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महिला की हत्या में दंपति को आजीवन कारावास
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ब्यूरो/अमर उजाला, रोशनाबाद
रंजिश के चलते महिला पर मिट्टी का तेल डालकर जलाकर हत्या करने के मामले में पति पत्नी को दोषी पाते हुए अपर सत्र न्यायाधीश सहदेव सिंह ने कठोर आजीवन कारावास और एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। न्यायालय ने तीसरे आरोपी जितेंद्र को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।
शासकीय अधिवक्ता कुशलपाल सिंह चौहान ने बताया कि छह सितंबर 2007 की रात को राजीव नगर कॉलोनी, हरिद्वार निवासी पम्मी पत्नी कल्लू ने हरिद्वार कोतवाली में तहरीर दी थी, जिसमें उसने बताया था कि रात करीब 10 बजे वह अपन बेटे विक्की और पुत्रवधू कविता के साथ घर पर थी। आरोप था कि उसके पड़ोसी धारा और उसकी पत्नी ममता, प्रदीप और जितेंद्र ने पुरानी रंजिश को लेकर मारपीट और गाली-गलौज करना शुरू कर दिया था। तभी वहां पर उसका बेटा विक्की और पुत्र वधू कविता बचाने आए तो अचानक दारा ने प्लास्टिक की कैन में से मिट्टी का तेल कविता के ऊपर डाल कर ममता के साथ मिलकर दोनों ने आग लगा दी थी। कविता पूरी तरह झुलस गई थी। कविता को जौलीग्रांट देहरादून से सफदरगंज अस्पताल दिल्ली ले जाया गया था। इधर, पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी थी। अधिक झुलसने के कारण कविता की सफदरगंज दिल्ली अस्पताल में मृत्यु हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने दारा उसकी पत्नी ममता, जितेंद्र और प्रदीप पुत्र ओमप्रकाश के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया था। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी प्रदीप की मृत्यु हो जाने पर उसके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी। मुकदमे में अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाहों के बयान कराए गए। दोनों पक्षों को सुनने और साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी दारा पुत्र चुन्नीलाल उसकी पत्नी ममता निवासी राजीव नगर कॉलोनी बाल्मिकी बस्ती हरिद्वार को दोषी पाते हुए कठोर आजीवन कारावास और एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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रंजिश के चलते महिला पर मिट्टी का तेल डालकर जलाकर हत्या करने के मामले में पति पत्नी को दोषी पाते हुए अपर सत्र न्यायाधीश सहदेव सिंह ने कठोर आजीवन कारावास और एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। न्यायालय ने तीसरे आरोपी जितेंद्र को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।
शासकीय अधिवक्ता कुशलपाल सिंह चौहान ने बताया कि छह सितंबर 2007 की रात को राजीव नगर कॉलोनी, हरिद्वार निवासी पम्मी पत्नी कल्लू ने हरिद्वार कोतवाली में तहरीर दी थी, जिसमें उसने बताया था कि रात करीब 10 बजे वह अपन बेटे विक्की और पुत्रवधू कविता के साथ घर पर थी। आरोप था कि उसके पड़ोसी धारा और उसकी पत्नी ममता, प्रदीप और जितेंद्र ने पुरानी रंजिश को लेकर मारपीट और गाली-गलौज करना शुरू कर दिया था। तभी वहां पर उसका बेटा विक्की और पुत्र वधू कविता बचाने आए तो अचानक दारा ने प्लास्टिक की कैन में से मिट्टी का तेल कविता के ऊपर डाल कर ममता के साथ मिलकर दोनों ने आग लगा दी थी। कविता पूरी तरह झुलस गई थी। कविता को जौलीग्रांट देहरादून से सफदरगंज अस्पताल दिल्ली ले जाया गया था। इधर, पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी थी। अधिक झुलसने के कारण कविता की सफदरगंज दिल्ली अस्पताल में मृत्यु हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने दारा उसकी पत्नी ममता, जितेंद्र और प्रदीप पुत्र ओमप्रकाश के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया था। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी प्रदीप की मृत्यु हो जाने पर उसके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी। मुकदमे में अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाहों के बयान कराए गए। दोनों पक्षों को सुनने और साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी दारा पुत्र चुन्नीलाल उसकी पत्नी ममता निवासी राजीव नगर कॉलोनी बाल्मिकी बस्ती हरिद्वार को दोषी पाते हुए कठोर आजीवन कारावास और एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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