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राजकीय भूमि से बेदखली के मुकदमों में तारीख पर तारीख लगती है
Updated Thu, 23 Aug 2018 11:05 PM IST
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रतनमणी डोभाल
हरिद्वार। हाईकोर्ट की ओर से पट्टों को निरस्त करने के आदेश के बाद सिंचाई खंड हरिद्वार ने पट्टों, कब्जों की भूमि तथा मुकदमों की धूल झाड़नी शुरू कर दी है। हरिद्वार में पट्टों से अधिक सिंचाई विभाग की भूमि पर अवैध कब्जे हैं। चंडीघाट और बैरागी कैंप कब्जों का गढ़ बन गया है। कोर्ट में भी अवैध कब्जों को लेकर चल रहे वादों पर भी तारीख पर तारीख लगने से उनका निस्तारण नहीं हो पा रहा है। कुछ मामलों में बेदखली का आदेश होने के बाद भी उनका क्रियान्वयन नहीं हुआ है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद दूधियाबंद के 14 तथा चंड़ीघाट के एक पट्टाधारक को बेदखल करने के लिए पीपीएक्ट में नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय में वाद दायर हैं। इन मामलों में लंबे समय से तारीख पर तारीख लगती रहती है। गंगा नदी की सरकारी भूमि बैरागी कैंप में अवैध कब्जों के विरुद्ध बेदखली के 83 वाद 2007 से चल रहे हैं। एसडीएम न्यायालय ने एक ही दिन में सभी के खिलाफ बेदखली के आदेश पारित कर दिए थे। इनमें से 67 लोग यह कहते हुए जिला न्यायालय में गए कि उन्हें सुना नहीं गया है। इस पर कोर्ट ने फिर से उन्हें सुनवाई का मौका देकर वाद निस्तारित करने का आदेश देकर नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय को भेज दिए थे। इन वादों को भी ठंड़े बस्ते में डालकर रखा जा रहा है। इसके साथ ही जिन 16 लोगों ने एसडीएम न्यायालय में पारित बेदखली के आदेश के विरुद्ध अपील नहीं की, उनकी भी बेदखली नहीं हुई है। इससे पहले भी एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने 15 जून को अवैध कब्जों व अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था, जिसके तहत देहरादून में तो कार्रवाई की जा रही है, परंतु हरिद्वार में अब तक कुछ हुआ नहीं है।
बैरागी कैंप की स्थिति विकट
बैरागी कैंप में गंगा नदी की 134 हेक्टेयर राजकीय भूमि कुंभ मेला के लिए आरक्षित है। उसके 30.58 हेक्टेयर भूमि पर अवैध रूप से पक्के आश्रम व मकान खड़े करवा दिए गए हैं। एमडीडीए ने इस क्षेत्र में पूरी तरह से मुंह फेर रखा है। बैरागी कैंप में कई बार भूमाफियाओं का कब्जा छुड़ाने के बाद भी 36 हेक्टेयर के बाग पर फिर से कब्जा हो गया है।
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दूधियाबंद की 12 हेक्टेयर भूमि पर है कब्जा
सिंचाई विभाग की भूपतवाला में दूधियाबंद के प्लाटों पर 17 पट्टेदारों का कब्जा है। इन पट्टेदारों के कब्जे में 12 हेक्टेयर मेला भूमि भी शामिल है। 1986 में पट्टेदारों को सिंचाई विभाग ने बेदखली नोटिस दिए थे। जिसके खिलाफ वह इलाहाबाद हाईकोर्ट से स्टे ले आए थे। अब नैनीताल हाईकोर्ट ने स्टे निरस्त कर सिंचाई विभाग को उन्हें विधि पूर्वक बेदखल करने का आदेश दिया है। इसके बाद ही उन्हें हटाने के लिए पीपीएक्ट में नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय में वाद दाखिल किए गए हैं।
250 पट्टेदार यूपी के जमाने के
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के समय के लगभग 250 पुराने पट्टेदार भी चले आ रहे हैं जिनका उत्तराखंड सिंचाई विभाग को कुछ पता नहीं है। यूपी ने भी रिकार्ड नहीं दिया है।
राजकीय भूमि से कब्जाधारकों व पट्टेधारकों को बेदखल करने के लिए पीपीएक्ट के तहत बैरागी कैंप के 83 वादों में से 16 के खिलाफ बेदखली का आदेश एसडीएम कोर्ट से हो रखा है, परंतु उन्हें हटाने की कार्रवाई नहीं की गई है। मजिस्ट्रेट को ही कब्जा हटाकर सिंचाई विभाग को कब्जा दिलाना था, परंतु कुछ किया नहीं गया है। - एनएस कुंडरा, उप राजस्व अधिकारी सिंचाई खंड हरिद्वार
हरिद्वार। हाईकोर्ट की ओर से पट्टों को निरस्त करने के आदेश के बाद सिंचाई खंड हरिद्वार ने पट्टों, कब्जों की भूमि तथा मुकदमों की धूल झाड़नी शुरू कर दी है। हरिद्वार में पट्टों से अधिक सिंचाई विभाग की भूमि पर अवैध कब्जे हैं। चंडीघाट और बैरागी कैंप कब्जों का गढ़ बन गया है। कोर्ट में भी अवैध कब्जों को लेकर चल रहे वादों पर भी तारीख पर तारीख लगने से उनका निस्तारण नहीं हो पा रहा है। कुछ मामलों में बेदखली का आदेश होने के बाद भी उनका क्रियान्वयन नहीं हुआ है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद दूधियाबंद के 14 तथा चंड़ीघाट के एक पट्टाधारक को बेदखल करने के लिए पीपीएक्ट में नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय में वाद दायर हैं। इन मामलों में लंबे समय से तारीख पर तारीख लगती रहती है। गंगा नदी की सरकारी भूमि बैरागी कैंप में अवैध कब्जों के विरुद्ध बेदखली के 83 वाद 2007 से चल रहे हैं। एसडीएम न्यायालय ने एक ही दिन में सभी के खिलाफ बेदखली के आदेश पारित कर दिए थे। इनमें से 67 लोग यह कहते हुए जिला न्यायालय में गए कि उन्हें सुना नहीं गया है। इस पर कोर्ट ने फिर से उन्हें सुनवाई का मौका देकर वाद निस्तारित करने का आदेश देकर नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय को भेज दिए थे। इन वादों को भी ठंड़े बस्ते में डालकर रखा जा रहा है। इसके साथ ही जिन 16 लोगों ने एसडीएम न्यायालय में पारित बेदखली के आदेश के विरुद्ध अपील नहीं की, उनकी भी बेदखली नहीं हुई है। इससे पहले भी एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने 15 जून को अवैध कब्जों व अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था, जिसके तहत देहरादून में तो कार्रवाई की जा रही है, परंतु हरिद्वार में अब तक कुछ हुआ नहीं है।
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बैरागी कैंप की स्थिति विकट
बैरागी कैंप में गंगा नदी की 134 हेक्टेयर राजकीय भूमि कुंभ मेला के लिए आरक्षित है। उसके 30.58 हेक्टेयर भूमि पर अवैध रूप से पक्के आश्रम व मकान खड़े करवा दिए गए हैं। एमडीडीए ने इस क्षेत्र में पूरी तरह से मुंह फेर रखा है। बैरागी कैंप में कई बार भूमाफियाओं का कब्जा छुड़ाने के बाद भी 36 हेक्टेयर के बाग पर फिर से कब्जा हो गया है।
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दूधियाबंद की 12 हेक्टेयर भूमि पर है कब्जा
सिंचाई विभाग की भूपतवाला में दूधियाबंद के प्लाटों पर 17 पट्टेदारों का कब्जा है। इन पट्टेदारों के कब्जे में 12 हेक्टेयर मेला भूमि भी शामिल है। 1986 में पट्टेदारों को सिंचाई विभाग ने बेदखली नोटिस दिए थे। जिसके खिलाफ वह इलाहाबाद हाईकोर्ट से स्टे ले आए थे। अब नैनीताल हाईकोर्ट ने स्टे निरस्त कर सिंचाई विभाग को उन्हें विधि पूर्वक बेदखल करने का आदेश दिया है। इसके बाद ही उन्हें हटाने के लिए पीपीएक्ट में नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय में वाद दाखिल किए गए हैं।
250 पट्टेदार यूपी के जमाने के
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के समय के लगभग 250 पुराने पट्टेदार भी चले आ रहे हैं जिनका उत्तराखंड सिंचाई विभाग को कुछ पता नहीं है। यूपी ने भी रिकार्ड नहीं दिया है।
राजकीय भूमि से कब्जाधारकों व पट्टेधारकों को बेदखल करने के लिए पीपीएक्ट के तहत बैरागी कैंप के 83 वादों में से 16 के खिलाफ बेदखली का आदेश एसडीएम कोर्ट से हो रखा है, परंतु उन्हें हटाने की कार्रवाई नहीं की गई है। मजिस्ट्रेट को ही कब्जा हटाकर सिंचाई विभाग को कब्जा दिलाना था, परंतु कुछ किया नहीं गया है। - एनएस कुंडरा, उप राजस्व अधिकारी सिंचाई खंड हरिद्वार