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थक गया धर्म महामंडल और थक गई विद्वत परिषद
Updated Mon, 05 Feb 2018 11:04 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
ज्योर्तिपीठ के शंकराचार्य के रूप में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ही आसीन माने जाएंगे। दो फाड़ होने से धर्म महामंडल और विद्वत परिषद आवेदन मांगने के बावजूद कोई निर्णय नहीं ले पाए। अब सभी जगह से स्वरूपानंद सरस्वती को ही शारदापीठ के साथ-साथ ज्योर्तिपीठ के लिए भी मान्य कर दिया गया है।
जबलपुर में हुए आयोजन में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का अभिषेक हो चुका है। वे पहले भी ज्योर्तिपीठ के शंकराचार्य थे लेकिन इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फैसला देकर स्वरूपानंद और वासुदेवानंद दोनों के दावे खारिज कर दिए थे। न्यायालय ने धर्म महामंडल और विद्वत परिषद को आदेश दिया था कि वे तत्काल ज्योर्तिपीठ पर नए शंकराचार्य को आसीन करे। इसके लिए कोर्ट ने तीन महीने की समय सीमा भी तय की थी। इसी बीच पहले से बंटी विद्वत परिषद के भांति धर्म महामंडल भी दो फाड़ हो गया। सैकड़ों संतों को आमंत्रित कर धर्म महामंडल जबलपुर में विद्वत परिषद के साथ स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का फिर से ज्योर्तिपीठाधीश्वर के रूप में अभिषेक कर दिया। तब से स्वरूपानंद को ही सर्वत्र ज्योर्तिपीठ के शंकराचार्य की मान्यता मिल रही है।
तीन महीने बीत जाने के बावजूद कोई निर्णय न कर पाने पर धर्म महामंडल ने उच्च न्यायालय से तीन महीने का और समय मांगा। समय की प्रतीक्षा में धर्म महामंडल ने देश भर में सूचनाएं भेजकर शंकराचार्य पद के लिए आवेदन मांग। इस पद के लिए 82 आवेदन मिले, जिनमें से प्राथमिक चयन के बाद 52 संतों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। इनमें महिला संत भी शामिल है। चयन प्रक्रिया प्रारंभ किए एक माह से अधिक समय बीत गया है और न्यायालय से समय आगे बढ़ाने की अनुमति भी नहीं मिल पाई है। महामंडल सूत्रों के अनुसार प्रत्याशियों के कई नामों को लेकर चयनकर्ताओं के बीच गंभीर मतभेद बन गए हैं। परिणाम स्वरूप इस पद पर किसी भी संत का अंतिम चयन नहीं हो पाया। इस बीच स्वामी स्वरूपानंद का अभिनंदन अस्वस्थ होने के बावजूद लगातार चल रहा है। अधिकांश धर्म जगत एक बार फिर से उन्हें ही ज्योर्तिपीठ के शंकराचार्य के रूप में ही मान्यता दे चुका है।
हरिद्वार।
ज्योर्तिपीठ के शंकराचार्य के रूप में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ही आसीन माने जाएंगे। दो फाड़ होने से धर्म महामंडल और विद्वत परिषद आवेदन मांगने के बावजूद कोई निर्णय नहीं ले पाए। अब सभी जगह से स्वरूपानंद सरस्वती को ही शारदापीठ के साथ-साथ ज्योर्तिपीठ के लिए भी मान्य कर दिया गया है।
जबलपुर में हुए आयोजन में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का अभिषेक हो चुका है। वे पहले भी ज्योर्तिपीठ के शंकराचार्य थे लेकिन इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फैसला देकर स्वरूपानंद और वासुदेवानंद दोनों के दावे खारिज कर दिए थे। न्यायालय ने धर्म महामंडल और विद्वत परिषद को आदेश दिया था कि वे तत्काल ज्योर्तिपीठ पर नए शंकराचार्य को आसीन करे। इसके लिए कोर्ट ने तीन महीने की समय सीमा भी तय की थी। इसी बीच पहले से बंटी विद्वत परिषद के भांति धर्म महामंडल भी दो फाड़ हो गया। सैकड़ों संतों को आमंत्रित कर धर्म महामंडल जबलपुर में विद्वत परिषद के साथ स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का फिर से ज्योर्तिपीठाधीश्वर के रूप में अभिषेक कर दिया। तब से स्वरूपानंद को ही सर्वत्र ज्योर्तिपीठ के शंकराचार्य की मान्यता मिल रही है।
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तीन महीने बीत जाने के बावजूद कोई निर्णय न कर पाने पर धर्म महामंडल ने उच्च न्यायालय से तीन महीने का और समय मांगा। समय की प्रतीक्षा में धर्म महामंडल ने देश भर में सूचनाएं भेजकर शंकराचार्य पद के लिए आवेदन मांग। इस पद के लिए 82 आवेदन मिले, जिनमें से प्राथमिक चयन के बाद 52 संतों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। इनमें महिला संत भी शामिल है। चयन प्रक्रिया प्रारंभ किए एक माह से अधिक समय बीत गया है और न्यायालय से समय आगे बढ़ाने की अनुमति भी नहीं मिल पाई है। महामंडल सूत्रों के अनुसार प्रत्याशियों के कई नामों को लेकर चयनकर्ताओं के बीच गंभीर मतभेद बन गए हैं। परिणाम स्वरूप इस पद पर किसी भी संत का अंतिम चयन नहीं हो पाया। इस बीच स्वामी स्वरूपानंद का अभिनंदन अस्वस्थ होने के बावजूद लगातार चल रहा है। अधिकांश धर्म जगत एक बार फिर से उन्हें ही ज्योर्तिपीठ के शंकराचार्य के रूप में ही मान्यता दे चुका है।
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