65 बीघा भूमि को लेकर 50 राउंड फायरिंग

Haridwar Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
लक्सर। सीमा पर स्थित 65 बीघा कृषि भूमि को लेकर यूपी और उत्तराखंड के ग्रामीणों के बीच संघर्ष हो गया। इस दौरान करीब 50 राउंड फायरिंग हुई। कंधे पर गोली लगने से यूपी का एक श्रमिक घायल हो गया। बताया जा रहा है कि यूपी के किसान बुआई करने के लिए पहुंचे थे। जिसका उत्तराखंड के किसानों ने विरोध किया। यूपी पक्ष की ओर से चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। दोनों पक्षों में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
यूपी और उत्तराखंड बार्डर पर करीब 200 बीघा भूमि है। करीब 65 बीघा भूमि को लेकर उत्तराखंड के खानपुर थाना क्षेत्र के दाबकी खेड़ा और यूपी के मुजफ्फरनगर जिले के चमरावाला गांव के ग्रामीणों के बीच विवाद चल रहा है। यूपी के चमरावाला गांव निवासी गुरमीत ने यह जमीन यूपी के ही बढ़ाई वाला गांव के ग्रामीण से बटाई पर ले रखी है। बताया गया कि सोमवार को गुरमीत अपने साथ मक्खन, कर्मजीत और सतनाम आदि मजदूरों को लेकर ट्रैक्टर से भूमि की बुआई करने के लिए पहुंचा। इसकी खबर दाबकी खेड़ा गांव के लोगाें को हुई तो वे हाथों में लाठी डंडे और तमंचाें से लैस होकर मौके पर पहुंच गए। दाबकी खेड़ा गांव के ग्रामीणाें ने बुआई का विरोध किया तो उनके बीच संघर्ष हो गया। आरोप है कि दाबकी खेड़ा गांव के लोगाें की ओर से फायरिंग में यूपी पक्ष के श्रमिक मख्खन के कंधे पर गोली लग गई। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। वहीं, उत्तराखंड के किसानों ने भी यूपी पक्ष के लोगों पर तलवार से हमला करने का आरोप लगाया है। जिसमें तासीन, मेहताब सरदार अली के घायल होने की बात बताई गई है। संघर्ष में करीब 50 राउंड गोली चलने की बात कही जा रही है। सूचना पर सीओ अरुण पांडे और खानपुर थानाध्यक्ष टीएस राणा मौके पर पहुंचे। घायल को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने यूपी पक्ष के गुरमीत की ओर से वासीम, तासीन, लड्डन और रियासत निवासी दाबकी खेड़ा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। दोनाें पक्ष के लोगों के बीच तनाव की स्थिति बनी है।

गंगा खादर की जमीन को लेकर पहले भी होता रहा है संघर्ष
हरिद्वार जिले के गंगा खादर में खाली पड़ी नॉन रेव्यनू लैंड को लेकर पहले भी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसानों के बीच संघर्ष होता रहा है। अभी तक इस संघर्ष में उत्तर प्रदेश के एक किसान की जान जा चुकी है और कई लोग घायल हुए। उत्तराखंड बनने के बाद हरिद्वार जिले और उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के बीच जमीन की सही पैमाइश न होने के कारण विवाद बना हुआ है। दोनों क्षेत्रों को गंगा विभाजित करती है। हर साल बरसात में गंगा इस जमीन को बहा ले जाती और बरसात के बाद जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद खड़ा हो जाता है। गंगा खादर की जमीन एक तो बेहद उपजाऊ और दूसरा राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं। जिसके चलते प्रशासन भी यह तय नहीं कर पाया कि जमीन किसकी है। वर्ष 2007 में हुए संघर्ष के बाद दोनों जिलों के प्रशासन ने जमीन की पैमाइश करने का निर्णय लिया था, लेकिन यह पैमाइश पूरी नहीं हो सकी। जिसके चलते गंगा खादर की जमीन विवाद का कारण बनी हुई है।

उत्तराखंड के किसानों के हक पर डाका नहीं पड़ने दिया जाएगा। जिला प्रशासन को निर्देश दिए जाएंगे कि वह जमीन की पैमाइश करे, ताकि भविष्य में इस तरह के झगड़े न हों। - कुंवर प्रणव सिंह चैैंपियन, विधायक खानपुर

दोनों प्रदेशों के बीच की जमीन की पैमाइश की जाएगी। पैमाइश में जमीन जिसकी होगी उसे दिलाई जाएगी। - मोहम्मद नासिर, उपजिलाधिकारी

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