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बाबा रामदेव की कंपनी पर मुकदमा दर्ज
Haridwar
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
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हरिद्वार। बाबा रामदेव की कंपनी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा विभाग ने शुक्रवार को मुकदमा दर्ज करा दिया है। विभाग ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 52 और 53 के तहत एडीएम कोर्ट में शुक्रवार को केस फाइल किया। कंपनी पर उत्पादों पर मिस ब्रांडिंग और मिस लीडिंग करने का आरोप है। मामले में बाबा रामदेव के साथ उनकी सहयोगी कंपनियों को भी पार्टी बनाया गया है।
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरएस रावत ने बताया शुक्रवार को विभाग ने पतंजलि के खाद्य उत्पादों के सैंपल फेल होने का मामला न्याय निर्णयन अधिकारी एडीएम हरिद्वार की कोर्ट में दाखिल कर दिया है। उन्होंने बताया कि पतंजलि आयुर्वेदिक लिमिडेट के क्वालिटी कंट्रोलर अविनाश सैनी के सामने पतंजलि औषधालय दिव्य योग मंदिर कनखल से सैंपल भरे गए थे। इसके अलावा निर्माता कंपनी पतंजलि आयुर्वेदिक लिमिटेड ट्रेडिंग यूनिट ओल्ड इंडस्ट्रीयल एरिया हरिद्वार, पतंजलि फूड एवं हर्बल पार्क, पदार्था लक्सर रोड हरिद्वार के अलावा उत्पाद तैयार करने में सहयोगी कंपनियां आर एंड जे ऑयल एंड फेट प्राइवेट लिमिटेड जोटवाड़ा जयपुर राजस्थान और अंकुर कैम फूड लिमिडेट जिला कच्छ गुजरात के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
उल्लेखनीय है कि 16 अगस्त को भरे गए पतंजलि के छह खाद्य उत्पादों में से सरसाें का तेल, आरोग्य बेसन, नमक, काली मिर्च, शुद्ध शहद और अनानास जैम के सैंपल फेल आए थे। 26 सितंबर को 30 दिन के भीतर नोटिस के तहत कार्रवाई नहीं होने के बाद केस दाखिल होना था। उन्होंने बताया कि पतंजलि के इन सभी उत्पादों में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 52, 53 के तहत मिस ब्रांडिंग (मिथ्या छाप) तथा मिस लीडिंग (भ्रामक प्रचार) में मामला बना है।
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हमारे सभी प्रतिष्ठानों के उत्पादन उन मानकों पर खरे उतरते हैं, जिनका निर्धारण भारत सरकार ने किया है। वास्तव में पतंजलि हर्बल और दिव्य फार्मेसी के उत्पादन शत-प्रतिशत शुद्ध हैं तथा विश्वस्तरीय हैं। लेबलिंग आदि में भी मानकों का पालन किया गया है। जिस मकसद को लेकर चले हैं, उस पर चलते रहेंगे। रास्ते की बाधाओं से कैसे निपटना है, वह काम संबंधित अधिकारी करते रहेंगे। यह बात सर्वविदित है कि बाबा का काले धन के खिलाफ आंदोलन केंद्र और केंद्र से जुड़ी सरकारों को रास नहीं आ रहा। पतंजलि योग पीठ हर हालात का मुकाबला करेगी।
-आचार्य बालकृष्ण, महामंत्री-पतंजलि योग पीठ
लग सकता है 78 लाख का जुर्माना
हरिद्वार। खाद्य उत्पादों के सैंपल मामले में कंपनी को राहत नहीं मिली तो मोटी पेनाल्टी भुगतनी पड़ सकती है। प्रत्येक उत्पाद पर 13 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। छह उत्पादों के लिए रामदेव की कंपनी को 78 लाख रुपये तक का जुर्माना चुकता करना पड़ सकता है। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरएस रावत ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत मिस ब्रांडिंग में तीन लाख और मिस लीडिंग में 10 लाख तक का जुर्माना लगाने की व्यवस्था है। हालांकि कंपनी के पास सैंपल रिपोर्ट को चुनौती देने का विकल्प था लेकिन नोटिस के 30 दिन के भीतर पतंजलि ने ऐसा नहीं किया।
कब क्या हुआ।
16 अगस्त 2012 :
खाद्य सुरक्षा अधिकारी हरिद्वार योगेन्द्र पांडे ने कनखल स्थित पतंजलि औषधालय दिव्य योग मंदिर पर छापा मारा था। यहां से पतंजलि आयुर्वेदिक लिमिडेट के छह प्रोडक्ट जिसमें सरसाें का तेल, आरोग्य बेसन, नमक, काली मिर्च, शुद्ध शहद और अनानास जेम के सैंपल भरे थे।
25 सितंबर 2012 : खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला रुद्रपुर से सैंपल की जांच रिपोर्ट खाद्य सुरक्षा विभाग को मिली। जिसे मीडिया के माध्यम से खाद्य सुरक्षा विभाग नेे सार्वजनिक किया।
26 सितंबर 2012 : पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के क्वालिटी कंट्रोलर अविनाश को नोटिस और जांच की रिपोर्ट रिसीव कराई गई। जिसमें कंपनी को 30 दिन का समय दिया गया था। कंपनी पुणे स्थित सेंट्रल लैब से सैंपल की दोबारा जांच करा सकती थी। लेकिन ऐसा करने पर कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना तय था।
26 अक्टूबर 2012:
30 दिन के नोटिस की समय सीमा खत्म हुई। इसके बाद कंपनी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं अधिनियम की धाराओं में केस होना तय था। बीच में त्योहार सीजन के चलते विभाग सैंपलिंग में व्यस्त रहा। इससे कोर्ट में केस फाइल करने का मामला पीछे खिसकता रहा।
23 नवंबर 2012 :
खाद्य सुरक्षा विभाग ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धाराओं में बाबा रामदेव की कंपनी तथा उनकी सहयोगी कंपनियों के खिलाफ एडीएम कोर्ट में केस फाइल किया।
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जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरएस रावत ने बताया शुक्रवार को विभाग ने पतंजलि के खाद्य उत्पादों के सैंपल फेल होने का मामला न्याय निर्णयन अधिकारी एडीएम हरिद्वार की कोर्ट में दाखिल कर दिया है। उन्होंने बताया कि पतंजलि आयुर्वेदिक लिमिडेट के क्वालिटी कंट्रोलर अविनाश सैनी के सामने पतंजलि औषधालय दिव्य योग मंदिर कनखल से सैंपल भरे गए थे। इसके अलावा निर्माता कंपनी पतंजलि आयुर्वेदिक लिमिटेड ट्रेडिंग यूनिट ओल्ड इंडस्ट्रीयल एरिया हरिद्वार, पतंजलि फूड एवं हर्बल पार्क, पदार्था लक्सर रोड हरिद्वार के अलावा उत्पाद तैयार करने में सहयोगी कंपनियां आर एंड जे ऑयल एंड फेट प्राइवेट लिमिटेड जोटवाड़ा जयपुर राजस्थान और अंकुर कैम फूड लिमिडेट जिला कच्छ गुजरात के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
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उल्लेखनीय है कि 16 अगस्त को भरे गए पतंजलि के छह खाद्य उत्पादों में से सरसाें का तेल, आरोग्य बेसन, नमक, काली मिर्च, शुद्ध शहद और अनानास जैम के सैंपल फेल आए थे। 26 सितंबर को 30 दिन के भीतर नोटिस के तहत कार्रवाई नहीं होने के बाद केस दाखिल होना था। उन्होंने बताया कि पतंजलि के इन सभी उत्पादों में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 52, 53 के तहत मिस ब्रांडिंग (मिथ्या छाप) तथा मिस लीडिंग (भ्रामक प्रचार) में मामला बना है।
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-आचार्य बालकृष्ण, महामंत्री-पतंजलि योग पीठ
लग सकता है 78 लाख का जुर्माना
हरिद्वार। खाद्य उत्पादों के सैंपल मामले में कंपनी को राहत नहीं मिली तो मोटी पेनाल्टी भुगतनी पड़ सकती है। प्रत्येक उत्पाद पर 13 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। छह उत्पादों के लिए रामदेव की कंपनी को 78 लाख रुपये तक का जुर्माना चुकता करना पड़ सकता है। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरएस रावत ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत मिस ब्रांडिंग में तीन लाख और मिस लीडिंग में 10 लाख तक का जुर्माना लगाने की व्यवस्था है। हालांकि कंपनी के पास सैंपल रिपोर्ट को चुनौती देने का विकल्प था लेकिन नोटिस के 30 दिन के भीतर पतंजलि ने ऐसा नहीं किया।
कब क्या हुआ।
16 अगस्त 2012 :
खाद्य सुरक्षा अधिकारी हरिद्वार योगेन्द्र पांडे ने कनखल स्थित पतंजलि औषधालय दिव्य योग मंदिर पर छापा मारा था। यहां से पतंजलि आयुर्वेदिक लिमिडेट के छह प्रोडक्ट जिसमें सरसाें का तेल, आरोग्य बेसन, नमक, काली मिर्च, शुद्ध शहद और अनानास जेम के सैंपल भरे थे।
25 सितंबर 2012 : खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला रुद्रपुर से सैंपल की जांच रिपोर्ट खाद्य सुरक्षा विभाग को मिली। जिसे मीडिया के माध्यम से खाद्य सुरक्षा विभाग नेे सार्वजनिक किया।
26 सितंबर 2012 : पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के क्वालिटी कंट्रोलर अविनाश को नोटिस और जांच की रिपोर्ट रिसीव कराई गई। जिसमें कंपनी को 30 दिन का समय दिया गया था। कंपनी पुणे स्थित सेंट्रल लैब से सैंपल की दोबारा जांच करा सकती थी। लेकिन ऐसा करने पर कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना तय था।
26 अक्टूबर 2012:
30 दिन के नोटिस की समय सीमा खत्म हुई। इसके बाद कंपनी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं अधिनियम की धाराओं में केस होना तय था। बीच में त्योहार सीजन के चलते विभाग सैंपलिंग में व्यस्त रहा। इससे कोर्ट में केस फाइल करने का मामला पीछे खिसकता रहा।
23 नवंबर 2012 :
खाद्य सुरक्षा विभाग ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धाराओं में बाबा रामदेव की कंपनी तथा उनकी सहयोगी कंपनियों के खिलाफ एडीएम कोर्ट में केस फाइल किया।