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घोटाले की जांच को लेकर पुलिस के छूट रहे पसीने
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घोटाला
- फोटो : amar ujala
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
वीरचंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना में हुए घोटाले की जांच कर रही हरिद्वार पुलिस के पसीने छूट रहे हैं। क्येांकि, मुकदमे में घिरे कई पूर्व जिलाधिकारी शासन में बड़े पद पर तैनात हैं। ऐसे में पुलिस को सूझ ही नहीं रहा है कि भला विवेचना की शुरुआत कैसे की जाए। लिहाजा, सिडकुल पुलिस की निगाहें एसएसपी जन्मेजय प्रभाकर खंडूड़ी की तरफ है।
हरिद्वार की एक अदालत के आदेश पर दर्ज हुए वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार पर्यटन योजना के मुकदमे में सात साल तक जिलाधिकारी रहे आईएएस अफसर आरोपित हैं। सात साल तक जिले में तैनात रहे आईएएस अधिकारियों में कई अफसर प्रदेश में बड़े पदों पर आसीन हैं। ऐसे में इन अधिकारियों से पुलिस बयान लेने की भी हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। यही नहीं जिलाधिकारी के अलावा मुख्य विकास अधिकारी रहे आईएएस भी सचिवालय में तैनात हैं। ऐसे में आईएएस अधिकारियों की लंबी सूची इस घोटाले में सामने आ रही है। अब घोटाले की जांच के लिए हरिद्वार पुलिस के पसीने छूट रहे हैं। कोर्ट के आदेश पर पुलिस को मुकदमा दर्ज करना ही पड़ा लेकिन अब जांच को लेकर पुलिस असमंजस में है। सिडकुल पुलिस भी कोई कदम नहीं उठा रही है, उनका पूरा फोकस उच्चाधिकारियों का निर्देश मिलने का है।
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वीरचंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना में हुए घोटाले की जांच कर रही हरिद्वार पुलिस के पसीने छूट रहे हैं। क्येांकि, मुकदमे में घिरे कई पूर्व जिलाधिकारी शासन में बड़े पद पर तैनात हैं। ऐसे में पुलिस को सूझ ही नहीं रहा है कि भला विवेचना की शुरुआत कैसे की जाए। लिहाजा, सिडकुल पुलिस की निगाहें एसएसपी जन्मेजय प्रभाकर खंडूड़ी की तरफ है।
हरिद्वार की एक अदालत के आदेश पर दर्ज हुए वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार पर्यटन योजना के मुकदमे में सात साल तक जिलाधिकारी रहे आईएएस अफसर आरोपित हैं। सात साल तक जिले में तैनात रहे आईएएस अधिकारियों में कई अफसर प्रदेश में बड़े पदों पर आसीन हैं। ऐसे में इन अधिकारियों से पुलिस बयान लेने की भी हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। यही नहीं जिलाधिकारी के अलावा मुख्य विकास अधिकारी रहे आईएएस भी सचिवालय में तैनात हैं। ऐसे में आईएएस अधिकारियों की लंबी सूची इस घोटाले में सामने आ रही है। अब घोटाले की जांच के लिए हरिद्वार पुलिस के पसीने छूट रहे हैं। कोर्ट के आदेश पर पुलिस को मुकदमा दर्ज करना ही पड़ा लेकिन अब जांच को लेकर पुलिस असमंजस में है। सिडकुल पुलिस भी कोई कदम नहीं उठा रही है, उनका पूरा फोकस उच्चाधिकारियों का निर्देश मिलने का है।
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