{"_id":"68fbc06c290006d8540f491f","slug":"30-bed-hospital-not-a-single-patient-is-admitted-haridwar-news-c-35-1-sdrn1003-139870-2025-10-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Haridwar News: 30 बेड का अस्पताल, मरीज एक नहीं होता भर्ती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Haridwar News: 30 बेड का अस्पताल, मरीज एक नहीं होता भर्ती
विज्ञापन
शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र। संवाद।
उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में करीब 17 करोड़ रुपये की लागत से बना 30 बेड का शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) डेढ़ साल से अधिक समय से संचालित तो हो रहा है लेकिन गंभीर मरीजों के लिए यह अनुपयोगी साबित हो रहा है। स्थिति यह है कि अस्पताल में एक भी मरीज भर्ती नहीं किया जाता है और केवल बुखार या जुकाम जैसी सामान्य बीमारियों का उपचार ही किया जा रहा है।
इस अस्पताल का वर्चुअल लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 फरवरी 2024 को किया था और 26 फरवरी 2024 से स्वास्थ्य सेवाएं शुरू हुई थीं। इस अस्पताल के शुरू होने से उत्तरी हरिद्वार की जनता को उम्मीद थी कि अब उन्हें उपचार के लिए हरकी पैड़ी के व्यस्त बाजार को पार कर जिला अस्पताल या मेला अस्पताल की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। दरअसल इमरजेंसी की स्थिति में मरीजों को इन दूर के अस्पतालों में ले जाना बेहद कठिन होता था जिसके कारण सालों से यहां सरकारी अस्पताल की मांग उठ रही थी।
अस्पताल भवन पर लगभग 9.87 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं और संसाधनों के लिए करीब 7 करोड़ रुपये आवंटित हुए थे जिसमें 30 भर्ती बेड की व्यवस्था का बजट भी शामिल था। मगर सरकारी अस्पताल बनने के बावजूद इसमें मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था शुरू नहीं की गई है। गंभीर रूप से बीमार होने पर मरीजों को आज भी भर्ती होकर उपचार कराने के लिए मेला या जिला अस्पताल ही जाना पड़ रहा है। क्षेत्र के लोगों ने तत्काल अस्पताल में भर्ती वार्ड बनाए जाने की मांग की है। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
इस अस्पताल का वर्चुअल लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 फरवरी 2024 को किया था और 26 फरवरी 2024 से स्वास्थ्य सेवाएं शुरू हुई थीं। इस अस्पताल के शुरू होने से उत्तरी हरिद्वार की जनता को उम्मीद थी कि अब उन्हें उपचार के लिए हरकी पैड़ी के व्यस्त बाजार को पार कर जिला अस्पताल या मेला अस्पताल की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। दरअसल इमरजेंसी की स्थिति में मरीजों को इन दूर के अस्पतालों में ले जाना बेहद कठिन होता था जिसके कारण सालों से यहां सरकारी अस्पताल की मांग उठ रही थी।
विज्ञापन
अस्पताल भवन पर लगभग 9.87 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं और संसाधनों के लिए करीब 7 करोड़ रुपये आवंटित हुए थे जिसमें 30 भर्ती बेड की व्यवस्था का बजट भी शामिल था। मगर सरकारी अस्पताल बनने के बावजूद इसमें मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था शुरू नहीं की गई है। गंभीर रूप से बीमार होने पर मरीजों को आज भी भर्ती होकर उपचार कराने के लिए मेला या जिला अस्पताल ही जाना पड़ रहा है। क्षेत्र के लोगों ने तत्काल अस्पताल में भर्ती वार्ड बनाए जाने की मांग की है। संवाद
विज्ञापन