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...देश को एकता के सूत्र में बांधने वाली भाषा है हिंदी- कुपलति
Updated Sat, 15 Sep 2018 12:30 AM IST
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हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत विवि के कुलपति प्रो. पीयूषकांत दीक्षित ने कहा कि हिंदी भाषा देेश को एकता के सूत्र में बांधने वाली भाषा है। उन्होंने कहा कि हिंदी का प्रयोग करते वक्त किसी तरह की हीन भावना नहीं होनी चाहिए।
विवि के हिंदी एवं भाषा विज्ञान विभाग में हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी की प्रासंगिकता पर आयोजित विचार गोष्ठी में कुलपति प्रो. दीक्षित ने कहा कि भारत एक बड़ा बाजार है, जिसके चलते विश्व के कई देशों में लगातार हिंदी बोलने वालों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अपने देश में जो सम्मान हिंदी को मिलना चाहिए, वह नहीं मिल पर रहा है। विभागाध्यक्ष प्रो. दिनेश चंद्र चमोला ने कहा कि देश के आजादी के बाद जो सम्मान हिंदी को दिया जाना चाहिए था, वह नहीं मिल पर रहा है। इस अवसर पर शोध छात्र ललित शर्मा, अनूप बहुखंडी, रीना अग्रवाल, धीरज आदि ने विचार रखे। वहीं हिंदी दिवस पर विवि के बीएड विभाग में हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति पर प्रतियोगिता कराई गई। कुमारी दीपिका प्रथम, दीपक गैरोला ने द्वितीय और आशीष बहुखंडी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विभागध्यक्ष डा. अरविंद नारायण मिश्र ने हिंदी भाषा का महत्व बताया। इस असवर पर डा. बिंदुमती द्विवेदी, सुमन भट्ट, अमित मुरारी, अंजू पांडे, रविंद्र नौटियाल, योगेश खर्कवाल, धर्मपाल, मोहित सेमवाल, मीनाक्षी आदि मौजूद रहे।
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हिंदी की चुनौतियां और संभावनाएं पर रखे विचार रखे
हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में हिंदी दिवस पर हिंदी बदलते परिवेश की चुनौतियां और संभावनाएं विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन कतरे हुए डा. अजीत तोमर ने कहा कि विश्व भाषा के रूप में हिंदी का क्षेत्र बढ़ा है। हम जैसे-जैसे दुनिया में आर्थिक रूप से उभर रहे हैं, ऐसे में हमारी हिंदी का विकास भी बढ़ा है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने उत्पाद को हिंदी के माध्यम से हम तक पहुंचना चाहती हैं। इस अवसर पर शोध छात्र बाबूराम, मुकेश त्रिपाठी, विनय प्रताप, जितेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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विवि के हिंदी एवं भाषा विज्ञान विभाग में हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी की प्रासंगिकता पर आयोजित विचार गोष्ठी में कुलपति प्रो. दीक्षित ने कहा कि भारत एक बड़ा बाजार है, जिसके चलते विश्व के कई देशों में लगातार हिंदी बोलने वालों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अपने देश में जो सम्मान हिंदी को मिलना चाहिए, वह नहीं मिल पर रहा है। विभागाध्यक्ष प्रो. दिनेश चंद्र चमोला ने कहा कि देश के आजादी के बाद जो सम्मान हिंदी को दिया जाना चाहिए था, वह नहीं मिल पर रहा है। इस अवसर पर शोध छात्र ललित शर्मा, अनूप बहुखंडी, रीना अग्रवाल, धीरज आदि ने विचार रखे। वहीं हिंदी दिवस पर विवि के बीएड विभाग में हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति पर प्रतियोगिता कराई गई। कुमारी दीपिका प्रथम, दीपक गैरोला ने द्वितीय और आशीष बहुखंडी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विभागध्यक्ष डा. अरविंद नारायण मिश्र ने हिंदी भाषा का महत्व बताया। इस असवर पर डा. बिंदुमती द्विवेदी, सुमन भट्ट, अमित मुरारी, अंजू पांडे, रविंद्र नौटियाल, योगेश खर्कवाल, धर्मपाल, मोहित सेमवाल, मीनाक्षी आदि मौजूद रहे।
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हिंदी की चुनौतियां और संभावनाएं पर रखे विचार रखे
हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में हिंदी दिवस पर हिंदी बदलते परिवेश की चुनौतियां और संभावनाएं विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन कतरे हुए डा. अजीत तोमर ने कहा कि विश्व भाषा के रूप में हिंदी का क्षेत्र बढ़ा है। हम जैसे-जैसे दुनिया में आर्थिक रूप से उभर रहे हैं, ऐसे में हमारी हिंदी का विकास भी बढ़ा है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने उत्पाद को हिंदी के माध्यम से हम तक पहुंचना चाहती हैं। इस अवसर पर शोध छात्र बाबूराम, मुकेश त्रिपाठी, विनय प्रताप, जितेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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