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भारतीय चिंतन धारा विश्व में सर्वश्रेष्ठ: गोविंदाचार्य
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
चिंतक और विचारक गोविंदाचार्य ने कहा कि भारतीय चिंतन की धारा विश्व में सर्वश्रेष्ठ है। कई कारणों से कुछ लोगों को स्मृति भृृंश हो जाने से वे भूल गए हैं कि देश के पुरखे कौन थे। वास्तव में हिंदुत्व और भारतीयता अलग-अलग नहीं है। इन्हें अलग दिखाने के प्रयासों के कारण देश में विकृतियां व्याप्त हो गई हैं।
गोविंदाचार्य बृहस्पतिवार को को प्रेस क्लब के सभागार में आयोजित संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण और गाय व गंगा देश के लिए जरूरी हैं। इन्हें किसी धर्म विशेष के साथ नहीं जोड़ा जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत को समझने के लिए पुरातन काल अध्ययन करना जरूरी है। उस दौर में भारत इतना समृद्ध था कि विश्व के कारोबार में 26 से 33 प्रतिशत हिस्सा भारत का था।
गोविंदाचार्य ने कहा कि भारत और चीन की संस्कृति सबसे पुरानी है। इन दोनों संस्कृतियों को लूटने का प्रयास किया जाता रहा लेकिन पराक्रम की परीक्षा भारत में हुई, चीन ने तो दीवार बनाकर खुद को युद्ध से रोक लिया। देेश में चुनौतियों की पहचान चाणक्य और शिवाजी ने की। उन्होंने लड़ने की रणनीति पहले तैयार की। अध्यक्षता प्रेस क्लब अध्यक्ष डा. शिवशंकर जायसवाल और संचालन पूर्व अध्यक्ष डा. रजनीकांत शुक्ला व त्रिलोकचंद भट्ट ने किया। कार्यक्रम में पूर्व विधायक अंबरीष कुमार और पत्रकार रुपेश कुमार भी विशिष्ट अतिथि थे। क्लब के महामंत्री ललितेंद्र नाथ, रामेश्वर शर्मा, प्रो. पीएस चौहान, राजकुमार, बृजेंद्र हर्ष अकविक्षित रमन, दीपक नौटियाल, रामचंद्र कन्नौजिया, अमित शर्मा, मेहताब आलम, कुमार दुष्यंत आदि ने अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान गंगा सभा के अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा गांधीवादी, कमला जोशी, विमल कुमार, जेपी बड़ोनी आदि रहे।
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कश्मीर से अनुच्छेद 370 का हटना जरूरी
कश्मीर में लागू अनुच्छेद 370 को हटाना बेहद जरूरी है। इसके कारण कश्मीर में न उद्योग लगे और न रोजगार बढ़े। मानवाधिकार के नाम पर कश्मीर में देशद्रोह का हथकंडा अपनाया जा रहा है। सरकार का दायित्व है कि वह विपक्षी दलों को साथ लेकर देश की समस्याओं का निराकरण करें। जिन समस्याओं के कारण अधिक तनाव पैदा होता है, उन पर तत्काल अंकुश जरूरी है।
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चिंतक और विचारक गोविंदाचार्य ने कहा कि भारतीय चिंतन की धारा विश्व में सर्वश्रेष्ठ है। कई कारणों से कुछ लोगों को स्मृति भृृंश हो जाने से वे भूल गए हैं कि देश के पुरखे कौन थे। वास्तव में हिंदुत्व और भारतीयता अलग-अलग नहीं है। इन्हें अलग दिखाने के प्रयासों के कारण देश में विकृतियां व्याप्त हो गई हैं।
गोविंदाचार्य बृहस्पतिवार को को प्रेस क्लब के सभागार में आयोजित संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण और गाय व गंगा देश के लिए जरूरी हैं। इन्हें किसी धर्म विशेष के साथ नहीं जोड़ा जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत को समझने के लिए पुरातन काल अध्ययन करना जरूरी है। उस दौर में भारत इतना समृद्ध था कि विश्व के कारोबार में 26 से 33 प्रतिशत हिस्सा भारत का था।
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गोविंदाचार्य ने कहा कि भारत और चीन की संस्कृति सबसे पुरानी है। इन दोनों संस्कृतियों को लूटने का प्रयास किया जाता रहा लेकिन पराक्रम की परीक्षा भारत में हुई, चीन ने तो दीवार बनाकर खुद को युद्ध से रोक लिया। देेश में चुनौतियों की पहचान चाणक्य और शिवाजी ने की। उन्होंने लड़ने की रणनीति पहले तैयार की। अध्यक्षता प्रेस क्लब अध्यक्ष डा. शिवशंकर जायसवाल और संचालन पूर्व अध्यक्ष डा. रजनीकांत शुक्ला व त्रिलोकचंद भट्ट ने किया। कार्यक्रम में पूर्व विधायक अंबरीष कुमार और पत्रकार रुपेश कुमार भी विशिष्ट अतिथि थे। क्लब के महामंत्री ललितेंद्र नाथ, रामेश्वर शर्मा, प्रो. पीएस चौहान, राजकुमार, बृजेंद्र हर्ष अकविक्षित रमन, दीपक नौटियाल, रामचंद्र कन्नौजिया, अमित शर्मा, मेहताब आलम, कुमार दुष्यंत आदि ने अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान गंगा सभा के अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा गांधीवादी, कमला जोशी, विमल कुमार, जेपी बड़ोनी आदि रहे।
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कश्मीर से अनुच्छेद 370 का हटना जरूरी
कश्मीर में लागू अनुच्छेद 370 को हटाना बेहद जरूरी है। इसके कारण कश्मीर में न उद्योग लगे और न रोजगार बढ़े। मानवाधिकार के नाम पर कश्मीर में देशद्रोह का हथकंडा अपनाया जा रहा है। सरकार का दायित्व है कि वह विपक्षी दलों को साथ लेकर देश की समस्याओं का निराकरण करें। जिन समस्याओं के कारण अधिक तनाव पैदा होता है, उन पर तत्काल अंकुश जरूरी है।