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जिला अस्पताल में नहीं मिले डॉक्टर, मरीजों की फजीहत
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हरिद्वार। निजी चिकित्सकों की हड़ताल और सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी ने मरीजों का मर्ज बढ़ा दिया है। मरीज और तीमारदार अस्पतालों के चक्कर काटकर निराश होकर लौटने को मजबूर हैं। प्राइवेट अस्पतालों की हड़ताल के कारण सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का दबाव बढ़ गया। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग की तरफ से पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। शुक्रवार को जिला अस्पताल में 14 में से इमरजेंसी के अलावा केवल दो ओपीडी हुई। ऐसे में मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
पिछले आठ दिन से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) से जुड़े प्राइवेट डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इसके बाद से सरकारी अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी अस्पतालों में समस्त ओपीडी चलाने के साथ 24 घंटे सेवा देने का दावा किया था, लेकिन हरिद्वार में यह दावे हवाई साबित हो रहे हैं। शुक्रवार को जिला अस्पताल में मात्र दो डॉक्टर फिजिशियन डॉ. संदीप टंडन और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शशीकांत ही ओपीडी में बैठे और मरीजों की जांच की। डॉ. रामप्रकाश की ड्यूटी इमरजेंसी में थी, लेकिन इमरजेंसी में कम मरीज होने के चलते बीच में समय निकालकर ओपीडी भी करते रहे। अस्पताल के दोनों सर्जन डॉ. अरुण पांडेय और डॉ. प्रणव प्रताप सिंह की ड्यूटी नसबंदी शिविर में होने से ओपीडी के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया गया। हड्डी रोग विशेषज्ञ की कोई जानकारी नहीं थी। अल्ट्रासाउंड भी नहीं हो सके। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शशीकांत ने बताया कि निजी अस्पतालों की हड़ताल से पहले तक सरकारी में 30 से 40 ओपीडी होती थी, लेकिन अब 100 से अधिक हो रही है।
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देहरादून से आते जाते हैं डाक्टर
अस्पताल के कई डॉक्टर देहरादून से आना जाना करते हैं। दोपहर तीन बजे देहरादून लौट जाते हैं। इसके बाद यदि अस्पताल में कोई गंभीर मरीज आता है तो उसे हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया जाता है। निजी अस्पतालों की हड़ताल के बाद भी सरकारी अस्पतालों के डाक्टर यहां नहीं ठहर रहे।
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दो दिन से अस्पताल के बाहर पड़ा रहा मरीज
जिला अस्पताल परिसर में एक लावारिस मरीज दो दिन से मुख्य द्वार के बाहर पड़ा है। शुक्रवार की दोपहर करीब डेढ़ बजे अमर उजाला की टीम अस्पताल पहुंची तो कैमरे की फ्लैश चलने पर अस्पताल प्रबंधन में खलबली मची। प्रबंधन की किरकिरी होने पर लावारिस मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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महिला अस्पताल का स्टाफ निभा रहा ड्यूटी
महिला अस्पताल में कुल तीन डॉक्टर होने के बावजूद समस्त स्टाफ मुस्तैदी के साथ ड्यूटी निभा रहा है। अस्पताल में जहां पिछले सप्ताह से पूर्व औसतन 15 से 20 डिलीवरी होती थी, लेकिन अब इनकी संख्या 40 तक पहुंच गई है। बृहस्पतिवार की सुबह 10 बजे से शुक्रवार की सुबह तक 35 डिलीवरी कराई गई। सीएमएस डॉ. शिखा जंगपांगी ने बताया कि समस्त स्टाफ ज्यादा काम कर रहा है।
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वर्जन
अस्पतालों में स्टाफ की कमी है, कुछ सरकारी कार्यक्रमों में भी डॉक्टर का जाना मजबूरी है। जिला अस्पताल के दोनों सर्जन में से एक को ही शिविर में भेजा जाएगा। इसके अलावा अन्य देहरादून से आने वाले मुख्य डॉक्टरों को भी निजी प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों की हड़ताल तक अस्पताल में ही रुकने को निर्देश दिए गए हैं।
- डॉ. प्रेमलाल, सीएमओ हरिद्वार
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पिछले आठ दिन से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) से जुड़े प्राइवेट डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इसके बाद से सरकारी अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी अस्पतालों में समस्त ओपीडी चलाने के साथ 24 घंटे सेवा देने का दावा किया था, लेकिन हरिद्वार में यह दावे हवाई साबित हो रहे हैं। शुक्रवार को जिला अस्पताल में मात्र दो डॉक्टर फिजिशियन डॉ. संदीप टंडन और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शशीकांत ही ओपीडी में बैठे और मरीजों की जांच की। डॉ. रामप्रकाश की ड्यूटी इमरजेंसी में थी, लेकिन इमरजेंसी में कम मरीज होने के चलते बीच में समय निकालकर ओपीडी भी करते रहे। अस्पताल के दोनों सर्जन डॉ. अरुण पांडेय और डॉ. प्रणव प्रताप सिंह की ड्यूटी नसबंदी शिविर में होने से ओपीडी के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया गया। हड्डी रोग विशेषज्ञ की कोई जानकारी नहीं थी। अल्ट्रासाउंड भी नहीं हो सके। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शशीकांत ने बताया कि निजी अस्पतालों की हड़ताल से पहले तक सरकारी में 30 से 40 ओपीडी होती थी, लेकिन अब 100 से अधिक हो रही है।
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देहरादून से आते जाते हैं डाक्टर
अस्पताल के कई डॉक्टर देहरादून से आना जाना करते हैं। दोपहर तीन बजे देहरादून लौट जाते हैं। इसके बाद यदि अस्पताल में कोई गंभीर मरीज आता है तो उसे हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया जाता है। निजी अस्पतालों की हड़ताल के बाद भी सरकारी अस्पतालों के डाक्टर यहां नहीं ठहर रहे।
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दो दिन से अस्पताल के बाहर पड़ा रहा मरीज
जिला अस्पताल परिसर में एक लावारिस मरीज दो दिन से मुख्य द्वार के बाहर पड़ा है। शुक्रवार की दोपहर करीब डेढ़ बजे अमर उजाला की टीम अस्पताल पहुंची तो कैमरे की फ्लैश चलने पर अस्पताल प्रबंधन में खलबली मची। प्रबंधन की किरकिरी होने पर लावारिस मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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महिला अस्पताल का स्टाफ निभा रहा ड्यूटी
महिला अस्पताल में कुल तीन डॉक्टर होने के बावजूद समस्त स्टाफ मुस्तैदी के साथ ड्यूटी निभा रहा है। अस्पताल में जहां पिछले सप्ताह से पूर्व औसतन 15 से 20 डिलीवरी होती थी, लेकिन अब इनकी संख्या 40 तक पहुंच गई है। बृहस्पतिवार की सुबह 10 बजे से शुक्रवार की सुबह तक 35 डिलीवरी कराई गई। सीएमएस डॉ. शिखा जंगपांगी ने बताया कि समस्त स्टाफ ज्यादा काम कर रहा है।
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वर्जन
अस्पतालों में स्टाफ की कमी है, कुछ सरकारी कार्यक्रमों में भी डॉक्टर का जाना मजबूरी है। जिला अस्पताल के दोनों सर्जन में से एक को ही शिविर में भेजा जाएगा। इसके अलावा अन्य देहरादून से आने वाले मुख्य डॉक्टरों को भी निजी प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों की हड़ताल तक अस्पताल में ही रुकने को निर्देश दिए गए हैं।
- डॉ. प्रेमलाल, सीएमओ हरिद्वार