फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Haridwar News ›   आधुनिक के साथ प्राचीन भी पढ़ाएं

आधुनिक के साथ प्राचीन भी पढ़ाएं

Thu, 24 Jan 2013 05:31 AM IST
Haridwar
Haridwar Updated Thu, 24 Jan 2013 05:31 AM IST
विज्ञापन

विज्ञापन

हरिद्वार। महामहिम राज्यपाल ने कहा कि हमारी संस्कृति का दुनिया में कोई सानी नहीं है। केवल भारतीयता में विश्व को समाहित करने की ताकत है। अपने संबोधन में राज्यपाल ने आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ प्राचीन शिक्षा को भी अनिवार्य करने पर जोर दिया।
बुुधवार को देव संस्कृति विवि के 22वें ज्ञानदीक्षा समारोह में मुख्यातिथि गर्वनर डा. अजीज कुरैशी ने भारतीय संस्कृति की महानता के कसीदे गढ़े। अपने संबोधन में उन्होेंने कहा विश्व में अकेला भारत ऐसा देश है जो हजारों वर्षों से दूसरे देशों के लोगों को आत्मसात करता आया है। यहां की संस्कृति में ऐसा कुछ है जो पूरी दुनिया से भारत को अलग रखती है। हमें इस बात का गर्व होना चाहिए कि हमने यहां जन्म लिया। महामहिम ने कहा, आज भले ही आधुनिक शिक्षा नए आयाम स्थापित कर रही हों। लेकिन, मानवीय मूल्यों की कमी के चलते उसके मायने नहीं रह जाते। इसलिए शिक्षण संस्थाओं में आधुनिक के साथ-साथ प्राचीन विद्या पढ़ाना जरूरी है। महामहिम ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को भी श्रद्धासुमन अर्पित किए। कुलाधिपति डा. प्रणव पंड्या ने कहा आज एकांगी विकासपरक शिक्षा के कारण अपराध बढ़ते जा रहे हैं। विज्ञान और अध्यात्म का संयोग हुए बिना असली उन्नति नहीं हो सकती। मंच पर कुलपति डा. सुखदेव शर्मा, प्रतिकुलपति डा. चिन्मय पंड्या व गौरी शंकर शर्मा उपस्थित रहे।
विज्ञापन

इनसेट
‘हम दोनों का यश एक साथ बढ़े’
देव संस्कृति विवि के कुलाधिपति डा. प्रणव पंड्या ने छात्रों-शिक्षकों को पवित्रीकरण सिंचन, प्राणायाम, मस्तिष्क संस्कार, भूमि वंदन, सर्वदेव नमस्कार और पच्चोपकार पूजन कराने के बाद शिक्षा लेने-देने का संकल्प दिलाया। सभी ने धर्म पर चलने, सत्य बोलने, अपना जीवन लोक कल्याण को समर्पित करने और देश की उन्नति में सहायक होने का संकल्प लिया। शिक्षकों और छात्रों ने संयुक्त रुप से उच्चारण किया कि शिक्षा से हम दोनों का यश एक साथ बढे़।
विज्ञापन
विज्ञापन

इनसेट
मैने बहुत पाप किए...
अपने संबोधन में महामहिम ने दिल की बातें भी साझा की। उन्होंने कहा मैंने जीवन में बहुत पाप किए हैं। इतना सुनते ही पूरे पंडाल में ठहाके गूंज उठे। उसके बाद तुरंत उन्होंने इलाहाबाद कुंभ में स्नान करके अपने सारे पापों को धोकर यहां आने की बात कही।
इनसेट
कुंभ में मिला सम्मान कीमती लम्हा
अपने संबोधन में महामहिम ने कहा उन्हें इलाहाबाद में चल रहे कुंभ मेले में हरिद्वार के अखाड़ों की ओर से बुलाया गया था। वहां अखाड़ों की ओर मिला सम्मान अब तक के जीवन में सबसे कीमती लम्हा बताया।

इनसेट
सुनाया गायत्री मंत्र का उर्दू तर्जुमा
समारोह में महामहिम ने जहां विदेशों में भारतीय संस्कृति की महानता के किस्से सुनाकर भारतीयता को बनाए रखने की नसीहत दी। वहीं गायत्री मंत्र का उर्दू तुर्जमा सुनाकर अर्थ भी बताया। इंडोनेशिया में होने वाली रामलीला की किस्से सुनाते हुए कई बार राज्यपाल राम और सीता को राम और लीला कह गए। जिस पर छात्राओं की हंसी रोके नहीं रुकी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed