फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Haridwar News ›   गंगा सभा ने 103 वर्षों में कई बार रचा इतिहास

गंगा सभा ने 103 वर्षों में कई बार रचा इतिहास

Fri, 22 Mar 2019 11:45 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 22 Mar 2019 11:45 PM IST
विज्ञापन
गंगा सभा ने 103 वर्षों में कई बार रचा इतिहास
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
विज्ञापन

महामना मदन मोहन मालवीय की ओर से 25 दिसंबर 1916 को स्थापित हरकी पैड़ी की प्रबंधकारिणी संस्था गंगा सभा ने अपने 103 वर्षों के कार्यकाल में कई बार इतिहास रचा है। विश्व में कहीं भी बांध विरोध आंदोलन हरिद्वार से पहले न तो लड़ा गया और न ही जीता गया। सभा की ओर से मनाए गए शताब्दी वर्ष में ही पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हरकी पैड़ी पहुंचकर पुरोहितों को गौरवान्वित किया।

गंगा सभा की स्थापना एक बहुत बड़े संग्राम के बाद हुई जो ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ हरिद्वार के पुरोहितों ने वर्ष 1914 से लड़ना शुरू किया गया था। जब ब्रिटिश सरकार भीमगोड़ा में गंगा पर बांध का निर्माण कर रही थी। पुरोहितों ने यह कहते हुए निर्माण कार्य शुरू नहीं होने दिया कि बंधे हुए जल में देव पितृ तर्पण और धार्मिक कर्मकांड शास्त्रों में वार्जित है। गंगा पर बांध बनने से हरिद्वार में कोई भी कर्मकांड, कुंभ अथवा स्नान पर्व बेमानी हो जाएंगे। ब्रिटिश सत्ता न मानी तो पुरोहितों ने आंदोलन शुरू कर दिया। महामना मदनमोहन मालवीय ने हरिद्वार आकर आंदोलन की बागडोर स्वयं संभाल ली। देश की 32 रियासतें अपनी सेनाएं लेकर अग्रेंजों के खिलाफ हरिद्वार पहुंच गई। देश के जानेमाने न्यायमूर्ति और कानूनविदों ने पुरोहिता का साथ दिया। अंतत: ब्रिटिश सत्ता को झुकना पड़ा और बांध का प्रस्ताव रद्द कर गंगा की नीलधारा पर बैराज बनाकर काम चलाना पड़ा। हरिद्वार से पहले दुनिया में कहीं भी बांध के विरुद्ध आंदोलन नहीं हुआ था। यह बात 1928 ब्रिटिश गजेटियर में अंग्रेजी सरकार ने स्वीकार की है। इसके बाद गंगा सभा के पुरोहितों ने सरकारी अधिकारियों और पुलिस के चमड़े की बेल्ट बांधकर हरकी पैैड़ी पर जाने के खिलाफ एक वर्ष तक आंदोलन चलाया गया, जो सफल रहा। अंग्रेजों ने जब हरकी पैड़ी और आसपास के क्षेत्रों में कथा पर प्रतिबंध लगाया तो पुरोहितों ने कथा सत्यग्रह चलाकर देशभर के कथाकारों को हरिद्वार में एकत्रित कर लिया। इस आंदोलन में भी गंगा सभा को जीत और ब्रिटिश सत्ता को पराजय मिली। सभा के इतिहास में अब से पहले कभी भी पदों के लिए चतुष्कोणीय मुकाबला नहीं हुआ। इस बार ऐसा पहली दफा हो रहा है। इस चुनाव पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed