{"_id":"5c64630cbdec22736d6a19d1","slug":"81550082828-haridwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दलालों ने रची घोटाले की पटकथा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दलालों ने रची घोटाले की पटकथा
विज्ञापन
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
करोड़ों रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में एसआईटी की ओर से पहली गिरफ्तारी किए जाने के बाद कई और कॉलेज अब जांच की रडार पर आ गए हैं। इस बीच एक तथ्य यह भी सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क को संचालित करने में दलालों को बड़ा योगदान रहा है। ये दलाल कॉलेजों में फर्जी एडमिशन कराने के साथ ही बाहर के छात्रों को एडमिशन दिलाने में कॉलेज प्रबंधकों की मदद करते रहे हैं। साथ ही जल्दी पैसा उपलब्ध कराने से लेकर शासन में फाइलें न रुके इसकी भी व्यवस्था करते रहे हैं।
छात्रवृत्ति घोटाले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। एसआईटी दो सौ से भी ज्यादा कॉलेजों की जांच कर रही है। मंगलवार को रुड़की क्षेत्र के आईपीएस कॉलेज के निदेशक अंकुर शर्मा की पहली गिरफ्तारी एसआईटी द्वारा की गई थी। जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो दलालों के माध्यम से पूरा नेटवर्क संचालित किया गया। दलालों ने कॉलेज संचालकों की तरह ही छात्रवृत्ति के नाम पर खूब चांदी काटी। सूत्रों ने बताया कि एडमिशन कराने के नाम पर दलाल भी मोटी रकम वसूलते रहे हैं। साथ ही समाज कल्याण विभाग से लेकर शासन में भी गहरी पैठ के चलते दलालों ने इस घोटाले को बढ़ाने में पूरी मदद की। ज्वालापुर और हरिद्वार क्षेत्र में रहने वाले ऐसे कुछ चेहरे एसआईटी की जांच का दायरा बढ़ता देख भूमिगत भी हो गए हैं। एसआईटी के प्रभारी मंजूनाथ टीसी ने बताया कि जांच विभिन्न पहलुओं पर की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
अपने ही कैंपस में खुलवा दिए बैंक
छात्रवृत्ति घोटाले को अंजाम देने के लिए प्राइवेट कालेज चलाने वालों ने बैंकों की शाखाएं अपने परिसर में ही खुलवा ली थी। ताकि छात्रों के खाते में आने वाला पैसा अपने खाते में ट्रांसफर करने में उन्हें आसानी रहे। साथ ही बैंकों से भी उनकी डीलिंग बेहतर बनी रहे। धनौरी क्षेत्र में इस तरह के मामले ज्यादा सामने आए।
विज्ञापन
विज्ञापन
करोड़ों रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में एसआईटी की ओर से पहली गिरफ्तारी किए जाने के बाद कई और कॉलेज अब जांच की रडार पर आ गए हैं। इस बीच एक तथ्य यह भी सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क को संचालित करने में दलालों को बड़ा योगदान रहा है। ये दलाल कॉलेजों में फर्जी एडमिशन कराने के साथ ही बाहर के छात्रों को एडमिशन दिलाने में कॉलेज प्रबंधकों की मदद करते रहे हैं। साथ ही जल्दी पैसा उपलब्ध कराने से लेकर शासन में फाइलें न रुके इसकी भी व्यवस्था करते रहे हैं।
छात्रवृत्ति घोटाले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। एसआईटी दो सौ से भी ज्यादा कॉलेजों की जांच कर रही है। मंगलवार को रुड़की क्षेत्र के आईपीएस कॉलेज के निदेशक अंकुर शर्मा की पहली गिरफ्तारी एसआईटी द्वारा की गई थी। जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो दलालों के माध्यम से पूरा नेटवर्क संचालित किया गया। दलालों ने कॉलेज संचालकों की तरह ही छात्रवृत्ति के नाम पर खूब चांदी काटी। सूत्रों ने बताया कि एडमिशन कराने के नाम पर दलाल भी मोटी रकम वसूलते रहे हैं। साथ ही समाज कल्याण विभाग से लेकर शासन में भी गहरी पैठ के चलते दलालों ने इस घोटाले को बढ़ाने में पूरी मदद की। ज्वालापुर और हरिद्वार क्षेत्र में रहने वाले ऐसे कुछ चेहरे एसआईटी की जांच का दायरा बढ़ता देख भूमिगत भी हो गए हैं। एसआईटी के प्रभारी मंजूनाथ टीसी ने बताया कि जांच विभिन्न पहलुओं पर की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
अपने ही कैंपस में खुलवा दिए बैंक
छात्रवृत्ति घोटाले को अंजाम देने के लिए प्राइवेट कालेज चलाने वालों ने बैंकों की शाखाएं अपने परिसर में ही खुलवा ली थी। ताकि छात्रों के खाते में आने वाला पैसा अपने खाते में ट्रांसफर करने में उन्हें आसानी रहे। साथ ही बैंकों से भी उनकी डीलिंग बेहतर बनी रहे। धनौरी क्षेत्र में इस तरह के मामले ज्यादा सामने आए।
विज्ञापन