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संतों ने कुंभ की तैयारी और बदनाम करने की साजिशों से दूर रहने को किया आह्वान
Updated Thu, 26 Apr 2018 10:20 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
भूपतवाला स्थित नृसिंह धाम पीठ में स्वामी राजेंद्र दास महाराज के महंताई चादर समारोह में प्रयाग में 2019 में होने वाले अर्द्धकुंभ और हरिद्वार में 2021 के कुंभ की तैयारियों को लेकर संतों ने विचार विमर्श किया। उन्होंने दोनों आयोजनों को मिलजुलकर सफल बनाने को आह्वान किया। साथ ही देश में साधु- संतों को बदनाम करने की साजिशों से दूर रहने को कहा।
बृहस्पतिवार को भूपतवाला में आयोजित चादर समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे साधु-संतों ने नृसिंह धाम पीठ के नवनियुक्त महंत स्वामी राजेंद्रदास महाराज को महंताई की चादर ओढ़ाई। टीला गद्दाचार्य मंगल पीठाधीश्वर स्वामी माधवाचार्य महाराज ने कहा कि संतों का जीवन निर्मल जल के समान होता है। संत भक्तों को ज्ञान की प्रेरणा देकर उन्हें सत्य के मार्ग पर अग्रसर कर उनके कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। जो भक्त गंगा तट पर गुरु गद्दी के सानिध्य में संतों की वाणी को आत्मसात कर लेता है, उसका जीवन सफल हो जाता है। नृसिंह धाम पीठ के परमाध्यक्ष जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी अयोध्याचार्य महाराज ने कहा कि गुरु शिष्य परंपरा का सनातन संस्कृति में विशेष महत्व है। सनातन संस्कृति व संत परंपरा के अनुरूप ही उन्होंने स्वामी राजेंद्र दास महाराज को उत्तरदायित्व सौंपा है। नवनियुक्त महंत स्वामी राजेंद्र दास महाराज ने सभी संत महापुरुषों का आभार जताया। जगन्नाथ मंदिर गुजरात से पधारे स्वामी दिलीपदास व स्वामी रविंद्रदास महाराज ने कहा कि धर्मनगरी हरिद्वार ऋषि मुनियों की तपस्थली है। यहां मे महान संतों की तपस्या से ही संपूर्ण विश्व में सनातन धर्म की पताका फहरा रही है।
दक्षिण काली पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज और जयराम पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने नवनियुक्त महंत स्वामी राजेंद्रदास महाराज के उज्जवल भविष्य की कामना की।
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इस अवसर पर महामंडलेश्वर डा. स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री, महामंडलेश्वर स्वामी फूलडोल दास, स्वामी मोहनदास, स्वामी ऋषिश्वरानंद, स्वामी रामेश्वरदास, महंत दुर्गादास, बाबा हठयोगी, स्वामी रघुवीर दास, स्वामी विष्णुदास, महंत मोहनदास रामायणी, स्वामी पटवारी महाराज, महंत रामकिशन दास, स्वामी ब्रजमोहन दास, स्वामी सीताराम दास, साध्वी वैष्णवी जयश्री, साध्वी विजय लक्ष्मी, स्वामी चंद्रमा दास, स्वामी जगदीश दास, स्वामी चिदविलासानंद, महंत मोहनसिंह, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी जगदीशानंद गिरि, स्वामी महावीर दास, स्वामी शिवशंकर दास आदि संतजन प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
हरिद्वार।
भूपतवाला स्थित नृसिंह धाम पीठ में स्वामी राजेंद्र दास महाराज के महंताई चादर समारोह में प्रयाग में 2019 में होने वाले अर्द्धकुंभ और हरिद्वार में 2021 के कुंभ की तैयारियों को लेकर संतों ने विचार विमर्श किया। उन्होंने दोनों आयोजनों को मिलजुलकर सफल बनाने को आह्वान किया। साथ ही देश में साधु- संतों को बदनाम करने की साजिशों से दूर रहने को कहा।
बृहस्पतिवार को भूपतवाला में आयोजित चादर समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे साधु-संतों ने नृसिंह धाम पीठ के नवनियुक्त महंत स्वामी राजेंद्रदास महाराज को महंताई की चादर ओढ़ाई। टीला गद्दाचार्य मंगल पीठाधीश्वर स्वामी माधवाचार्य महाराज ने कहा कि संतों का जीवन निर्मल जल के समान होता है। संत भक्तों को ज्ञान की प्रेरणा देकर उन्हें सत्य के मार्ग पर अग्रसर कर उनके कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। जो भक्त गंगा तट पर गुरु गद्दी के सानिध्य में संतों की वाणी को आत्मसात कर लेता है, उसका जीवन सफल हो जाता है। नृसिंह धाम पीठ के परमाध्यक्ष जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी अयोध्याचार्य महाराज ने कहा कि गुरु शिष्य परंपरा का सनातन संस्कृति में विशेष महत्व है। सनातन संस्कृति व संत परंपरा के अनुरूप ही उन्होंने स्वामी राजेंद्र दास महाराज को उत्तरदायित्व सौंपा है। नवनियुक्त महंत स्वामी राजेंद्र दास महाराज ने सभी संत महापुरुषों का आभार जताया। जगन्नाथ मंदिर गुजरात से पधारे स्वामी दिलीपदास व स्वामी रविंद्रदास महाराज ने कहा कि धर्मनगरी हरिद्वार ऋषि मुनियों की तपस्थली है। यहां मे महान संतों की तपस्या से ही संपूर्ण विश्व में सनातन धर्म की पताका फहरा रही है।
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दक्षिण काली पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज और जयराम पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने नवनियुक्त महंत स्वामी राजेंद्रदास महाराज के उज्जवल भविष्य की कामना की।
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इस अवसर पर महामंडलेश्वर डा. स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री, महामंडलेश्वर स्वामी फूलडोल दास, स्वामी मोहनदास, स्वामी ऋषिश्वरानंद, स्वामी रामेश्वरदास, महंत दुर्गादास, बाबा हठयोगी, स्वामी रघुवीर दास, स्वामी विष्णुदास, महंत मोहनदास रामायणी, स्वामी पटवारी महाराज, महंत रामकिशन दास, स्वामी ब्रजमोहन दास, स्वामी सीताराम दास, साध्वी वैष्णवी जयश्री, साध्वी विजय लक्ष्मी, स्वामी चंद्रमा दास, स्वामी जगदीश दास, स्वामी चिदविलासानंद, महंत मोहनसिंह, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी जगदीशानंद गिरि, स्वामी महावीर दास, स्वामी शिवशंकर दास आदि संतजन प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।