{"_id":"5c606bb0bdec2254606a6d75","slug":"131549822896-haridwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सफाई व्यवस्था का प्लान बनाने में बिफल रहे सभी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सफाई व्यवस्था का प्लान बनाने में बिफल रहे सभी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
नगर निगम क्षेत्र में सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बोर्ड और अधिकारी कई बार योजना बनाते हैं लेकिन यह कभी धरातल पर नहीं उतर पाती। सफाई हवलदारों की राजनीति और जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के आगे अधिकारी हमेशा बेबस नजर आते हैं। यही वजह है कि शहर की सफाई व्यवस्था हमेशा जस की तस बनी रहती है।
नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडेय और वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कैलाश गुंज्याल ने भी सफाई को लेकर प्लानिंग की है। जिन नए क्षेत्रों में सफाई कर्मचारी नहीं हैं उनमें भी वर्तमान कर्मचारियों में से ही उनमें एक-एक दो-दो की तैनाती करने का निर्णय लिया गया था। चार दिन के बाद भी नए वार्डों में सफाई कर्मचारी दिखाई नहीं दे रहे हैं। सफाई हवलदारों की अपनी राजनीति होती है और वह पूरे सिस्टम पर भारी पड़ते हैं। पूर्व में नगर आयुक्त नितिन सिंह भदौरिया ने थोड़ी सख्ती दिखाई थी, लेकिन वह भी बहुत बदलाव कराने में वह भी सफल नहीं रहे। इसकी वजह जनप्रतिनिधियों का हस्तक्षेप है। अधिकारी ऐसे भी सफाई कर्मचारियों पर अंकुश लगाने में नाकाम रहे हैं जो ड्यूटी के समय ऑटो रिक्शा, टैक्सी चलाते हैं। कागजों में हरकी पैड़ी क्षेत्र में तीन शिफ्टों में सफाई की व्यवस्था है, लेकिन कर्मचारियों का पता नहीं है। वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कैलाश गुंज्याल ने बताया सिस्टम को ढर्रे पर लाने का प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन
नगर निगम क्षेत्र में सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बोर्ड और अधिकारी कई बार योजना बनाते हैं लेकिन यह कभी धरातल पर नहीं उतर पाती। सफाई हवलदारों की राजनीति और जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के आगे अधिकारी हमेशा बेबस नजर आते हैं। यही वजह है कि शहर की सफाई व्यवस्था हमेशा जस की तस बनी रहती है।
नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडेय और वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कैलाश गुंज्याल ने भी सफाई को लेकर प्लानिंग की है। जिन नए क्षेत्रों में सफाई कर्मचारी नहीं हैं उनमें भी वर्तमान कर्मचारियों में से ही उनमें एक-एक दो-दो की तैनाती करने का निर्णय लिया गया था। चार दिन के बाद भी नए वार्डों में सफाई कर्मचारी दिखाई नहीं दे रहे हैं। सफाई हवलदारों की अपनी राजनीति होती है और वह पूरे सिस्टम पर भारी पड़ते हैं। पूर्व में नगर आयुक्त नितिन सिंह भदौरिया ने थोड़ी सख्ती दिखाई थी, लेकिन वह भी बहुत बदलाव कराने में वह भी सफल नहीं रहे। इसकी वजह जनप्रतिनिधियों का हस्तक्षेप है। अधिकारी ऐसे भी सफाई कर्मचारियों पर अंकुश लगाने में नाकाम रहे हैं जो ड्यूटी के समय ऑटो रिक्शा, टैक्सी चलाते हैं। कागजों में हरकी पैड़ी क्षेत्र में तीन शिफ्टों में सफाई की व्यवस्था है, लेकिन कर्मचारियों का पता नहीं है। वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कैलाश गुंज्याल ने बताया सिस्टम को ढर्रे पर लाने का प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन