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जलाशय ही प्यासे हैं तो लोगों के हलक कैसे होंगे तर
Updated Tue, 17 Jul 2018 11:08 PM IST
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रतनमणी डोभाल
हरिद्वार। शहर की जलापूर्ति के लिए बनाए गए तीन ओवरहेड टैंकों तक तकनीकी दिक्कतों के चलते पानी नहीं पहुंच रहा है। जबकि इनके निर्माण और पाइप लाइन बिछाने में करोड़ों रुपये खर्च हुए हैं। निर्माण इकाई जल निगम एवं जलापूर्ति करने वाले जल संस्थान के अधिकारी इस दिक्कत के लिए एक-दूसरे के सर ठीकरा फोड़ रहे हैं। समस्या के समाधान की दिशा में कोई कुछ करने को तैयार नहीं है।
हरकी पैड़ी तथा उसके आसपास के बाजार तथा रिहायशी क्षेत्र की जलापूर्ति के लिए अस्सी के दशक में दो ओवरहेड टैंक बनाए गए थे, लेकिन इस तक पानी पहुंचा ही नहीं। कुंभ मेला 2010 के दौरान जल निगम ने इन जलाशयों से जलापूर्ति का निर्णय लिया। इसके लिए पंतद्वीप में आईवेल लगाने के साथ ही ओवरहेड टैंकों को भरने के लिए पाइप लाइन बिछाई गई। एक करोड़ रुपये से अधिक का बजट इस काम पर खर्च करने के बावजूद टैंक तक पानी पहुंचा ही नहीं। ऐसे ही जल निगम ने लगभग डेढ़ करोड़ रुपये खर्च कर जेएनएनयूआरएम के तहत कुंभ 2010 के मौके पर रामलीला मैदान में 650 किलोलीटर पानी की क्षमता का नया ओवरहेड टैंक बनाया। उसके लिए एक नलकूप भी बनाया। पाइप लाइन भी बिछाई गई, परंतु ओवरहेड अैंक तक पानी पहुंचा ही नहीं।
भीमगोडा के ओवरहेड अैंक की ऊंचाई काफी अधिक है। ऐसे में टैंक तक पानी पहुंचता नहीं है। इसको बेकार बनाया गया है। हमें जैसा मिला था वैसा ही खड़ा है। हरकी पैड़ी के दो ओवरहेड अैंक पर भी आजतक पानी चढ़ा नहीं है। उनको भरने के लिए आईवेल बनाने तथा पाइप लाइन डालने की जानकारी तो मिली है पर, कभी उन्हें भरा नहीं गया है। - नरेशपाल सिंह अधिशासी अभियंता जल संस्थान।
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जल निगम ने हरकी पैड़ी में अस्सी के दशक मेें बने ओवरहेड टैंकों तक पानी पहुंचाने के लिए राइजिंग मेन पाइप लाइन डाल दी थी। जलाशयों की साफ-सफाई तथा मरम्मत भी करा दी थी, लेकिन जल संस्थान ने उनसे जलापूर्ति करने से यह कहकर मनाकर दिया कि हरकी पैड़ी क्षेत्र में 24 घंटे जलापूर्ति की जानी है इसलिए सीधे पाइप लाइनों से ही पानी दिया जाएगा।
- मोहम्मद मीसम अधिशासी अभियंता जल निगम
हरिद्वार। शहर की जलापूर्ति के लिए बनाए गए तीन ओवरहेड टैंकों तक तकनीकी दिक्कतों के चलते पानी नहीं पहुंच रहा है। जबकि इनके निर्माण और पाइप लाइन बिछाने में करोड़ों रुपये खर्च हुए हैं। निर्माण इकाई जल निगम एवं जलापूर्ति करने वाले जल संस्थान के अधिकारी इस दिक्कत के लिए एक-दूसरे के सर ठीकरा फोड़ रहे हैं। समस्या के समाधान की दिशा में कोई कुछ करने को तैयार नहीं है।
हरकी पैड़ी तथा उसके आसपास के बाजार तथा रिहायशी क्षेत्र की जलापूर्ति के लिए अस्सी के दशक में दो ओवरहेड टैंक बनाए गए थे, लेकिन इस तक पानी पहुंचा ही नहीं। कुंभ मेला 2010 के दौरान जल निगम ने इन जलाशयों से जलापूर्ति का निर्णय लिया। इसके लिए पंतद्वीप में आईवेल लगाने के साथ ही ओवरहेड टैंकों को भरने के लिए पाइप लाइन बिछाई गई। एक करोड़ रुपये से अधिक का बजट इस काम पर खर्च करने के बावजूद टैंक तक पानी पहुंचा ही नहीं। ऐसे ही जल निगम ने लगभग डेढ़ करोड़ रुपये खर्च कर जेएनएनयूआरएम के तहत कुंभ 2010 के मौके पर रामलीला मैदान में 650 किलोलीटर पानी की क्षमता का नया ओवरहेड टैंक बनाया। उसके लिए एक नलकूप भी बनाया। पाइप लाइन भी बिछाई गई, परंतु ओवरहेड अैंक तक पानी पहुंचा ही नहीं।
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भीमगोडा के ओवरहेड अैंक की ऊंचाई काफी अधिक है। ऐसे में टैंक तक पानी पहुंचता नहीं है। इसको बेकार बनाया गया है। हमें जैसा मिला था वैसा ही खड़ा है। हरकी पैड़ी के दो ओवरहेड अैंक पर भी आजतक पानी चढ़ा नहीं है। उनको भरने के लिए आईवेल बनाने तथा पाइप लाइन डालने की जानकारी तो मिली है पर, कभी उन्हें भरा नहीं गया है। - नरेशपाल सिंह अधिशासी अभियंता जल संस्थान।
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जल निगम ने हरकी पैड़ी में अस्सी के दशक मेें बने ओवरहेड टैंकों तक पानी पहुंचाने के लिए राइजिंग मेन पाइप लाइन डाल दी थी। जलाशयों की साफ-सफाई तथा मरम्मत भी करा दी थी, लेकिन जल संस्थान ने उनसे जलापूर्ति करने से यह कहकर मनाकर दिया कि हरकी पैड़ी क्षेत्र में 24 घंटे जलापूर्ति की जानी है इसलिए सीधे पाइप लाइनों से ही पानी दिया जाएगा।
- मोहम्मद मीसम अधिशासी अभियंता जल निगम