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अवधूत मंडल आश्रम पर सिटी मजिस्ट्रेट का आदेश बरकरार
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम के प्रबंधन को लेकर चले आ रहे विवाद पर जिला जज ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा है। सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले को स्वामी रामदेव और विजय मलिक ने याचिका डालकर जिला कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका खारिज होने के बाद फैसले के अनुसार अब आश्रम का संचालन स्वामी हंस प्रकाश के शिष्य रूपेंद्र के हाथ में ही रहेगा।
शहर के बने बेशकीमती प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा था। आश्रम के संचालन को लेकर विजय मलिक, स्वामी रामदेव एवं स्वामी रूपेंद्र के विवाद हुआ था। तब पुलिस ने संपत्ति के विवादित होने पर उसे कुर्क करने की रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी थी। जिला प्रशासन ने संपत्ति कुर्क कर उस पर रिसीवर की तैनाती कर दी थी। इसके बाद तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट ने गद्दी परंपरा को सही मानते हुए स्वामी हंस प्रकाश के शिष्य रूपेंद्र के पक्ष में फैसला सुनाया था। उन्होंने ट्रस्ट द्वारा आश्रम का संचालन करने के दूसरे पक्ष के दावे को खारिज कर दिया था।
सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले के खिलाफ दूसरे पक्ष के विजय मलिक और स्वामी रामदेव ने जिला जज की अदालत में याचिका दाखिल की थी। जिला जज विवेक भारती शर्मा ने याचिका को खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को सही माना है। आश्रम का संचालन कर रहे स्वामी रूपेंद्र के अधिवक्ता केएल गुप्ता ने बताया कि जिला जज ने याचिका खारिज कर दी है। सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले को बरकरार रखते हुए अब आश्रम की संपत्ति पर स्वामी रूपेंद्र ही शिष्य परंपरा के तहत काबिज चले आ रहे हैं।
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प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम के प्रबंधन को लेकर चले आ रहे विवाद पर जिला जज ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा है। सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले को स्वामी रामदेव और विजय मलिक ने याचिका डालकर जिला कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका खारिज होने के बाद फैसले के अनुसार अब आश्रम का संचालन स्वामी हंस प्रकाश के शिष्य रूपेंद्र के हाथ में ही रहेगा।
शहर के बने बेशकीमती प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा था। आश्रम के संचालन को लेकर विजय मलिक, स्वामी रामदेव एवं स्वामी रूपेंद्र के विवाद हुआ था। तब पुलिस ने संपत्ति के विवादित होने पर उसे कुर्क करने की रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी थी। जिला प्रशासन ने संपत्ति कुर्क कर उस पर रिसीवर की तैनाती कर दी थी। इसके बाद तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट ने गद्दी परंपरा को सही मानते हुए स्वामी हंस प्रकाश के शिष्य रूपेंद्र के पक्ष में फैसला सुनाया था। उन्होंने ट्रस्ट द्वारा आश्रम का संचालन करने के दूसरे पक्ष के दावे को खारिज कर दिया था।
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सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले के खिलाफ दूसरे पक्ष के विजय मलिक और स्वामी रामदेव ने जिला जज की अदालत में याचिका दाखिल की थी। जिला जज विवेक भारती शर्मा ने याचिका को खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को सही माना है। आश्रम का संचालन कर रहे स्वामी रूपेंद्र के अधिवक्ता केएल गुप्ता ने बताया कि जिला जज ने याचिका खारिज कर दी है। सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले को बरकरार रखते हुए अब आश्रम की संपत्ति पर स्वामी रूपेंद्र ही शिष्य परंपरा के तहत काबिज चले आ रहे हैं।
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