प्रथम पखवाड़े में कार्य शुरू होने की उम्मीद है। नहर की जलवहन क्षमता बढ़ाने का काम डामकोठी से केशव आश्रम के बीच आईरिस सेतु (तिरछा पुल) के सामने के स्कैप चेनल से शुरू होगा। यहां से एक नई नहर निकाली जानी तय हुई है। जिसे शंकराचार्य चौक के पास मायापुर नहर में मिलाया जाएगा। 90 करोड़ रुपये लागत का यह प्रोजेक्ट गंगा बंदी (क्लोजर) के दो चरणों में पूरा किया जाना है। यानी नवंबर 2014 तक काम कंपलीट किया जाएगा।
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नहर पटरी हो जाएगी खत्म
गंगनहर चौड़ीकरण से शंकराचार्य से ज्वालापुर तक नहर पटरी, एचडीए द्वार विकसित हरित पट्टी और पार्क समाप्त हो जाएगा। कनखल, ज्वालापुर और मध्य हरिद्वार के सीनियर सिटीजन सुबह-शाम इसी पटरी पर स्वास्थ्य लाभ के लिए सैर करते हैं। इसके अलावा उनके पास अन्य कोई स्थान नहीं है। जिला प्रशासन भी सावन मास के कांवड़ मेले में इसी पटरी से कांवड़ यात्रा चलता है। पांच मीटर नहर चौड़ीकरण से पटरी पूरी तरह तबाह हो जाएगी।
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कनखल के घाट होंगे विरान
डामकोठी मायापुर के स्कैप चेनल से नहर बनने से अभी बैरागी कैंप के गंगा घाटों से होकर जो गंगाजल कनखल के घाटों पर जा रहा है वह बंद हो जाएगा। इससे स्कैप चेनल से छोड़े जाने वाले गंगाजल पर आधारित स्नान घाट विरान हो जाएंगे। महिला मिलन घाट से संन्यास रोड के जितने भी आश्रमों के आगे स्नान घाट है वह गंगाजल को तरस जाएंगे।
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सरकारी आवास होंगे ध्वस्त
नहर विस्तार की चपेट में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के कर्मचारियों के कई पक्के सरकारी आवास भी आ रहे हैं। डामकोठी के सामने के टापू के आवासों को ध्वस्त कर नहर का काम आगे बढ़ेगा। कई आवासों पर यूपी के रिटायर कर्मियों को कब्जा है। खाली जमीन पर कर्मियों के नाते-रिश्तेदारों ने कब्जा कर निर्माण करा रखे हैं। उन्हें भी हटाने की तैयारी है।
कोट
जीरो प्वाइंट मायापुर से ज्वालापुर तक नहर की क्षमता बढ़ाने का डिजायन तैयार है। पेपर वर्क कंपलीट हो चुका है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 50 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी प्रदान कर दी है। टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। वर्क आर्डर मिलते ही काम शुरू हो जाएगा। नहर चौड़ीकरण का काम गंगा क्लोजर के समय होगा। इससे पूर्व स्कैप चेनल से नई नहर बनाने का काम किया जाएगा।
वीवीएस यादव, सहायक अभियंता गंगा हैंडवर्क हरिद्वार, उत्तर प्रदेश।