{"_id":"5af327b54f1c1b3b0b8b8f2d","slug":"171525884853-haridwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार के भरोसे बच्चों को किताब न वेशभूषा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकार के भरोसे बच्चों को किताब न वेशभूषा
Updated Wed, 09 May 2018 10:24 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
सरकार के भरोसे बच्चों को किताब और वेशभूषा नहीं मिल सकी है। बाजार से किताबें खरीद कर लाने वाले बच्चों को आश्वासन के अनुरूप नगद भुगतान की कोई प्रक्रिया नहीं हो पा रही है।
कक्षा आठ तक के सभी सरकारी और वित्तीय मान्यता स्कूलों में सरकार की ओर से निशुल्क किताबें उपलब्ध कराई जाती है। इसके साथ ही बालिकाओं और एससी- एसटी के सभी विद्यार्थियों को निशुल्क ड्रेस भी दी जाती है। सरकार की ओर से पुस्तकें खरीदने के लिए नया प्रावधान लागू कर दिया गया। इसके तहत अपने स्तर से पुस्तकें खरीदने की रसीद जमा करने पर विभाग ने भुगतान करने की बात कही थी। कुछ अभिभावकों ने अपने बच्चों की किताबें खरीदी। शिक्षकों ने बताया कि सभी छात्रों के पास किताबें नहीं होने से अध्यापन में दिक्कतें आ रही हैं। जिन बच्चों ने पुस्तकें खरीदकर रसीद स्कूल में जमा करा दी, उन्हें भी अब तक भुगतान नहीं हुआ है। स्कूलों में छात्र-छात्राओं को ड्रेस भी वितरित नहीं हो सकी है।
विज्ञापन
खाते में मिलेंगी किताबों की की कीमत
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने किताबें खरीदवाते समय कहा था कि उन्हें बाद में पुस्तक की कीमत नगद दी जाएगी। अब शिक्षा विभाग के नए निर्देश हैं कि बच्चों के बैंक खाते में ही किताबों की कीमत का भुगतान किया जाएगा। कुछ अभिभावकों का कहना है कि खाते खुलवाने के लिए एक हजार रुपये चाहिए, जबकि किताबों के बदले में मात्र तीन सौ या चार सौ रुपये तक आएंगे।
विज्ञापन