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प्रकृति और परमेश्वर के मिलन का महापर्व बसंत: डॉ. पण्ड्या
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
शांतिकुंज के अधिष्ठाता डा. प्रणव पंड्या ने कहा कि वसंत प्रकृति और परमेश्वर के मिलन का महापर्व है। इसी समय प्रकृति सजधज कर परमेश्वर से मिलती है।
वह शांतिकुंज में वसंत उत्सव संस्था के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के आध्यात्मिक जन्मोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान सरस्वती पूजन, गुरु पूजन और पर्व पूजन के साथ हजारों साधकों ने आचार्य को श्रद्घांजलि अर्पित की। डा. प्रणव पंड्या ने कहा कि आज समाज में फैले अंधकार का प्रमुख कारण सद्बुद्धि की कमी है। उसे दूर करने के लिए गायत्री साधना आवश्यक है। डॉ. पंड्या ने महर्षि अरविंद, रामकृष्ण परमहंस आदि महापुरुषों का उदाहरण देते हुए कहा कि साधना से ही ये सिद्ध हुए और समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य कर पाए। पंडित श्रीराम शर्मा ने भी अपनी साधना से समाज को नई दिशा धारा दी है।
इस अवसर पर संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने भी बसंत को उल्लास और उमंग का महापर्व बताया। उन्होंने कहा कि जब तक सामूहिक साधना नहीं होगी तब तक सिद्धियां प्राप्त नहीं हो सकती। वसंत पर्व के दौरान शताधिक लोगों को गुरु दीक्षा दी। देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों की संख्या में बटुकों ने यज्ञोपवीत संस्कार कराए। नई दिल्ली, ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों से आए 19 युगलों का आदर्श विवाह संस्कार संपन्न हुआ। नामकरण, मुंडन, विद्यारंभ सहित कई संस्कार बड़ी संख्या में संपन्न हुए। डॉ पंड्या और शैलदीदी ने धर्मध्वजा फहराकर पूजन किया। गायत्री विद्यापीठ व देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच आकर्षक रंगोली भी सजाई गई।
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शांतिकुंज के अधिष्ठाता डा. प्रणव पंड्या ने कहा कि वसंत प्रकृति और परमेश्वर के मिलन का महापर्व है। इसी समय प्रकृति सजधज कर परमेश्वर से मिलती है।
वह शांतिकुंज में वसंत उत्सव संस्था के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के आध्यात्मिक जन्मोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान सरस्वती पूजन, गुरु पूजन और पर्व पूजन के साथ हजारों साधकों ने आचार्य को श्रद्घांजलि अर्पित की। डा. प्रणव पंड्या ने कहा कि आज समाज में फैले अंधकार का प्रमुख कारण सद्बुद्धि की कमी है। उसे दूर करने के लिए गायत्री साधना आवश्यक है। डॉ. पंड्या ने महर्षि अरविंद, रामकृष्ण परमहंस आदि महापुरुषों का उदाहरण देते हुए कहा कि साधना से ही ये सिद्ध हुए और समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य कर पाए। पंडित श्रीराम शर्मा ने भी अपनी साधना से समाज को नई दिशा धारा दी है।
इस अवसर पर संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने भी बसंत को उल्लास और उमंग का महापर्व बताया। उन्होंने कहा कि जब तक सामूहिक साधना नहीं होगी तब तक सिद्धियां प्राप्त नहीं हो सकती। वसंत पर्व के दौरान शताधिक लोगों को गुरु दीक्षा दी। देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों की संख्या में बटुकों ने यज्ञोपवीत संस्कार कराए। नई दिल्ली, ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों से आए 19 युगलों का आदर्श विवाह संस्कार संपन्न हुआ। नामकरण, मुंडन, विद्यारंभ सहित कई संस्कार बड़ी संख्या में संपन्न हुए। डॉ पंड्या और शैलदीदी ने धर्मध्वजा फहराकर पूजन किया। गायत्री विद्यापीठ व देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच आकर्षक रंगोली भी सजाई गई।
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