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नरेंद्र गिरि अध्यक्ष तो क्या संन्यासी रहने के भी अधिकारी नहीं

Thu, 10 May 2018 12:24 AM IST
Updated Thu, 10 May 2018 12:24 AM IST
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नरेंद्र गिरि अध्यक्ष तो क्या संन्यासी रहने के भी अधिकारी नहीं
हरिद्वार।
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भूमापीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद तीर्थ अखाड़ा परिषद अध्यक्ष पर जमकर बरसे। एक बयान जारी कर उन्होंने कहा कि परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि अध्यक्ष तो क्या संन्यासी रहने के अधिकारी नहीं हैं। रामानंद पुरी ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाकर सराहनीय कार्य किया है। वहीं मुकदमा दर्ज कराने पर उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के प्रति भी आभार जताया।
स्वामी अच्युतानंद तीर्थ ने कहा कि नरेंद्र गिरि से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वे फर्जी हस्ताक्षरों के माध्यम से संपत्ति हड़प लेंगे। उन्होंने कहा कि वास्तव में अखाड़ा परिषद को कोई वजूद नहीं है। इसका गठन केवल कुंभ मेलों पर किया जाता है। मेले के बाद परिषद समाप्त हो जाती है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र गिरी को पद पर रहने का तो क्या संन्यासी कहलाने का भी कोई अधिकार नहीं। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद का सबसे पहले गठन 1953 के प्रयाग कुंभ में किया गया था। गठन इस लिया हुआ था कि अखाड़ों के स्नान क्रम और अन्य व्यवस्थाओं के बारे में संतों से चर्चा की जा सके। बाद में यह कुंभ स्नान में परंपरा बन गई। अब तो अखाड़ा परिषद कभी भंग ही नहीं होती। उन्होंने कहा कि नरेंद्र गिरि के खिलाफ खिलाफ कई न्यायालयों में आपराधिक मामले चल रहे हैं। उनमें किसी को फर्जी संत कहने की सामर्थ्य ही नहीं। फिर वे किस अधिकार से संतों को फर्जी घोषित कर रहे हैं।
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भूमापीठाधीश्वर ने कहा कि जिन जगद्गुरु शंकराचार्य की परंपरा पर चलने का वे ढोंग कर रहे हैं, उन्होंने तो अखाड़ा परिषद बनाई ही नहीं थी। अखाड़ों में महामंडलेश्वर बनाए गए थे। अब अखाड़े स्वयं ही राजनीति का अखाड़ा बन गए है। जांच को प्रभावित करने के लिए वे अपने पक्ष में बयानबाजी करा रहे हैं।
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छात्र व अखाड़ा हित में हर बलिदान को तैयार
हरिद्वार। निरंजनी अखाड़े के महंत रविंद्र पुरी ने महंत रामानंद पुरी के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि इंस्टीट्यूट, छात्र हित और अखाड़े के हित में वह किसी भी बलिदान को तैयार हैं। एक बयान में महंत रविंद्र पुरी महाराज ने महंत रामानंदपुरी पर रामानंद इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष पद पर रहते हुए फर्जीवाड़े के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि साजिश के महत बैंकों से सांठगांठ कर पूर्व में भी संस्था को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। ऐसे में अखाड़े के संतों का आदेश मानकर इंस्टीट्यूट की कमान न संभालते तो इंस्टीट्यूट में पढ़ने वाले हजारों छात्रों का भविष्य भी अधर में लटक जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि रामानंद पुरी और उनको अपने चंगुल में फंसाने वाले लोगों ने पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए ही महंत रामानंद पुरी ने श्रीमहंत नरेंद्र गिरी और उनके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि हम सभी चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो। जिससे इंस्टीट्यूट और अखाड़े को नुकसान पहुंचाने वालों पर कार्रवाई हो सके।

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पुलिस ने इंस्टीट्यूट पहुंचकर की जांच
हरिद्वार। ज्वालापुर पुलिस ने बुधवार को रामानंद इंस्टीट्यूट में जाकर मामले की जांच की। इस दौरान जांच अधिकारी एसएसआई संजीव थपलियाल ने महंत रविंद्र पुरी समेत कई अन्य से घटनाक्रम की जानकारी ली। रामानंद इंस्टीट्यूट को लेकर निरंजनी अखाड़े के संतों के बीच विवाद चल रहा है। दोनों पक्षों की ओर से मुकदमे एक दूसरे के खिलाफ दर्ज कराए गए हैं।
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