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टस्कर हाथियों से घिरी कुंभ नगरी, खौफ के साये में रह रहे लोग
Updated Sat, 17 Nov 2018 12:39 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
हरिद्वार और भेल क्षेत्र में एक नहीं पांच पांच टस्कर हाथी मौत बनकर घूम रहे हैं। लगातार होते हाथियों के हमले के बाद लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं। शहर के कुछ इलाकों और भेल में शाम होते ही सन्नाटा पसर जाता है। हाथियों के डर से लोग अंधेरा होने से पहले घरों में कैद हो जात हैं।
बीते कुछ वर्षों में शहर और आसपास के क्षेत्र में जंगली हाथियों को आतंक ज्यादा बढ़ा है। केवल तीन वर्ष के भीतर ही हाथियों ने आठ लोगों को पटक पटककर मार डाला। कुछ माह पहले तो तीन लोगों को एक ही टस्कर हाथी ने मारा था। बुधवार को भी इसी बिगड़ैल हाथी ने ही भेलकर्मी विरेंद्र को पटक कर मार डाला। वन विभाग और लोगों को भी अभी तक यही पता था कि भेल में एक ही टस्कर हाथी है। विभाग की तरफ ट्रेस करने पर सामने आया कि भेल में लगभग पांच टस्कर हाथी घूम रहे हैं। मंगलवार की रात भी भेल की सड़कों पर टस्कर हाथी को देखा गया।
कुछ दिन पूर्व एक डेढ़ दांत वाले और अन्य हाथियों को देर रात वन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद जंगल की ओर भगाया था। यह वही हाथी है जो बीते कई वर्षों से लोगों के लिए दहशत बना हुआ है और रात के समय तो वाहनों का पीछा भी करता है। टस्करों की संख्या बढ़ने से भेल कर्मी सबसे ज्यादा डरे हुए हैं। रात के समय भी कई लोगों को ड्यूटी करनी पड़ती है। कालोनियों में रहने वाले लोग भी शाम को अंधेरा होने के बाद और सुबह उजाला होने तक बाहर नहीं निकल रहे।
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सीपीयू की भी उड़ी नींद
सिटी पेट्रोल यूनिट का कार्यालय टिबड़ी में पार्क से सटे क्षेत्र में हैं। इस क्षेत्र में भी हाथी आ जाते हैं। कई बार सीपीयू कार्यालय के समीप भी टस्कर हाथी को देखा गया है। जिस कारण सीपीयू कार्यालय में तैनात कर्मियों की भी रातों की नींद उड़ गई है।
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हरिद्वार और भेल क्षेत्र में एक नहीं पांच पांच टस्कर हाथी मौत बनकर घूम रहे हैं। लगातार होते हाथियों के हमले के बाद लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं। शहर के कुछ इलाकों और भेल में शाम होते ही सन्नाटा पसर जाता है। हाथियों के डर से लोग अंधेरा होने से पहले घरों में कैद हो जात हैं।
बीते कुछ वर्षों में शहर और आसपास के क्षेत्र में जंगली हाथियों को आतंक ज्यादा बढ़ा है। केवल तीन वर्ष के भीतर ही हाथियों ने आठ लोगों को पटक पटककर मार डाला। कुछ माह पहले तो तीन लोगों को एक ही टस्कर हाथी ने मारा था। बुधवार को भी इसी बिगड़ैल हाथी ने ही भेलकर्मी विरेंद्र को पटक कर मार डाला। वन विभाग और लोगों को भी अभी तक यही पता था कि भेल में एक ही टस्कर हाथी है। विभाग की तरफ ट्रेस करने पर सामने आया कि भेल में लगभग पांच टस्कर हाथी घूम रहे हैं। मंगलवार की रात भी भेल की सड़कों पर टस्कर हाथी को देखा गया।
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कुछ दिन पूर्व एक डेढ़ दांत वाले और अन्य हाथियों को देर रात वन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद जंगल की ओर भगाया था। यह वही हाथी है जो बीते कई वर्षों से लोगों के लिए दहशत बना हुआ है और रात के समय तो वाहनों का पीछा भी करता है। टस्करों की संख्या बढ़ने से भेल कर्मी सबसे ज्यादा डरे हुए हैं। रात के समय भी कई लोगों को ड्यूटी करनी पड़ती है। कालोनियों में रहने वाले लोग भी शाम को अंधेरा होने के बाद और सुबह उजाला होने तक बाहर नहीं निकल रहे।
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सीपीयू की भी उड़ी नींद
सिटी पेट्रोल यूनिट का कार्यालय टिबड़ी में पार्क से सटे क्षेत्र में हैं। इस क्षेत्र में भी हाथी आ जाते हैं। कई बार सीपीयू कार्यालय के समीप भी टस्कर हाथी को देखा गया है। जिस कारण सीपीयू कार्यालय में तैनात कर्मियों की भी रातों की नींद उड़ गई है।