{"_id":"5b8196db42c79246353bb899","slug":"31535219419-haridwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्किल डवलपमेंट सेंटरों की होगी जांच: डीएम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्किल डवलपमेंट सेंटरों की होगी जांच: डीएम
Updated Sat, 25 Aug 2018 11:20 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत युवाओं में स्किल डेवलपमेंट के लिए प्रशिक्षण केंद्रों की अनियमितता सामने आने पर डीएम दीपक रावत ने सीडीओ विनीत तोमर को जांच करने के निर्देश दिए हैं।
युवाओं में विभिन्न कार्यों में सक्षम बनाकर देश में स्वरोजगार पैदा करने के लिण् कौशल विकास केंद्र खोले गए हैं। इनके माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षित कर दक्षता प्रमाणपत्र दिया जाता है। प्रमाणपत्र के माध्यम से निजी या सरकारी क्षेत्र में नौकरी प्राप्त करने के साथ-साथ प्रशिक्षित स्वरोजगार भी कर सकता है। इसके साथ ही उन्हें मेक इन इंडिया योजना, डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट, स्वच्छ भारत अभियान के तहत भी काम दिलाना है। सबसे बड़ी बात दक्ष अभ्यर्थी को 7500 रुपये से लेकर 12500 रुपये प्रति महीने देने और केंद्रों को आर्थिक मदद करने के मामले में अनियमितता सामने आ रही है। सर्टिफिकेट प्राप्त अभ्यर्थी को बिना शर्त पूरी किए आठ हजार रुपये महीने देने और सेंटर पर कमियां मिलने के बावजूद बराबर सरकारी धन दिया जा रहा है। कुछ सेंटरों पर निशुल्क प्रशिक्षण नियम के विपरीत रुपये भी लिए जाने के मामले सामने आए हैं। ऐसी अनियमितता मिलने पर जिलाधिकारी दीपक रावत ने जनपद में चल रहे कौशल विकास केंद्रों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। डीएम ने बताया कि जांच सीडीओ विनीत तोमर को सौंपी गई है। जांच में कमियां और सरकारी धन को बंदरबांट करने के मामले पाए जाने पर सेंटर संचालक से वसूली करने के साथ कानूनी कार्रवाई भी कराई जाएगी।
हरिद्वार। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत युवाओं में स्किल डेवलपमेंट के लिए प्रशिक्षण केंद्रों की अनियमितता सामने आने पर डीएम दीपक रावत ने सीडीओ विनीत तोमर को जांच करने के निर्देश दिए हैं।
युवाओं में विभिन्न कार्यों में सक्षम बनाकर देश में स्वरोजगार पैदा करने के लिण् कौशल विकास केंद्र खोले गए हैं। इनके माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षित कर दक्षता प्रमाणपत्र दिया जाता है। प्रमाणपत्र के माध्यम से निजी या सरकारी क्षेत्र में नौकरी प्राप्त करने के साथ-साथ प्रशिक्षित स्वरोजगार भी कर सकता है। इसके साथ ही उन्हें मेक इन इंडिया योजना, डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट, स्वच्छ भारत अभियान के तहत भी काम दिलाना है। सबसे बड़ी बात दक्ष अभ्यर्थी को 7500 रुपये से लेकर 12500 रुपये प्रति महीने देने और केंद्रों को आर्थिक मदद करने के मामले में अनियमितता सामने आ रही है। सर्टिफिकेट प्राप्त अभ्यर्थी को बिना शर्त पूरी किए आठ हजार रुपये महीने देने और सेंटर पर कमियां मिलने के बावजूद बराबर सरकारी धन दिया जा रहा है। कुछ सेंटरों पर निशुल्क प्रशिक्षण नियम के विपरीत रुपये भी लिए जाने के मामले सामने आए हैं। ऐसी अनियमितता मिलने पर जिलाधिकारी दीपक रावत ने जनपद में चल रहे कौशल विकास केंद्रों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। डीएम ने बताया कि जांच सीडीओ विनीत तोमर को सौंपी गई है। जांच में कमियां और सरकारी धन को बंदरबांट करने के मामले पाए जाने पर सेंटर संचालक से वसूली करने के साथ कानूनी कार्रवाई भी कराई जाएगी।
विज्ञापन