जूना अखाड़े में राधे मां की वापसी मुश्किल

Haridwar Updated Wed, 08 Aug 2012 12:00 PM IST
हरिद्वार। संन्यासियों के दशनाम जूना अखाड़े में महामंडलेश्वर पद पर राधे मां की वापसी मुश्किल हो चली है। राधे मां ने अखाड़े से संन्यास दीक्षा तक नहीं ली। उनका संबंध बैरागियों के डाकोर खालसा से रहा है। गलती सुधारने के लिए जूना अखाड़े ने जांच बैठाई है। जांच प्रारंभ होने से पूर्व ही उनका निलंबन साबित करता है कि राधे मां की अखाड़े में वापसी अब लगभग असंभव है।
गठित 11 सदस्यीय जांच टीम पंजाब के दौरे पर है। सूत्रों के अनुसार जांच टीम ने अब तक जो पाया है, वह अखाड़े में निराशा पैदा करने वाला है। पता चला है कि राधे मां का संबंध बैरागियों के डाकोर खालसा से रहा है और मुकेरियां स्थित डाकोर डेरे के महंत बीरम दास से उन्होंने ज्ञान प्राप्त किया। बाद में राधे मां मुंबई चली गई और संन्यासियों के जूना अखाड़े में आने से पूर्व उन्होंने कहीं भी संन्यास दीक्षा नहीं ली। बगैर संन्यास लिये नागाओं के अखाड़े में राधे मां को महामंडलेश्वर पद प्रदान करना वैसे भी परम्पराओं के विपरीत हो गया है। पता चला है कि महामंडलेश्वर पर देने के बाद अखाड़े को अपनी गलती का अहसास हो गया। इसीलिए जांच समिति गठित करते ही राधे मां के महामंडलेश्वर पद को निलंबित कर दिया गया।
बैरागियों के प्रमुख संत और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञान दास स्वीकार करते हैं कि राधे मां वैष्णव संत हैं। उन्हें किस प्रकार संन्यासियों का महामंडलेश्वर पद मिला, इस पर वे सीधी टिप्पणी करने से मना करते हैं। बहरहाल यह स्पष्ट हो गया है कि राधे मां का संबंध वैष्णव अखाड़ों से है। जूना अखाड़े के संतों को यह बात भली-भांति समझ आ गई है कि अब राधे मां की वापसी नहीं हो पाएगी। उनसे पीछा छुड़ाने के लिए बैठायी गई जांच में भी यही बात सामने आने के आसार उत्पन्न हो गए हैं।
जांच समिति के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगाया
हरिद्वार। शंकराचार्यों से जुड़ी दंडी स्वामियों की प्रमुख भूमा पीठ के आचार्य स्वामी अच्युतानंद तीर्थ ने जूना अखाड़े द्वारा गठित जांच समिति के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। उन्होंने पूछा है कि अखाड़े से आर्थिक लाभ की बाबत सवाल करने के अलावा राधे मां के संत होने का प्रमाण पत्र भी अखाड़े से मांगा है।
सप्तसरोवर स्थित भूमा निकेतन में पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी अच्युतानंद तीर्थ ने कहा कि जिस राधे मां को अखाड़े ने महामंडलेश्वर पद दिया है, उसी अखाड़े की जांच समिति गठित की गई है। यह जांच समिति वही रिपोर्ट देगी, जो अखाड़ा चाहेगा। अच्छा होता, यदि देश के वरिष्ठ धर्माचार्यों तथा अन्य अखाड़ों के श्रीमहंतों को शामिल कर जांच समिति बनाई जाती।
स्वामी अच्युतानंद ने कहा जब तक राधे मां को संन्यासी बनाकर विजयाहोम नहीं किया जाता, तब तक प्रेयस मंत्र नहीं दिया जा सकता। महामंडलेश्वर बनाने से पूर्व राधे मां का मुंडन कराना भी धर्म सम्मत था।
इस अवसर पर स्वामी निगम बोध महाराज ने कहा कि महामंडलेश्वर पद उसी को देना चाहिए, जो मानव मात्र की सेवा में रत हो। 50 वर्ष पूर्व तक देश में विरले ही महामंडलेश्वर हुआ करते थे। दुर्भाग्य का विषय है कि आज शंकराचार्य की संन्यास परम्पराओं का इस तरह उपहास उड़ाया जा रहा है।
अनेक जांच के लिए तैयार : राधे मां
हरिद्वार। महामंडलेश्वर बनने के बाद मचे बवाल और फिर निलंबित होने के चलते चर्चाओं में आई राधे मां की ओर से कहा गया है कि वह एक नहीं अनेक जांच के लिए तैयार हैं। अखाड़े की ओर से चल रही जांच में पूरा सहयोग करेंगी। पूरे विवाद पर राधे मां की ओर से पहली बार प्रतिक्रिया आई है।
मंगलवार की रात राधे मां का सत्संग दिल्ली में हुआ। अमर उजाला की ओर से दिल्ली में मौजूद राधे मां से फोन पर संपर्क साधा गया। दिल्ली से उनके अधिकृत प्रतिनिधि जगमोहन गुप्ता ने बताया कि राधे मां महामंडलेश्वर बनने की पूरी योग्यता रखती हैं
दो बच्चों की मां हैं राधे मां : राधे मां का जन्म पंजाब के गुुरदासपुर जिले में दोरंगला नामक स्थान पर हुआ था। दसवीं कक्षा तक पढ़ी-लिखी राधे मां की शादी 18 साल की उम्र मेें मोहन सिंह के साथ हुई थी। शादी के बाद राधे मां होशियारपुर जिले के मुकेरियां में पति के घर आ गई। यहां पर उन्होंने दो बेटों को जन्म दिया।

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