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बच्चों से नही छीना जाना चाहिए उनका बचपन- कैलाश सत्याथी
Updated Sat, 10 Mar 2018 12:05 AM IST
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हरिद्वार।
नेाबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा है कि बच्चों से उनका बचपन नही छीना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चे मां की एक विशेष मूरत हैं और इनके बचपन का खास ख्याल रखा जाना चाहिए। बच्चों को उनके बचपन में ही जीने देना चाहिए। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि तेजी से बदलते दौर में हम बच्चों का बचपन छीन रहे हैं।
उत्तराखंड बाल संरक्षण आयोग की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने हरिद्वार पहुंचे नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी सरकार की ओर से संचालित बाल गृह पहुंचे। यहां उन्होंने साल 2016 में बिहार के कटिहार जिले से लापता बच्चे सोनू उर्फ सैनू को उसके पिता सगीर से मिलवाया। सोनू लापता होने के बाद से ही जून 2016 से ही बाल संरक्षण गृह में था। चाइल्ड वेलफेयर कमीशन (सीडब्ल्यूसी) हरिद्वार के आदेश पर सोनू को कैलाश सत्यार्थी के साथ आए उसके पिता सगीर के सुपुर्द किया गया। इस दौरान नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी बालगृह के बच्चों से भी रूबरू हुए। उनकी समस्याएं सुनी। इस मौके पर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व डा. ललित नारायण मिश्रा, बालगृह अधीक्षक विजय दीक्षित आदि मौजूद थे।
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कलेजे के टुकड़े को देख छलके आंसू
दो साल से बिछुड़े बेटे सोनू को सामने पाकर पिता सगीर की आंखों से आंसू आ गए। पिता सगीर ने बताया कि उसने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी। सोशल मीडिया पर तस्वीरें आने के बाद उसकी पहचान हुई। अपर जिलाधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने बताया कि सोनू अपने माता-पिता का नाम और पते की जानकारी नही दे पा रहा था जिससे दिक्कतें आ रही थी। बच्चे को कई बार लखनऊ व दिल्ली ले जाया गया था। लेकिन सफलता नही मिल पाई।
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नेाबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा है कि बच्चों से उनका बचपन नही छीना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चे मां की एक विशेष मूरत हैं और इनके बचपन का खास ख्याल रखा जाना चाहिए। बच्चों को उनके बचपन में ही जीने देना चाहिए। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि तेजी से बदलते दौर में हम बच्चों का बचपन छीन रहे हैं।
उत्तराखंड बाल संरक्षण आयोग की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने हरिद्वार पहुंचे नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी सरकार की ओर से संचालित बाल गृह पहुंचे। यहां उन्होंने साल 2016 में बिहार के कटिहार जिले से लापता बच्चे सोनू उर्फ सैनू को उसके पिता सगीर से मिलवाया। सोनू लापता होने के बाद से ही जून 2016 से ही बाल संरक्षण गृह में था। चाइल्ड वेलफेयर कमीशन (सीडब्ल्यूसी) हरिद्वार के आदेश पर सोनू को कैलाश सत्यार्थी के साथ आए उसके पिता सगीर के सुपुर्द किया गया। इस दौरान नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी बालगृह के बच्चों से भी रूबरू हुए। उनकी समस्याएं सुनी। इस मौके पर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व डा. ललित नारायण मिश्रा, बालगृह अधीक्षक विजय दीक्षित आदि मौजूद थे।
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कलेजे के टुकड़े को देख छलके आंसू
दो साल से बिछुड़े बेटे सोनू को सामने पाकर पिता सगीर की आंखों से आंसू आ गए। पिता सगीर ने बताया कि उसने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी। सोशल मीडिया पर तस्वीरें आने के बाद उसकी पहचान हुई। अपर जिलाधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने बताया कि सोनू अपने माता-पिता का नाम और पते की जानकारी नही दे पा रहा था जिससे दिक्कतें आ रही थी। बच्चे को कई बार लखनऊ व दिल्ली ले जाया गया था। लेकिन सफलता नही मिल पाई।
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