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खैर के 36 पेड़ों पर चली आरी
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ब्यूरो/अमर उजाला, श्यामपुर
हरिद्वार वन प्रभाग के जंगलों में अवैध रूप से पेड़ों का कटान थमने का नाम नहीं ले रहा है। चिड़ियापुर रेंज के कोटावाली कंपार्टमेंट नंबर आठ में वन तस्करों ने खैर के 36 पेड़ों पर आरी चला दी।
23 मार्च को वन विभाग को कोटावाली में बड़ी संख्या में अवैध रूप से पेड़ काटे जाने की सूचना मिली। आनन फानन में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो खिैर के 36 पेड़ कटे मिले। टीम ने सभी पेड़ों को मौके से ही बरामद कर रेंज कार्यालय में रखवा लिया। हालांकि अभी तक कोई भी वन तस्कर वन प्रभाग के हाथ नहीं लगा है। क्षेत्राधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि तस्करों को पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है।
पहले भी काटे जा चुके हैं कई पेड़
वर्ष 2017 में श्यामपुर क्षेत्र में कई खैर के पेड़ काटे गए थे। फरवरी 2018 में चिड़ियापुर रेंज में ही खैर के 6 पेड़ काटे गए थे। वन विभाग की टीम के पहुंचने से पहले ही तस्कर फरार हो गए थे। बीते वर्ष ही नौ जुलाई को खानपुर में वन विभाग की जमीन पर खैर के 18 पेड़ कटे मिले थे। बीते वर्ष ही पथरी में भी पेड़ काटने का मामला सामने आया था। बीते वर्ष ही 10 सितंबर को चंडीपुल के समीप उत्तराखंड सिंचाई विभाग की जमीन से खैर के 15 पेड़ों पर अवैध रूप से आरी चला दी गई थी।
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हरिद्वार वन प्रभाग के जंगलों में अवैध रूप से पेड़ों का कटान थमने का नाम नहीं ले रहा है। चिड़ियापुर रेंज के कोटावाली कंपार्टमेंट नंबर आठ में वन तस्करों ने खैर के 36 पेड़ों पर आरी चला दी।
23 मार्च को वन विभाग को कोटावाली में बड़ी संख्या में अवैध रूप से पेड़ काटे जाने की सूचना मिली। आनन फानन में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो खिैर के 36 पेड़ कटे मिले। टीम ने सभी पेड़ों को मौके से ही बरामद कर रेंज कार्यालय में रखवा लिया। हालांकि अभी तक कोई भी वन तस्कर वन प्रभाग के हाथ नहीं लगा है। क्षेत्राधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि तस्करों को पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है।
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पहले भी काटे जा चुके हैं कई पेड़
वर्ष 2017 में श्यामपुर क्षेत्र में कई खैर के पेड़ काटे गए थे। फरवरी 2018 में चिड़ियापुर रेंज में ही खैर के 6 पेड़ काटे गए थे। वन विभाग की टीम के पहुंचने से पहले ही तस्कर फरार हो गए थे। बीते वर्ष ही नौ जुलाई को खानपुर में वन विभाग की जमीन पर खैर के 18 पेड़ कटे मिले थे। बीते वर्ष ही पथरी में भी पेड़ काटने का मामला सामने आया था। बीते वर्ष ही 10 सितंबर को चंडीपुल के समीप उत्तराखंड सिंचाई विभाग की जमीन से खैर के 15 पेड़ों पर अवैध रूप से आरी चला दी गई थी।
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