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चुनाव का बिगुल बजते ही आई मलिन बस्तियों की याद

Wed, 17 Oct 2018 12:08 AM IST
Updated Wed, 17 Oct 2018 12:08 AM IST
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चुनाव का बिगुल बजते ही आई मलिन बस्तियों की याद

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हरिद्वार। निकाय चुनाव का बिगुल बजते ही नगर निगम प्रशासन को मलिन बस्तियों की याद आ गई है। बस्तियों में करारोपण के फार्म बांटने का काम फिर से शुरू कर दिया है। बस्तियों में नगर निगम प्रशासन की यह सक्रियता चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि जिन बस्तियों में सालभर पहले जिन बस्तियों में फार्म बांटे गए थे, उन पर करारोपण अभी तक नहीं हुआ है।
नगर निगम का कर एवं राजस्व विभाग के कर एवं राजस्व अधीक्षक व कर निरीक्षक ऐसी बस्तियों में भी फार्म बांट रहे हैं जो अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत चिह्नित हैं। कई बस्तियां उत्तर प्रदेश के स्वामित्व वाली नहर किनारे की भूमि पर हैं। इन बस्तियों को हटाने के लिए उत्तरी खंड गंगनहर रुड़की, सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश के अधिशासी अभियंता ने एसएसपी हरिद्वार से पुलिस फोर्स उपलब्ध कराने के लिए विभागीय पत्र भेज हुआ है। हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में उत्तरी खंड गंगनहर के अधिकारियों ने नहर पटरी की भूमि से अवैध बस्तियों को हटाने की सूची जिलाधिकारी को भी भेज हुई है। हरीश रावत सरकार के समय नगर निगम ने 47 बस्तियों को चिह्नित किया था। इनमें श्रेणी एक में 20 बस्तियां निजी भूमि और 12 सरकारी भूमि हैं, जिनका विनियमितीकरण किया जाना था। 15 बस्तियां श्रेणी तीन की है जिन्हें हटाकर विस्थापित किया जाना है। टिबड़ी क्षेत्र में भभूतावाला बाग की जहां आलीशान कोठियां हैं उनमें भी मलिन बस्ती के करारोपण के फार्म बंटवाने की कोशिश की जा रही है। ब्रह्मपुरी और भीमगोडा जहां शहर के धनाढ्यों के बहुमंजिले भवन हैं उन्हें मलिन बस्ती में चिन्हित कर रखा है। इन क्षेत्रों के लोग मलिन बस्ती का फार्म लेने में ही शरमा रहे हैं।
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फार्म में मलबा चार्ज लिखा होने पर हुआ था विवाद
हरिद्वार। प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद नगर निगम बोर्ड ने बस्तियों में करारोपण का प्रस्ताव पारित किया था। बस्तियों के लोगों की यह मांग नगर पालिका के समय से थी। बोर्ड के प्रस्ताव के अनुपालन में तत्कालीन नगर आयुक्त नितिन सिंह भदौरिया ने करारोपण के स्थान पर मलबा चार्ज लिखा था। जब यह फार्म मेयर मनोज गर्ग ने बस्तियों में बंटवाना शुरू किया तो राजनीतिक हंगामा शुरू हो गया। बस्तियों के लोग भी भौच्चके रह गए थे। कांग्रेस के पार्षदों ने यह कहते हुए विरोध किया कि उनकी सरकार ने बस्तियों को विनियमित करने का शासनादेश जारी कर दिया है। इसलिए बस्तियों को मलबा बताने के बजाए उन्हें विनियमित करने की कार्रवाई की जाए। इसी विरोधाभाष में काम अधर में लटक गया। बस्तियों को न विनियमित किया गया और न मलबा चार्ज ही लिया गया। लेकिन अब अचानक नगर निगम के अधिकारी बस्तियों में मंडराने लगे हैं।
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करारोपण मालिकाना अधिकार नहीं है
मलिन बस्तियों पर करारोपण का मतलब मालिकाना अधिकार नहीं है। यह करारोपण भी नहीं है यूटीलिटी चार्ज है। ट्रेन आई रुकी उसको जो सुविधा दी गई उसका यूटीलिटी चार्ज लिया गया। इसी प्रकार बस्तियों में रहने वालों को नगर निगम जो सुविधाएं देता है उसके बदले यूटीलिटी चार्ज लिया जाएगा। भभूतावाला बाग में मलिन बस्ती के फार्म नहीं बांटे जाएंगे इसका निर्देश कर एवं राजस्व अधीक्षक को दे दिया गया है। यूपी के स्वामित्व वाली भूमि की बस्तियों को हटाने में नगर निगम की कार्रवाई बाधक नहीं है।
- डा. ललित नारायण मिश्रा नगर आयुक्त
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